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ऐसे प्रभावित होंगी बारह राशियाँ

बृहस्पति को ज्योतिषीय गणनाओं और विशेष रूप से फलित ज्योतिष में सबसे महत्वपूर्ण ग्रह माना गया है जो हमारे जीवन, सामाजिक उतार चढाव और भौगोलिक स्थिति को नियंत्रित करने में अपनी अहम भूमिका निभाता है, बृहस्पति की हमारी जन्मकुंडली में तो अहम भूमिका होती ही है पर अपनी वर्तमान गोचरीय स्थिति का गहरा प्रभाव भी बृहस्पति हमारे जीवन पर डालता है बृहस्पति की दृष्टि को ज्योतिष में अमृत कहा गया है और कुंडली के अलावा अपनी गोचरीय स्थिति के द्वारा भी बृहस्पति जब हमारी कुंडली के जिस ग्रह या योग को अपनी शुभ दृष्टि से प्रभावित करता है तो उस समय में व्यक्ति की कुंडली में बने वे योग क्रियान्वित होकर उस समय में अपना फल देते हैं, बृहस्पति एक राशि में बारह माह अर्थात एक वर्ष रहता है और फिर राशिपरिवर्तन कर अगली राशि में प्रवेश करता है इस प्रकार संपूर्ण राशिचक्र को बृहस्पति लगभग बारह वर्ष में पूरा करता है…..

अगस्त 2016 अर्थात पिछले एक वर्ष से बृहस्पति कन्या राशि में गोचर कर रहा था पर अब बृहस्पति का तुला राशि में प्रवेश होने जा रहा है............ 12 सितम्बर 2017 को प्रातः 6 बजकर 32 मिंट पर बृहस्पति का तुला राशि में प्रवेश होगा तथा अगले एक वर्ष के लिए बृहस्पति तुला राशि में ही संचार करेगा जिससे सभी परिस्थितियों और बारह राशियों पर भिन्न भिन्न प्रभाव पड़ेगा…………. बृहस्पति का अगले एक वर्ष के लिए तुला राशि में गोचर वैसे तो सभी बारह राशियों को भिन्न भिन्न प्रकार से प्रभावित करेगा पर बृहस्पति का तुला राशि में आना विशेष रूप से मेष, मिथुन, कन्या, धनु और कुम्भ के लिए शुभ है कर्क वृश्चिक और मीन राशि के लिए संघर्षकारी और बाकियों के लिए मध्यम है

सर्वप्रथम यदि भारत की कुंडली पर तुला के बृहस्पति का प्रभाव देखें तो यह एक अच्छा परिणाम देने वाला योग होगा क्योंकि 15 अगस्त के हिसाब से बनी भारत की वृष लग्न की कुंडली में तत्कालिक बृहस्पति तुला राशि में ही स्थित है और अब वर्तमान में भी बृहस्पति तुला राशि में प्रवेश कर रहा है जिससे भारत की कुंडली में तुला राशि में स्थित बृहस्पति पर गोचर के बृहस्पति का संचार होगा जो की एक बहुत शुभ परिणाम देने वाला योग होता है तो बृहस्पति का तुला राशि में आना भारत-वर्ष के लिए बहुत शुभ और उन्नति देने वाला होगा, इसके अलावा गोचर के बृहस्पति की शुभ दृष्टि भरता की कुंडली के दूसरे भाव (धन भाव) दसवे भाव (आजीविका भाव) और बारहवे भाव (विदेश का भाव) पर पड़ेगी जिससे तुला राशि में बृहस्पति के गोचर से भारत में आजीविका अर्थात रोजगारों में वृद्धि होगी विदेशों में भारत का अच्छा प्रभाव बनेगा और बृहस्पति का तुला राशि में गोचर भारत में आर्थिक उन्नति भी कराएगा।

बारह राशियों पर तुला के बृहस्पति का प्रभाव -

मेष राशि - शुभ है, आत्मविश्वाश और प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी, आय के श्रोत बढ़ेंगे, विवाह योग्य जातकों के विवाह का योग बनेगा।

वृष राशि - मध्यम है, करियर में सकारात्मक परिवर्तन होंगे पर स्वास्थ के प्रति सचेत रहें उतार चढ़ाव संभव है।

मिथुन राशि - शुभ है, चल रहे पारिवारिक विवाद रुकेंगे, आत्मविश्वाश और प्रतिष्ठा बढ़ेगी मन में शांति आएगी, भाग्य वृद्धि होगी किये गए प्रयासों में सफलता मिलेगी, आय के श्रोत बढ़ेंगे।

कर्क राशि - संघर्षकारी है विशेष रूप से गृहक्लेश और पारिवारिक विवाद बढ़ेंगे अतः आर्ग्युमेंट्स से बचें और व्यर्थ विवादों में ना पड़ें, करियर के लिए सकारात्मक परिवर्तन होंगे।

सिंह राशि - मध्यम है, कार्यों की सफलता के लिए अधिक प्रयास करने पड़ेंगे पर कुछ बाधाओं के बाद कार्य सफल अवश्य होंगे, वैवाहिक जीवन में मधुरता बढ़ेगी।

कन्या राशि - शुभ है, आर्थिक उननति होगी, करियर के लिए अच्छा है करियर में उन्नति होगी।

तुला राशि - शुभ है, चल रहे अधिक धन खर्च में कमी आएगी, भाग्य वृद्धि होगी किये गए प्रयास सफल रहेंगे, वैवाहिक जीवन में मधुरता बढ़ेगी, विवाह योग्य जातकों के विवाह का योग बनेगा।

वृश्चिक राशि - संघर्ष कारक है, धन खर्च बढ़ेगा जिससे आर्थिक संघर्ष की स्थिति बनेगी अतः आर्थिक लेनदेन में सावधानी बरतें।

धनु राशि - शुभ है, आय के श्रोत और धन लाभ बढ़ेगा, उत्साह में वृद्धि होगी, व्यापार में अच्छे परिवर्तन और लाभ होगा।

मकर राशि - मध्यम है, आर्थिक उन्नति होगी, पारिवारिक शांति बढ़ेगी घर में नयी वस्तु लाने का योग बनेगा, विरोधियों से व्यर्थ विवादों में ना पड़ें।

कुम्भ राशि - बहुत शुभ है, चल रही स्वास्थ समस्यें रुकेंगी, आत्मविश्वास बढ़ेगा भाग्य वृद्धि होगी, कार्यों में सफलता मिलेगी, जीवन में उननति होगी।

मीन राशि - संघर्षकारक है, स्वास्थ कष्ट बढ़ेगा अतः स्वास्थ के प्रति सचेत रहें, व्यर्थ के विवादों से बचने का प्रयास करें।

अपनी राशि से बृहस्पति अनिष्ट होने पर ये उपाय करें -

1. ॐ बृम बृहस्पते नमः का प्रतिदिन एक माला जाप करें।

2. बृहस्पतिवार को चने की दाल दान करें।

3. बृहस्पतिवार को बेसन के लड़डू गाय को खिलाएं।

4. विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें।

।। श्री हनुमते नमः।।

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