Article of the Month - Astroindusoot

Astro Articles

राजनीति में सफलता निर्भर करती है इन ग्रहों पर

आज के समय में राजनेताओं को वही महत्व प्राप्त है जो प्राचीन समय में एक राजा का होता था। किसी भी देश या राज्य की उन्नति और समृद्धि उसके राजनैतिक नेताओं की सूझ-बूझ, इच्छाशक्ति और कार्यकुशलता पर निर्भर करती है वहीँ जनता के मध्य और विभिन्न प्रतियोगियों के साथ एक सफल राजनेता बनना भी किसी चुनौती से कम नहीं है एक सफल राजनेता में जहाँ अच्छी बौद्धिक कुशलता, वाक्शक्ति, अच्छी निर्णय-शक्ति आदि गुण होने चाहियें वहीँ उसमे जनता के बीच जाकर उनका विश्वाश जीतने की कला भी होनी चाहिये, तो कौनसे ग्रह और ग्रहस्थितियां एक व्यक्ति को राजनीति में सफलता दिलाते हैं आइये जानते हैं –

"ज्योतिष में सरकार, सरकारी कार्य, सत्ता और राजनीती के लिए "सूर्य" को ही कारक माना गया है "शनि" जनता और जनता से मिलने वाली सपोर्ट का कारक है इसी तरह कुंडली का "चतुर्थ भाव" भी जनता की सपोर्ट को दिखाता है इसके आलावा कुंडली का छठा भाव प्रतिस्पर्धा और विरोधियों तथा तीसरा भाव अपनी शक्ति और पराक्रम का कारक होने से राजनीती में अपनी सहायक भूमिका निभाते हैं।"

सूर्य - राजनीति के क्षेत्र में सफलता के लिए सूर्य ही सर्वाधिक महत्वपूर्ण ग्रह है क्योंकि सूर्य को ही सरकार और सत्ता का कारक माना गया है इसके आलावा शाशन की कुशलता, प्रसिद्धि, प्रीतिष्ठा, इच्छाशक्ति और यश का का कारक भी सूर्य ही होता है और राजनीती में आगे बढ़ने के लिए प्रसिद्धि , प्रतिष्ठा का होना बहुत आवश्यक है इसलिए भी राजनीती में सफलता पाने के लिए कुंडली में सूर्य का बलि होना बहुत आवश्यक है।

शनि - शनि को जनता और जनता से मिलने वाली सपोर्ट का कारक माना गया है और सक्रीय राजनीति में सफल होने के लिए जनता का साथ मिलना बहुत आवश्यक है अतः कुंडली में बलवान शनि जनता का सहयोग दिलाकर व्यक्ति को सफल राजनेता बनाता है।

चतुर्थ-भाव - कुंडली का चौथा भाव भी जनता का कारक है अतः राजनीती में सफलता के लिए कुंडली के चतुर्थ भाव और चतुर्थेश का बलि होना भी बहुत आवश्यक हैl
षष्ठ और तृतीय भाव - कुंडली का छठा और तीसरा भाव प्रतिस्पर्धा की क्षमता और विरोधियों पर विजय को दर्शाता है अतः कुंडली में इन दोनों भावों का बलि होना भी राजनीती में सहायक होता है तथा विरोधियों पर विजय दिलाकर प्रतिस्पर्धा में आगे रखता है।

निष्कर्ष - उपरोक्त तथ्यों में हमने देखा के राजनैतिक सफलता के लिए मुख्य घटक सूर्य , शनि और चतुर्थ भाव ही होते हैं सूर्य सीधे-सीधे सत्ता और राजनीति का कारक है ही तथा शनि व् चतुर्थ भाव जनता का सहयोग दिलाते हैं अतः निष्कर्षतः राजनैतिक सफलता के लिए कुंडली में सूर्य , शनि और चतुर्थ भाव का अच्छी स्थिति में होना बहुत आवश्यक है।इसके अतिरिक्त राहु कूटनीति का ग्रह होने से बली या शुभ स्थिति में स्थित राहु की भी यहाँ सहायक भूमिका होती है। अब यहाँ एक महत्वपूर्ण बात और है राजनीति के क्षेत्र में आगे बढ़ने के भी दो मार्ग हैं एक सक्रीय चुनावी राजनीति और दूसरी संगठन की राजनीति, आप राजनीती के क्षेत्र में किसी भी प्रकार जुड़े हों सफलता के लिए कुंडली में सूर्य का अच्छा होना तो आवश्यक है ही परन्तु सक्रीय चुनावी राजनीती में सफल होने के लिए शनि और चतुर्थ भाव का बलि होना बहुत आवश्यक है। जिन लोगों की कुंडली में शनि कमजोर या पीड़ित होता है उन लोगों को जनता का सहयोग न मिल पाने के कारण वे चुनावी राजनीती में सफल नहीं हो पाते अतः कमजोर शनि वाले लोगों को चुनावी राजनीती में ना जाकर संगठन में रहकर कार्य करना चाहिये।

