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बच्चे की कुंडली में हैं ये ग्रहयोग तो स्पोर्ट्स में मिलेगी सफलता

कुछ समय पहले तक माता-पिता अपने बच्चों का स्पोर्ट्स में जाना अच्छा नहीं समझते थे या स्पोर्ट्स को एक अच्छे करियर पक्ष की तरह नहीं देखा जाता था परन्तु आज के समय में स्पोर्ट्स को लेकर सभी का दृष्टिकोण बदल गया है वर्तमान में खेलों में करियर बनाना एक सुनहरा अवसर माना जाने लगा है और अभिभावक भी अपने बच्चों को इसमें पूरा सहयोग करते हैं अब ज्योतिषीय दृष्टिकोण से देखें तो यदि व्यक्ति में किसी विशेष प्रतिभा का उदय होता है तो इसमें उसकी जन्मकुंडली में बने ग्रह योगों की ही भूमिका होती है तो आईये जाने कौनसे ग्रह-योग जातक को खेलों में सफलता दिलाकर एक अच्छा खिलाडी बनाते हैं –

" विशेष रूप से तो "मंगल" को ही खेलों या स्पोर्ट्स का कारक मना गया है क्योंको खेलों में सफलता के लिए व्यक्ति का शारीरिक गठन, मांसपेशियां, फिटनेस और कार्य और पुरुषार्थ-क्षमता बहुत अच्छी होनी चाहिए इसके आलावा हिम्मत, शक्ति, पराक्रम, निर्भयता और प्रतिस्पर्धा का सामना करना एक अच्छे खिलाडी के गुण होते हैं और इन सभी का नियंत्रक ग्रह मंगल होता है इसलिए स्पोर्ट्स में जाने के लिए हमारी कुंडली में मंगल का अच्छी स्थिति में होना बहुत आवश्यक है। कुंडली का "तीसरा भाव" भी शारीरिक मेहनत, भागदौड़, प्रक्रम और निडरता का कारक होने से खिलाडियों की कुंडली में तीसरे भाव का भी बहुत महत्त्व होता है। खेलो में प्रतिस्पर्धा का सामना करके ही खिलाडी आगे बढ़ते हैं इसलिए कुंडली का "छटा" भाव ( कॉम्पटीशन कारक) भी यहाँ अपनी विशेष भूमिका निभाता है "

स्पोर्ट्स में सफलता के कुछ विशेष योग -

1. यदि मंगल बलि होकर कुंडली के दशम भाव में बैठा हो या दशम भाव पर मंगल की दृष्टि हो तो स्पोर्ट्स में सफलता मिलती है।

2. यदि मंगल स्व या उच्च राशि (मेष, वृश्चिक, मकर) में होकर केंद्र(1,4,7,10) त्रिकोण(1,5,9) आदि शुभ भाव में बैठा हो तो तो स्पोर्ट्स में अच्छी सफलता दिलाता है।

3. यदि मंगल , शनि से पांचवे या नौवें भाव में बलि होकर बैठा हो तो भी स्पोर्ट्स में सफलता मिलती है।

4. तीसरे भाव के स्वामी का तीसरे भाव में ही बैठना या तीसरे भाव को देखना भी स्पोर्ट्स में जाने के लिए सहायक होता है।

5. षष्टेश का छटे भाव में बैठना या छटे भाव को देखना भी एक खिलाडी के लिए सहायक होता है।

6. कुंडली के तीसरे भाव में क्रूर ग्रहों ( राहु, केतु, शनि, मंगल, सूर्य) का होना एक खिलाडी का प्रक्रम बढ़ा कर उसे प्रतिस्पर्धा में आगे रखता है।

7. यदि तृतीयेश दसवें भाव में हो और मंगल ठीक स्थिति में हो तो भी खेलों में सफलता मिलती है।

8. पंचमहापुरुष योगों में से "रूचक-योग" का कुंडली में बनना स्पोर्ट्स में सफलता दिलाता है।

विशेष - तो यहाँ हमने देखा के खेलों में सफलता या अच्छा करियर बनाने में मुख्य रूप से मंगल की भूमिका तथा तीसरे और छटे भाव की सहायक भूमिका है परन्तु इसके अतिरिक्त किसी भी खेल से जुड़े खिलाडी की कुंडली में "बुध" जितना मजबूत और अच्छी स्थिति में होगा वह खिलाडी उतना ही जल्दी और अच्छे निर्णय ले पाएगा जिससे प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ने में सहायता होगी अतः एक खिलाडी की कुंडली में बुध का मजबूत होना उसकी क्षमताओं को कई गुना बढ़ा देता है

1. भारतीय क्रिकेट में अपना सुनहरा नाम लिखने वाले सचिन तेंदुलकर की कुंडली में "मंगल" अपनी उच्च राशि मकर में बैठा है जो खेलों में सफलता दिलाने का बहुत अच्छा योग है।

2. दुनिया भर में भारत का नाम रोशन करने वाले हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की कुंडली में मंगल छटे भाव में स्व राशि में बैठा है।

3. महेंद्र सिंह धोनी की कुंडली में मंगल भाग्य स्थान में है तथा तृतीयेश होकर तीसरे भाव को देख रहा है जिससे उनके प्रक्रम और खेलने की प्रतिभा बहुत अच्छी है साथ ही बुध उनकी कुंडली में स्व राशि मिथुन में सूर्य के साथ होने से उनकी किरणे लेने की क्षमता बहुत अच्छी है जिसने उन्हें बहुत बड़ी सफलताएं दिलाईं हैं।

4. भारतीय टेनिस प्लेयर सानिया मिर्जा की कुंडली में मंगल चौथे भाव में अपनी उच्च राशि मकर में बैठा है तथा लग्न में बुध बलि होकर बैठा है जो एक अच्छा खिलाडी बनने के योग हैं।

5. भारतीय क्रिकेट के चमकते सितारे विराट कोहली की कुंडली में मंगल चौथे भाव में मित्र राशि में बैठकर दशम भाव को देख रहा है जो स्पोर्ट्स में अच्छी सफलता को दर्शाता है साथ ही उनकी कुंडली में तीसरे भाव में राहु के बैठने से उनमे पराक्रम और अपने प्रतिद्वन्धियों को पछाड़ने की बहुत अच्छी क्षमता भरी हुई है।

।। श्री हनुमते नमः।।

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