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दीवाली पूजन के श्रेष्ठ मुहूर्त और सरल विधि

दीवाली या दीपावली का पर्व कार्तिक कृष्ण अमावस्या तिथि को मनाया जाता है इस बार 7 नवम्बर को दीपावली पर्व मनाया जायेगा… दीपावली माता लक्ष्मी का प्राकट्य दिवस होने से इस दिन माता लक्ष्मी का विशेष पूजन कर घर की सुख समृद्धि की कामना की जाती है, इस दिन श्री गणेश लक्ष्मी का संयुक्त रूप से पूजन किया जाता है श्री गणेश जी प्रथम पूज्य होने के साथ साथ बुद्धि के भी देवता हैं अतः जीवन में प्राप्त हुआ धन और समृद्धि व्यक्ति के मष्तिष्क पर हावी ना हो और व्यक्ति धन का सदुपयोग कर पाये ऐसी ही सतबुद्धि की प्राप्ति की कामना से गणेश लक्ष्मी का संयुक्त पूजन किया जाता है... दीवाली के दिन संध्याकाल से सम्पूर्ण रात्रि कल तक माँ लक्ष्मी पृथ्वी पर साक्षात् विचरण करती हैं तथा साफ स्वच्छ सुसज्जित और दीपों से प्रज्वलित स्थान पर प्रवेश करती हैं इसलिए इस घर विशेष रूप से मुख्य द्वार को सुसज्जित करके दीपों द्वारा प्रकाशित किया जाता है जिससे घर में माँ लक्ष्मी का आगमन हो दीपावली पर संध्या के समय घर के मुख्य द्वार को अवश्य खोलना चाहिए माँ लक्ष्मी के स्वागत और आगमन के लिए दीप प्रज्वलित करने चाहियें। दीवाली के दिन अपने व्यावसायिक स्थलों ( ऑफिस, दुकान, फेक्ट्री, फर्म आदि) पर लक्ष्मी पूजन दिन में ही कर लेना चाहिए और संध्या के समय अपने घर पर पूरे परिवार के साथ लक्ष्मी पूजन करना चाहिए।
दीपावली पर किये जाने वाले पूजन के लिए स्थिर लग्न का सर्वाधिक महत्व होता है शुभ और मंगल कार्यों के लिए विशेष रूप से स्थिर लग्न को सबसे अच्छा माना गया है अतः दीवाली पर स्थिर लग्न में किया गया लक्ष्मी पूजन जीवन में दीर्घकाल तक स्थिर समृद्धि प्रदान करता है l

इस बार दिवाली पूजन के श्रेष्ठ मुहूर्त -

इस बार 7 नवम्बर दीपावली पर दिन में दीपावली पूजन के लिए दोपहर 1:30 बजे से 3 बजे के बीच स्थिर लग्न (कुम्भ) उपस्थित रहेगी इसलिए अपने कार्यालय, ऑफिस, दुकान, शोरूम और व्यवसाय स्थलों में दीपावली पूजन के लिए दोपहर 1:30 से 3 बजे के बीच का समय श्रेष्ठ मुहूर्त होगा। घर पर दीपावली पूजन के लिए इस बार शाम 6 बजे से 7:50 के बीच स्थिर लग्न (वृष) में दीपावली पूजन का श्रेष्ठ मुहूर्त रहेगा इसलिए अपने घर पर शाम 6 से 7:50 के बीच दीपावली पूजन करें। जो लोग दीपावली पर विशेष साधना के लिए महानिशीथकाल में पूजा करते हैं उनके लिए रात्रि 12:23 से 2:41 के बीच "सिंह लग्न" में साधना का विशेष समय होगा।

व्यवसाय स्थलों पर दीपावली पूजन का मुहूर्त - दोपहर 1:30 से 3 बजे के बीच का समय श्रेष्ठ मुहूर्त होगा।

घर पर दीपावली पूजन का मुहूर्त - शाम 6 से 7:50 के बीच दीपावली पूजन का समय श्रेष्ठ मुहूर्त होगा

दिवाली पूजन की सरल विधि -

सर्व प्रथम घर के पूजा स्थल को अच्छे से साफ और स्वच्छ करें फिर एक लकड़ी की चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं और वस्त्र पर अक्षत अर्थात साबुत चावलों की एक परत बिछा दें और इस पर लक्ष्मी गणेश की प्रतिमा को विराजमान करें यदि घर में लक्ष्मी गणेश का चाँदी का सिक्का और श्री यन्त्र भी हो तो उन्हें भी इसी आसान पर स्थापित करें पूजन के लिए फूल मिठाई खील बताशे आदि रखें। ...... लक्ष्मी गणेश के पूजन के लिए घी का एक दीपक बनाये अन्य दीयों के किये सरसों के तेल का प्रयोग कर सकते हैं। ........... अब सर्वप्रथम घी का दिया प्रज्वलित करें और इस मन्त्र से भगवन गणेश का ध्यान और आवाहन करें -

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभा निर्विघ्नं कुरु में देव सर्वकार्येषु सर्वदा।।

इसके बाद इस मंत्र से माता लक्ष्मी का आवाहन करें -

सर्वलोकस्य जननीं सर्वसौख्यप्रदायिनीम |
सर्वदेवमयीमीशां देवीमावाहयाम्यहम् ॥

इसके बाद लक्ष्मी गणेश का रोली से तिलक कर उन्हें पुष्प आदि समर्पित करें और फिर खील बताशे पुष्प, अक्षत और दक्षिणा हाथ में रखकर मन में संकल्प करें के हम दीवाली के इस पावन पर्व पर जीवन की समृद्धि की कामना करते हुए श्री लक्ष्मी गणेश का पूजन कर रहे हैं हमारे पूजन को माँ लक्ष्मी और गणेश जी स्वीकार करें और हमारे पूरे परिवार पर कृपा करें। ....... मन में ऐसा संकल्प करने के बाद हाथ में रखे खील बतेशे लक्ष्मी गणेश को समर्पित कर दें और फिर श्रध्दा से "श्री सूक्त" का पाठ करें और फिर लक्ष्मी माता की आरती गाएं फिर मिठाई और खील बताशे का भोग लक्ष्मी गणेश सहित सभी देवी देवताओं को समर्पित करें और प्रार्थना करें के लक्ष्मी गणेश सदैव हमारे घर में विराजमान रहें और हम पर कृपा बनाये रखें। ....... इसके बाद जले हुए घी के दिए से बाकि अन्य सभी दीयों को प्रज्वलित करना चाहिए और घर के पूजास्थल सहित पूरे घर के सभी स्थानों पर दिए जलाने चाहियें विशेष रूप से घर के मुख्य द्वार, घर के ईशान कोण और तुलसी के समक्ष दिए अवश्य रखने चाहियें इसके बाद मिठाई और खील बताशों का प्रसाद सभी को ग्रहण करना चाहिए और बड़ों के चरणस्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए।

।। श्री हनुमते नमः।।

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