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क्रोधी स्वभाव बनाते हैं ये ग्रहयोग-सहायक होते हैं ये उपाय

किसी भी व्यक्ति का स्वभाव उसके व्यक्तित्व निर्धारण की सबसे पहली और सबसे प्रभावपूर्ण कड़ी होती है, स्वाभाव किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व निर्धारण में एक नींव की तरह कार्य करता है, आज हम यहाँ विशेष रूप से क्रोध और क्रोधित स्वभाव के विषय में चर्चा कर रहे हैं क्योंकि यह हम सभी के जीवन जुड़ा एक बड़ा ही महत्वपूर्ण विषय है और क्योंकि ज्योतिष जीवन के प्रत्येक पक्ष में हमारा मार्गदर्शन करता है तो आज हम क्रोध और ग्रहस्थिति के सम्बन्ध पर प्रकाश डालने का प्रयास करेंगे, सामान्यतः तो हम सभी को कभी न कभी क्रोध आता ही है परंतु जब क्रोध या गुस्सा किसी व्यक्ति का स्थिर स्वभाव बन जाये तो समस्या की बात होती है अपने आस पास हम ऐसे बहुत से लोगो को देखते है जो हमेशा क्रोध की स्थिति में ही रहते हैं और कुछ लोगो के क्रोध की तीव्रता इतनी अधिक होती है के उसके बड़े विध्वंसकारी परिणाम निकलते हैं तो आईये देखते हैं कौनसी ग्रहस्थितियां व्यक्ति के क्रोध को बढ़ाने का कार्य करती हैं। .....
“ज्योतिषीय दृष्टिकोण में हमारी कुंडली के "लग्न भाव" को हमारे स्वभाव का कारक माना गया है कुंडली का "द्वितीय भाव" भी हमारी वाणी और व्यव्हार को नियंत्रित करता है और "पंचम भाव" बुद्धि का स्थान होने से हमारे व्यव्हार को प्रभावित करता है अतः व्यक्ति के स्वभाव को निश्चित करने में कुंडली के इन तीन भावों का तो महत्व है ही परंतु क्रोध और क्रोधित स्वभाव के लिए विशेषकर "मंगल" को क्रोध का कारक माना गया है, बुध हमारी बुद्धि और मष्तिष्क की प्रक्रियाओं का कारक है, चन्द्रमाँ मन का कारक है, बृहस्पति विवेक का अतः मंगल के अलावा इन सभी ग्रहों की स्थिति क्रोध और क्रोध के स्तर को निश्चित करती है इसके अतिरिक्त एक और ग्रह है जो व्यक्ति के क्रोध को विध्वंसात्मक रूप देने का कार्य करता है वह है "राहु", राहु को एक विध्वंसकारी और नकारात्मक ऊर्जा का कारक माना गया है जो अपनी युति से मंगल को विकृत करके व्यक्ति के क्रोध को विध्वंसकारी बना देता है”

क्रोधित स्वभाव के विशेष ग्रहयोग -

1. यदि मंगल कुंडली के लग्न या पंचम भाव में हो तो व्यक्ति में क्रोध की अधिकता होती है।

2. कुंडली में मंगल और बुध का योग हो तो व्यक्ति बहुत क्रोधित स्वभाव का होता है।

3. सूर्य और मंगल का योग व्यक्ति को क्रोधित स्वभाव का बनाता है।

4. कुंडली के द्वितीय और पँचम भाव में यदि कोई पाप योग बना हो या कोई ग्रह नीच राशि में बैठा हो तो भी व्यक्ति अधिक क्रोध करने वाला होता है।

5. बृहस्पति और मंगल का योग भी व्यक्ति को तीव्र क्रोध देता है।

6. लग्नेश और पंचमेश के साथ मंगल का योग भी क्रोध को बढ़ाता है।

7. यदि कुंडली में गुरुचांडाल योग (गुरु + राहु) हो तो व्यक्ति क्रोध और अभद्र व्यव्हार करने वाला होता है।

8. राहु और चन्द्रमाँ का योग भी व्यक्ति को क्रोधित और चिड़चिड़े स्वभाव का बनाता है।

