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जानिए कैसी रहेगी आपके लिए राहु की महादशा

ज्योतिषीय दृष्टिकोण से हमारी जन्मकुंडली में बनी ग्रहस्थिति ही हमारी सफलता संघर्ष या जीवन में उतार चढ़ाव को निश्चित करती है, किसी भी व्यक्ति की कुंडली के ग्रहयोग उसके जीवन के स्तर को तो दर्शाते ही हैं पर इसमें भी जो एक बड़ी महत्वपूर्ण बात है वह है समय समय पर कुंडली में चलने वाली ग्रहों की दशाएं (महादशा, अंतर्दशा, प्रत्यन्तर्दशा) जो जीवन में मिलने वाली सफलता और संघर्ष के समयकाल को निश्चित करती हैं, वैसे तो ज्योतिष में प्रत्येक ग्रह का अपना अगल महत्व है परंतु राहु को लेकर सभी व्यक्तियों के मन में जो जिज्ञासा या भय की स्थिति रहती है वह राहु को ज्योतिष का सबसे चर्चित विषय भी बनाती है……राहु को ज्योतिष में पाप ग्रह की संज्ञा दी गयी है शनि शुक्र और बुध से राहु मित्रता है तथा सूर्य चन्द्रमाँ मंगल और बृहस्पति से राहु का शत्रु भाव है राहु का किसी राशि पर अधिपत्य तो नहीं है पर कन्या राशि में राहु स्वराशि जैसा फल करता है राहु मिथुन राशि में उच्च तथा धनु में नीचस्थ होता है।

ज्योतिष में राहु के कारकत्व को देखें तो राहु को काल सर्प का मुख, आकस्मिकता, षड्यंत्र, छिपे शत्रु, छल कपट झूट , तामसिकता, मतिभ्रम, बुरी आदतें, कुसंगति और आकस्मिक घटनाओं का कारक माना गया है
अब हम विशेष रूप से विषय पर आते हैं, अपनी जन्मकुंडली में चल रही राहु की किसी दशा (महादशा, अंतर्दशा, प्रत्यन्तर्दशा) को लेकर प्रत्येक व्यक्ति के मन में एक भय व्याप्त रहता है और काफी हद तक यह सही भी है परंतु राहु की दशा सभी व्यक्तियों के लिए एक जैसा ही फल करे ऐसा आवश्यक नहीं है कुछ लोगों को राहु की दशा में बहुत संघर्ष और बाधाओं का सामना करना पड़ता है तो कुछ लोग राहु की दशा में अप्रत्याशित उन्नति भी करते है…………. वास्तव में राहु की दशा आपको कैसा फल देगी यह इस बात करता है के राहु आपकी कुंडली में है किस स्थिति में राहु की अपनी कोई राशि नहीं होती और राहु को एक छाया ग्रह माना गया है इसलिए कुंडली में राहु जैसे ग्रहों और भाव के प्रभाव में होता है वैसा ही फल करता है छाया ग्रह होने के कारण राहु जिस ग्रह होता है या जिस ग्रह के प्रभाव में होता है उसी के गुण-दोष ग्रहण कर लेता है और वैसा ही फल करता है………….

सामान्यतः कुंडली में राहु की शुभ स्थितियों को देखें तो कुंडली के लाभ स्थान अर्थात ग्यारहवे भाव में राहु की स्थिति को श्रेष्ठ माना गया है इसके अलावा कुंडली के तीसरे छटे दसवे लग्न पंचम और नवम भाव का राहु भी सामान्यतः शुभ फल करता है इसके अलावा राहु यदि कुंडली के शुभकारक ग्रह लग्नेश पंचमेश और भाग्येश के प्रभाव में हो तो भी राहु इनके गुण लेकर अच्छा करता है अतः यदि कुंडली में राहु इन पुरोक्त स्थितियों में हो अपनी दशा में अच्छा फल करेगा और उन्नति कराएगा विशेष रूप से यदि एकादश भाव में हो तो ऐसे में राहु की दशा व्यक्ति को आकस्मिक लाभ और अप्रत्याशित उन्नति भी कराती है………….

अब यदि राहु की अशुभ स्थितियों को देखें कुंडली के चौथे आठवे और बारहवे भाव में स्थित राहु संघर्ष और बाधाएँ बढ़ाने वाला होता है इसमें भी विशेष रूप से कुंडली के आठवे भाव में स्थित राहु सर्वाधिक समस्याकारक माना गया है इसके अलावा यदि राहु अपनी नीच राशि धनु में हो या कुंडली के अकारक ग्रहों षष्टेष, अष्टमेश या द्वादशेश के प्रभाव में हो तो भी राहु संघर्ष बढ़ाने का कार्य करता है तो यदि कुंडली में राहु इन उपरोक्त स्थितियों में हो तो ऐसे में राहु की दशा व्यक्ति के जीवन में बहुत संघर्ष बढ़ाने वाली होती है और कुंडली में अशुभ स्थिति में स्थित राहु की दशा व्यक्ति की मति भ्रमित कर उसे गलत निर्णयों की और ले जाती है व्यक्ति कुसंगति की और जाने लगता है ऐसे में व्यक्ति मानसिक चलायमानता और अवसाद जैसी समस्याएं भी होती है और व्यक्ति कर्म को एकाग्रता से नहीं कर पाता अशुभ स्थितियों में स्थित राहु की दशा में व्यक्ति को दूसरों की सही बात भी गलत लगने लगती है और स्वभाव भी इरिटेटिड रहता है विवाद बढ़ते हैं और शत्रु बाधा भी होती है विशेष रूप से बारहवे भाव में स्थित राहु की दशा व्यय बढाती है तो आठवे राहु की दशा में शारीरिक और मानसिक समस्याएं बढ़ती हैं।

तो यहाँ हमने देखा के किन स्थितियों में राहु की दशाएं अच्छा फल करती हैं और किन स्थितियों में संघर्ष बढ़ाती हैं इसलिए केवल राहु की दशा सभी को एक सामान फल दे ऐसा आवश्यक नहीं है उपरोक्त गणनाओं के अनुसार कुछ स्थितियों में राहु की दशा संघर्ष उत्पन्न करती है तो कुछ स्थितयों में व्यक्ति को अप्रत्याशित उन्नति भी करा देती है इसलिए किसी भी व्यक्ति की कुंडली के गहन अध्यन और उसमे राहु की स्थिति को देखकर ही राहु की दशा का फल निश्चित किया जाता है।

यदि राहु की किसी भी दशा (महादशा, अंतर्दशा, प्रत्यन्तर्दशा) में संघर्ष या बाधाएँ बढ़ रही हों तो ये उपाय लाभकारी होंगे -

1. ॐ राम राहवे नमः का नियमित जाप करें।

2. प्रत्येक शनिवार को साबुत उडद का दान करें।

3. प्रतिदिन पक्षियों को भोजन दें।

4. सफ़ेद चन्दन का तिलक लगाएं।

5. सफ़ेद चन्दन से बनी माला गले में धारण करें।

6. तामसिक पदार्थों का त्याग करें।

7. किसी योग्य ज्योतिषी की सलाह के बिना गोमेद बिलकुल न पहने।

।।श्री हनुमते नमः।।

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