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नव-संवत्सर 2075

नव सम्वत सनातन हिन्दू संस्कृति और भारतीय परम्पराओं में एक बहुत ही विशेष दिन होता है क्योंकि इस दिन से भारतीय वैदिक गणना के अनुसार नया वर्ष आरम्भ होता है जिसे हम हिन्दू नव वर्ष के रूप में मानते हैं और वास्तव में तो यही भारत का वास्तविक नव-वर्ष होता है......वैदिक गणना के अनुसार "चैत्र मास" के "शुक्ल पक्ष" की "प्रतिपदा" तिथि को नव-सम्वत अर्थात नये वर्ष का आरम्भ होता है जो अगले चैत्र मास की अमावश्या तक चलता है भारतीय सम्वत को "विक्रम सम्वत" के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि 2075 वर्ष पूर्व सम्राट विक्रमादित्य ने इसी दिन अपना राज्य स्थापित कर विक्रम सम्वत की शुरुआत की थी………….सनातन हिन्दू परम्पराएँ केवल एक हर्षोल्लास का साधन ना होकर बहुत गूढ़ महत्व रखने वाली होती हैं भारतीय नव-सम्वत भी अपने में बहुत विशेष महत्व रखने के साथ साथ पौराणिक दृष्टि से भी बहुत विशेष है पौराणिक व्याख्यानों के अनुसार चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा के ही दिन ब्रह्मा जी ने इस सृष्टि की रचना की थी, त्रेता युग में इसी दिन भगवान राम का राज्यभिषेक इसी दिन हुआ था, युगांतर में युधिष्ठिर का राज्यभिषेक भी इसी दिन हुआ था और इसी दिन भगवान् का मतस्य अवतार हुआ था नव सम्वत के इस पौराणिक महत्व के अलावा जो बहुत विशेष बात है के चैत्र शुल्क प्रतिपदा से ही चैत्र नवरात्र का भी आरम्भ होता है जिससे नवसम्वत के प्रथम दिन का महत्व बहुत बढ़ जाता है कुछ स्थानों पर इसे गुड़ी पड़वा के नाम से भी जाना जाता है…

भारत का नव सम्वत अर्थात हमारा नया वर्ष अपने में जितनी विशेषताएं समाये हुए है वैसा विश्व की किसी संस्कृति में आपको नहीं मिलेगा सर्वप्रथम तो हिन्दू नव सम्वत का आरम्भ वसंत ऋतू में होता है जब प्रकृति का नवीनीकरण हो रहा होता है प्रकृति इस समय अपना श्रृंगार कर रही होती है और वातावरण में एक नवीन ऊर्जा बिखरी रहती है और इसका जो ऐतिहासिक महत्व है वह तो श्रेष्ठ है ही बाकि नव वर्ष के प्रथम दिन से ही नवरात्रि का आरम्भ होना उस आदिशक्ति की प्रेममय कृपा तो देता ही है और यह बहुत गूढ़ बात है जो दर्शाती है के वास्तव में हमारे सृजन में मूल में वो आदि शक्ति ही है बाकि नव नवर्ष के आरम्भ में ही शक्ति पूजा हमें पूरे वर्ष भर के लिए ऊर्जान्वित करके शशक्त भी बनाती है यह भी हमारे नव वर्ष की एक विशेषता है और यह हमें साक्षात् देखने को भी मिलता है के विक्रम संवत के प्रथम दिन वातावरण में एक विशेष दिव्य ऊर्जा बिखरी होती है तो सनातन संस्कृति तो सकारात्मक ऊर्जा से भरी पड़ी है इसलिए हिन्दू नव सम्वत पर जो ऊर्जा वातावरण में होती है वैसा अन्य दिनों में आपको नहीं मिलेगा

