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कार्तिक मास का महत्व

भारत वर्ष और सनातन हिन्दू संस्कृति में वैसे तो पूरे वर्ष भर ही पर्व, व्रत और त्योहारों की निरंतर उपस्थिति बनी ही रहती है पर वर्ष के बारह हिंदी महीनो में से भी चातुर्मास (श्रावण, भाद्रपद,अश्विन,कार्तिक) के चार माह धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से बड़े विशेष माने गए हैं इसी लिए चातुर्मास के इन चार महीनो में सांसारिक विवह आदि मंगलकार्यों को रोककर जीवन को धर्म के कार्यों में लगाया जाता है पर चातुर्मास के चार महीनो में से भी "कार्तिक मास" का सबसे अधिक और विशेष महत्त्व बताया गया है पौराणिक व्याख्यानों से लेकर शास्त्रोक्त दृष्टिकोण तक में कार्तिक मास की बड़ी प्रसंसा और विशेष वर्णन किया गया है, कार्तिक मास में वैदिक हिन्दू संस्कृति के सबसे बड़े सर्वाधिक महत्त्व रखने वाले व्रत पर्व और त्यौहार तो होते ही हैं पर कार्तिक मास को विशेष रूप से धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से सर्वाधिक महत्वपूर्ण माह माना गया है।

हिंदी पंचांग के अनुसार "कार्तिक मास" वर्ष का आठवां महीना होता है कार्तिक मास को हिन्दू धर्म ग्रंथों धार्मिक दृष्टि से सर्वाधिक महत्वपूर्ण बताया गया है कार्तिक मास का पुण्यकाल अश्विन शुक्ल पूर्णिमा अर्थात शरद पूर्णिमा से ही आरंभ हो जाता है और अश्विन पूर्णिमा से कार्तिक पूर्णिमा तक का ये एक माह सांसारिक विषयों का त्याग करके धर्म के कार्यों में व्यतीत किया जाता है। इस बार 6 अक्टूबर 2017 शुक्रवार से कार्तिक मास शुरू हो जायेगा तथा 4 नवम्बर शनिवार कार्तिक पूर्णिमा तक पवित्र कार्तिक मास विद्यमान रहेगा। कार्तिक मास को विशेष रूप से भगवान् श्री हरी विष्णु की उपासना का काल माना गया है इसलिए कार्तिक मास में विशेष रूप से भगवान् विष्णु की पूजा की जाती है पौराणिक व्याख्यानों के अनुसार कार्तिक मास भगवान् विष्णु को अति प्रिय है और श्री हरी का स्वयं वचन है के वनस्पतियों में तुलसी तिथियों में एकादशी और माह में कार्तिक मास मुझे अति प्रिय है इसी लिए कार्तिक को विष्णु मास के नाम से भी जाना जाता है इस समय में धार्मिक और आध्यात्मिक ऊर्जाएं अपने चरम पर होती है जिससे इस मास में किये गए भजन पूजन अनुष्ठान दान आदि कई गुना शुभ परिणामदायक होते हैं भगवान् विष्णु की पूजा में तुलसी की उपस्थिति का सर्वाधिक महत्त्व है बिना तुलसी के विष्णु भगवान् के निमित्त की गयी पूजा सार्थक नहीं होती इसलिए कार्तिक मास में तुलसी पूजन का भी बड़ा विशेष महत्त्व है पूरे कार्तिक मास में तुलसी का नित्य पूजन अवश्य किया जाता है तथा वैष्णव विधि विधानों में सर्वाधिक महत्वपूर्ण तुलसी विवाह का दिव्य प्रयोजन भी इसी पवित्र कार्तिक मास में किया जाता है। इस मास में किये गए भजन, पूजा, मन्त्र जाप, कथा श्रवण, दान आदि से जहाँ आध्यात्मिक प्राणियों की प्रभु प्रेम और मोक्ष की कामना पूर्ण होती है तो वहीँ सांसारिक व्यक्तियों को समृद्धि, यश, कीर्ति और सफलता की प्राप्ति होती है दोनों ही दृष्टि से कार्तिक मास को श्री हरी कृपा पाने का श्रेष्ठ समय माना गया है। ....... शास्त्रोक्त नियमों के अनुसार कार्तिक मास में तामसिक आहार और विचारों का त्याग कर ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए श्रद्धापूर्वक प्रभु स्मृण पूजा उपासना दान आदि करने से श्री हरी की कृपा प्राप्त होती है
कार्तिक मास में उपासना, पूजा, दान, कथा श्रवण और तुलसी पूजन तो किया ही जाता है पर विशेष रूप से कार्तिक मास में "प्रातः स्नान" का सबसे अधिक माना गया है पूरे कार्तिक मास में ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान किया जाता है और इसके बाद भगवान् विष्णु की कथाओं का पाठ और श्रवण किया जाता है पूरे मास इस नियम को करने के बाद कार्तिक पूर्णिमा पर पवित्र नदियों और तीर्थों में स्नान करके इस व्रत को पूरा किया जाता है कार्तिक मास में इस प्रातः स्नान और हरी कथा श्रवण को विशेष रूप से विवाह की कामना रखने वाली कुवारी कन्याओं के लिए बहुत शुभ माना गया है मास भर इस नियम को करने से जहाँ विवाह योग्य कन्याओं को श्रेष्ठ वर की कामना पूरी होती है तो वहीँ विवाहितों के परिवार में सुख और समृद्धि का आगमन होता है।