9. मंगल और राहु का योग व्यक्ति को अनियंत्रित और विध्वंसकारी क्रोध देता है।

10. द्वितीय भाव में राहु होना या बुध और राहु के योग में भी राहु वाणी को प्रभावित करके क्रोध को बढ़ाता है।

तो उपरोक्त कुछ विशेष ग्रहयोगो में व्यक्ति का क्रोध तीव्र होता है पर यहाँ यह समझना बहुत आवश्यक है के क्रोध के भी कई रूप या अवस्थायें होती हैं जैसे कुछ परिस्थितियों में किसी गलत बात का विरोध करने या किसी व्यक्ति की गलती पर उसे समझाने के लिए क्रोध करना आवश्यक होता है यह क्रोध की सकारात्मक अवस्था है, क्रोध का एक रूप अहमवश भी होता है तो वहीँ बहुत से लोग अपने क्रोध को प्रकट नहीं कर पाते और मन के अंदर अपने क्रोध को गुप्त रखते है और कुछ लोगो का क्रोध विध्वंसात्मक होता है जिसमे व्यक्ति बड़े गलत कदम भी उठा बैठता है यह क्रोध का नकारात्मक रूप होता है। ........

सकारात्मक क्रोध - कुंडली में जब मंगल और बृहस्पति का योग हो तो ऐसे में व्यक्ति का क्रोध सकारात्मक रूप में होता है आवश्यकता होने पर ही व्यक्ति क्रोध करता है।

अहमवश क्रोध - सूर्य और मंगल का योग व्यक्ति को अहमवश क्रोध देता है।

गुप्त क्रोध - राहु और बुध का अष्टम भाव में होना या बुध का कमजोर व पीड़ित होने पर व्यक्ति अपने क्रोध को मन में दबाकर रखता है आसानी से क्रोध का प्रदर्शन नहीं कर पाता।

नकारात्मक क्रोध - राहु और मंगल का योग व्यक्ति के क्रोध को विकृत करके विध्वंसात्मक रूप देता है अतः ऐसा व्यक्ति अपने क्रोध पर बिलकुल नियंत्रण नहीं रख पाता और बहुत बार बड़े गलत निर्णय करके विध्वंस हिंसात्मक स्थिति उत्पन्न कर देता है यह क्रोध का नकारात्मक रूप है। ......

तो यहाँ विशेष बात यह है के क्रोध का कारक मंगल को माना गया है परंतु व्यक्ति के क्रोध को विकृत करने या विध्वंसात्मक रूप देने या क्रोध को नकारात्मक रूप देने का कार्य "राहु" ही करता है अतः क्रोध की प्रचंडता में मंगल के अतिरिक्त मुख्य रूप से राहु की ही भूमिका है।

क्रोध नियंत्रण के ज्योतिषीय उपाय -

अधिक क्रोध या गुस्सा करना हमारे स्वास्थ पर तो बुरा असर डालता ही है पर एक विशेष बात यह भी है के क्रोध की अवस्था में व्यक्ति हमेशा गलत ही निर्णय करता है जिसके कारण बाद में पछताना पड़ता है क्रोध का परिस्थितिवश सकारात्मक रूप में होना गलत नहीं है परंतु क्रोध का स्थिर स्वभाव में होना या नकारात्मक रूप में होना व्यक्ति के जीवन में बड़ी बाधायें उत्पन्न करता है अतः यहाँ हम क्रोध पर नियंत्रण के लिए कुछ विशेष उपाय बता रहे है –

1. घर के पूजास्थल में चंद्र यन्त्र स्थापित करके "ॐ श्राम श्रीम श्रौम सः चन्द्रमसे नमः" का एक माला रोज जाप करें।

2. मंगलवार को हनुमान जी अनार का फल चढ़ायें।

3. मंगलवार को गुड़ या साबुत लाल मसूर का दान करें।

4. शनिवार को साबुत उडद का दान करें।

5. मस्तक पर सफ़ेद चन्दन का तिलक लगायें।

6. किसी योग्य ज्योतिषी से परामर्श के बाद यदि मोती आपके लिए शुभ है तो मोती भी धारण कर सकते हैं।

।।श्री हनुमते नमः।।

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