राजनैतिक सफलता के कुछ विशेष योग -

1. यदि सूर्य स्व या उच्च राशि (सिंह, मेष) में होकर केंद्र, त्रिकोण आदि शुभ भावो में बैठा हो तो राजनीति में सफलता मिलती है।

2. सूर्य दशम भाव में हो या दशम भाव पर सूर्य की दृष्टि हो तो राजनीति में सफलता मिलती है।

3. सूर्य यदि मित्र राशि में शुभ भाव में हो और अन्य किसी प्रकार पीड़ित ना हो तो भी राजनैतिक सफलता मिलती है।

4. शनि यदि स्व, उच्च राशि (मकर , कुम्भ, तुला) में होकर केंद्र त्रिकोण आदि शुभ स्थानों में बैठा हो तो राजनीती में अच्छी सफलता मिलती है।

5.यदि चतुर्थेश चौथे भाव में बैठा हो या चतुर्थेश की चतुर्थ भाव पर दृष्टि हो तो ऐसे व्यक्ति को विशेष जनसमर्थन मिलता है।

6. चतुर्थेश का स्व या उच्च राशि में होकर शुभ स्थानं में होना भी राजनैतिक सफलता में सहायक होता है।

7. बृहस्पति यदि बलि होकर लग्न में बैठा हो तो राजनैतिक सफलता दिलाता है।

8. दशमेश और चतुर्थेश का योग हो या दशमेश चतुर्थ भाव में और चतुर्थेश दशम भाव में हो तो ये भी राजनीती में सफलता दिलाता है

9. सूर्य और बृहस्पति का योग केंद्र ,त्रिकोण में बना हो तो ये भी राजनैतिक सफलता दिलाता है।

10. बुध-आदित्य योग (सूर्य + बुध) यदि दशम भाव में बने और पाप प्रभाव से मुक्त हो तो राजनैतिक सफलता दिलाता है।

विशेष - कुंडली में सूर्य , शनि और चतुर्थ भाव बलि होने के बाद व्यक्ति को राजनीति में किस स्तर तक सफलता मिलेगी यह उसकी पूरी कुंडली की शक्ति और अन्य ग्रह स्थितियों पर निर्भर करता है।
जिन लोगो की कुंडली में सूर्य नीच राशि (तुला) में हो राहु से पीड़ित हो अष्टम भाव में हो या अन्य प्रकार पीड़ित हो तो राजनीति में सफलता नहीं मिल पाती या बहुत संघर्ष बना रहता है। शनि पीड़ित या कमजोर होने से ऐसा व्यक्ति चुनावी राजनीति में सफल नहीं हो पाता, कमजोर शनि वाले व्यक्ति की कुंडली में अगर सूर्य बलि हो तो संगठन में रहकर सफलता मिलती है।

उपाय - राजनीती से जुड़े या राजनीती में जाने की इच्छा रखने वाले लोगों को सूर्य उपासना अवश्य करनी चाहिये -

1. आदित्य हृदय स्तोत्र का रोज पाठ करें।

2. सूर्य को रोज जल अर्पित करें।

3. ॐ घृणि सूर्याय नमः का जाप करें। ..............

।।श्री हनुमते नमः।।

अगर आप अपने जीवन से जुडी किसी भी समस्या किसी भी प्रश्न जैसे हैल्थ एज्युकेशन करियर जॉब मैरिज बिजनेस आदि का सटीक ज्योतिषीय विश्लेषण और समाधान लेना चाहते हैं तो हमारी वैबसाईट पर Online Consultation के ऑप्शन से ऑनलाइन कंसल्टेशन लेकर अपनी समस्या और प्रश्नो का घर बैठे समाधान पा सकते हैं अभी प्लेस करें अपना आर्डर कंसल्ट करें ऑनलाइन

Customer Care – 9027498498

WhatsApp - 9068311666

ASTRO ARTICLES