भगवान विष्णु की पूजा और कथा के साथ साथ कार्तिक मास में तुलसी पूजन का भी बड़ा विशेष महत्व है इसमें प्रतिदिन तुलसी की सेवा और तुलसी के सम्मुख प्रतिदिन प्रातः सायं घी का दीपक प्रज्वलित किया जाता है नियमित रूप से पूरे मास इस नियम को करने से श्री हरी की विशेष कृपा और घर में सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है। कार्तिक के पूरे महीने में दीपदान का भी बड़ा महत्व माना गया है पूरे माह में पवित्र नदियों, तीर्थों, मन्दिरों और घरों में भी दीप प्रज्वलित किये जाते हैं जो शरदपूणिमा से शुरू होकर कार्तिक पूर्णिमा तक निरन्तर किया जाता है दीप प्रज्वलित करने के पीछे धार्मिक दृष्टि तो है ही पर दीप प्रज्वलित करना अन्धकार से प्रकास की और जाने, दरिद्रता से समृद्धि की और जाने तथा अज्ञानता से ज्ञान की और जाने का सन्देश भी देते हैं।

पर्वों की दृष्टि से महत्वपूर्ण है कार्तिक मास -

कार्तिक मास जहाँ धार्मिक दृष्टि से सर्वाधिक महत्व रखता है तो वहीँ पर्व और त्योहारों की दृष्टि से भी कार्तिक मास का बड़ा विशेष महत्व है हिंदी पंचांग में वर्ष के बारह माहों में पड़ने वाले पर्व और त्योहारों में बड़े और महत्वपूर्ण त्यौहार कार्तिक मास में ही आते हैं - .............. कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को कर्क चतुर्थी (करवा चौथ) का पर्व तो अष्टमी को अहोई अष्टमी का त्यौहार मनाया जाता है भारतीय सनातन संस्कृति में स्त्रियों के लिए ये दो पर्व उनके जीवन में सर्वाधिक महत्व रखते हैं। कार्तिक कृष्ण एकादशी को लक्ष्मी- नारायण के निमित्त रमा एकादशी का व्रत किया जाता है। कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रियोदशी को धन्त्रियोदशी, चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी (छोटी दीपावली) और कार्तिक अमावश्या को माँ लक्ष्मी का प्राकट्योत्सव दीपावली के रूप में मनाया जाता है। कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को गौवर्धन अन्नकूट पूजा तथा द्वित्या को भैया दूज का पवित्र त्यौहार होता है सूर्य भगवान् का सूर्य षष्टी पूजन भी कार्तिक मास की शुक्ल षष्टी को ही किया जाता है तो वहीँ कार्तिक मास में कार्तिक शुक्ल एकादशी को इस मास का सर्वाधिक महत्वपूर्ण दिन माना गया है जिसे हम देव उठान एकादशी भी कहते हैं इसी दिन चातुर्मास की समाप्ति होकर देव जागृति होती है और कार्तिक मास की समाप्ति पर कार्तिक पूर्णिमा का भी बड़ा विशेष महत्व है जिसे तीर्थ स्नान और दीपदान की दृष्टि से वर्ष का सबसे श्रेष्ठ समय माना गया है इसे देव-दीपावली भी कहते हैं। ......... तो हमने देखा की कार्तिक मास बारह महीनो में सर्वाधिक महत्व रखने वाला समय होता है जो ड्रम और आघ्यात्म की दृष्टि से तो महत्वपूर्ण है ही परंतु हमारी सांस्कृतिक परम्पराओं और पर्वों का भी यह सर्वाधिक महत्व रखने वाला माह है।

।। श्री हनुमते नमः ।।

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