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शुक्र और बारहवें भाव का शुभ संयोग

ज्योतिष में जन्मकुंडली के बारहवे भाव को तीन पाप या दुःख भावों(6,8,12) में से एक मन गया है कुंडली के द्वादश अर्थात बारहवे भाव को व्यय, हानि, खर्चे, विच्छेदन आदि का कारक होने से दुःख भाव की संज्ञा दी गयी है और कोई भी ग्रह बारहवे भाव में होने पर कमजोर या पीड़ित हो जाता है जिससे उस ग्रह से सम्बंधित पदार्थ और वस्तुओं को लेकर जीवन में संघर्ष बना रहता है इस लिए द्वादश भाव में किसी ग्रह का होना शुभ नहीं माना गया है, परंतु शुक्र और कुंडली के बारहवे भाव को लेकर एक बड़ी विशेष बात है शुक्र और बारहवे भाव का सम्बन्ध बड़ा ही शुभ माना गया है, जहाँ किसी भी ग्रह का कुंडली के बारहवे भाव में होना अच्छा नहीं माना गया है वहीँ शुक्र का बारहवे भाव में बैठना बहुत शुभ और अच्छा फल देने वाला माना गया है। .........

ज्योतिष में शुक्र को धन, घर, संपत्ति, वाहन, समृद्धि, विलासिता, वैभव,ऐश्वर्य और भोग का कारक माना गया है अर्थात हमारे जीवन में सभी भौतिक सुख सुविधाओं का भोग शुक्र द्वारा ही नियंत्रित होता है और कुंडली के बारहवे भाव को दुःख भाव होने के साथ साथ भोग का भी कारक माना गया है अतः जब भोग का नैसर्गिक कारक शुक्र भोग के भाव (बारहवा) में बैठता है तो बहुत प्रबल स्थिति में होता है यह शुक्र की सबसे अच्छी स्थिति मानी गयी है क्योंकि बारहवे भाव में बैठकर शुक्र बलि होता है इसलिए ऐसी स्थिति में व्यक्ति को अति महत्वकांशी बनाता है और धन, संपत्ति, ऐश्वर्य और वैभव प्रदान करता है इसी लिए ज्योतिष ग्रंथों में शुक्र का बारहवे भाव में होना राजयोग कारक मन गया है, ज्योतिषीय गूढ़ नियमों के अनुसार कुंडली के बारहवे भाव में स्थित ग्रह व्यक्ति के भाग्योदय में बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है अतः जिन लोगो की कुंडली में शुक्र बारहवे भाव में होता है उनका विशेष भाग्योदय विवाह उपरांत ही होता है विवाह के बाद ऐसे व्यक्ति को विशेष उन्नति और सफलता मिलती है, अतः कुंडली के बारहवे भाव और शुक्र के मध्य यह विशेष सम्बन्ध है जो बहुत शुभ फल प्रदान करता है।

विशेष -

तो हमने यहाँ जाना के शुक्र का कुंडली के बारहवे भाव में होना कितना शुभ फलकारक होता है परंतु यहाँ इस बात को समझना बहुत आवश्यक है के कुंडली में बना हुआ कोई भी शुभ योग हमें किस स्तर के परिणाम देगा इसके लिए यह विश्लेषण करना भी बहुत आवश्यक होता है के कुंडली में बना शुभ योग कहीं किसी प्रकार बाधित तो नहीं हो रहा या अन्य ग्रहों से पीड़ित तो नहीं हो रहा तभी उसका पूरा निष्कर्ष निकल पाता है, शुक्र का कुंडली के बारहवे भाव में होना निश्चित ही शुभ और समृद्धि दायक होता है परंतु कुछ विशेष स्थितियों में बारहवे भाव का शुक्र पूरे शुभ परिणाम नहीं दे पाता –

1. बारहवे भाव में यदि शुक्र शनि की राशि (मकर, कुम्भ) में हो तो अधिक विशेष परिणाम नहीं देता क्योंकि शनि को कर्म प्रधान और आध्यात्मिक ग्रह माना गया है जो व्यक्ति को सांसारिक भोगों से हटकर कर्म और आध्यात्मिक मार्ग पर लेजाता है इसलिए बारहवे भाव का शुक्र शनि की राशि में संकुचित स्थिति में होता है और पूर्ण विकास नहीं दे पाता।

2. बारहवे भाव में शुक्र नीच राशि (कन्या) में होने पर भी पूरे शुभ परिणाम नहीं दे पाता।

3. यदि शुक्र पूर्णअस्त हो या केतु और मंगल के साथ हो तो भी विशेष परिणाम नहीं देता।

।।श्री हनुमते नमः।।

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