इस बार विशेष - इस बार 18 मार्च 2018 रविवार को नव-सम्वत 2075 का आरम्भ हो रहा है वैदिक गणना के अनुसार इस नए सम्वत का नाम "परिधावी" है... चैत्र शुक्ल प्रतिपदा रविवार के सूर्योदय में होने से इस बार इस नए सम्वत 2075 का "राजा सूर्य है" तथा मेष संक्रांति शनिवार को होने से इस बार सम्वत का "मंत्री शनि है" इसलिए इस सम्वत में सूर्य और शनि का ही अधिक प्रभुत्व रहेगा.... वैसे नया सम्वत तो 18 मार्च रविवार को ही मनाया जायेगा क्योंकि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 18 मार्च को ही उदय तिथि के रूप में पड़ रही है लेकिन तिथि आरम्भ गणना के रूप में 17 तारिख की शाम 6 बजकर 42 मिंट पर ही कन्या लग्न में प्रतिपदा शुरू हो जाएगी इसलिए इस बार वर्षारम्भ लग्न कन्या को माना जायेगा

कैसा रहेगा नव सम्वत –

इस बार सम्वत का राजा सूर्य होने से इस वर्ष पर सूर्य का सर्वाधिक प्रभाव रहेगा... सूर्य को ज्योतिष में सरकार, सरकारी कार्य, सत्ता, राजनीति, प्रतिष्ठा, उच्च पद, और सरकारी योजनाओं का कारक माना गया है इसलिए इस वर्ष सरकार से जुड़कर कार्य करने वाले या सरकारी सर्विस वाले लोगो के जीवन में उन्नति होगी प्रतिष्ठा और पद वृद्धि की सम्भावना बनेगी, सरकार में उच्च पद पाई कार्यरत व्यक्तियों का प्रभुत्व बढ़ेगा, सम्वत का राजा सूर्य होने से राजनीति में करियर बनाने का प्रयास कर रहे जातकों के लिए भी ये नव वर्ष नए सुअवसर लेकर आएगा, सूर्य सम्वत का राजा होने से सरकार द्वारा चलाई जा रही सरकारी योजनाओं में तेजी और वृद्धि होगी..... इस सम्वत का मंत्री शनि होने से राष्ट्रिय अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नयी तकनीक और तकनिकी कार्यों का विकास होगा तथा तकनिकी क्षेत्रों में कार्य करने वाले लोगों के जीवन में भी नए सुअवसर आएंगे.... सम्वत का राजा सूर्य होने से सिंह राशि सिंह लग्न और जिन लोगों की कुंडली में सूर्य की दशा चल रही है उनके लिए भी नव-सम्वत अच्छे परिवर्तन लाएगा... इसके अलावा वर्ष प्रवेश लग्न कन्या होने से बौद्धिक और वाणी प्रधान कार्य करने वाले लोगों का प्रभुत्व भी बढ़ेगा कम्प्यूटर और कम्युनिकेशन के क्षेत्रों में भी प्रगति होगी…पर सम्वत राजा सूर्य होने से वर्षा में कमी अति है क्योंकि सूर्य अग्नि तत्व ग्रह है इसलिए इस वर्ष गर्मी अधिक और वर्षा कम रहेगी और इस बार राजा सम्वत का राजा सूर्य तथा मंत्री शनि क्योंकि परस्पर विरोधी ग्रह हैं इसलिए समाज में जनांदोलन, उठापटक और सत्ता में परस्पर संघर्ष की स्थिति रहेगी

नव सम्वत (नव वर्ष) के दिन अपने घर और मन्दिरों पर नयी ध्वज लगाने की परंपरा है इसे विजय और समृद्धि देने वाला माना जाता है इसके अलावा इस दिन घर के मुख्य द्वार पर स्वस्तिक बनाकर रंगोली आदि भी बनायीं जाती है इस दिन घर और मन्दिरों में पूजा पाठ के साथ साथ घर में तुलसी पूजन अवश्य करना चाहिए तथा नव वर्ष पर गौ सेवा और गरीब व्यक्ति, कुष्ठाश्रम, वृद्धाश्रम आदि में श्रद्धानुसार दानादि देना चाहिए इस दिन ब्राह्मणों द्वारा पंचांग सुनकर उनका आशीर्वाद लिया जाता है तथा भेंट स्वरुप उन्हें दक्षिणा भोजन आदि दिया जाता है।



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