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देव गुरु बृहस्पति आ रहे हैं वृश्चिक में

बृहस्पति की हमारी जन्मकुंडली में तो अहम भूमिका होती ही है पर अपनी वर्तमान गोचरीय स्थिति का गहरा प्रभाव भी बृहस्पति हमारे जीवन पर डालता है बृहस्पति की दृष्टि को ज्योतिष में अमृत कहा गया है और कुंडली के अलावा अपनी गोचरीय स्थिति के द्वारा भी बृहस्पति जब हमारी कुंडली के जिस ग्रह या योग को अपनी शुभ दृष्टि से प्रभावित करता है तो उस समय में व्यक्ति की कुंडली में बने वे योग क्रियान्वित होकर उस समय में अपना फल देते हैं बृहस्पति का एक राशि में संचार काल बारह माह अर्थात एक वर्ष होता है इसकी बाद बृहसपति का अगली राशि में प्रवेश हो जाता है

सितम्बर 2017 अर्थात पिछले एक वर्ष से बृहस्पति का गोचरीय संचार तुला राशि में चल रहा था पर अब 11 अक्टूबर 2018 को बृहस्पति का प्रवेश वृश्चिक राशि में हो रहा है। 11 अक्टूबर की शाम 7 बजकर 5 मिंट पर बृहस्पति का वृश्चिक राशि में प्रवेश हो जायेगा और अगले एक वर्ष के लिए बृहस्पति का संचार वृश्चिक राशि में ही रहेगा जिसका प्रभाव सभी परिस्थितियों और बारह राशियों पर अलग अलग तरह से होगा.... समान्य रूप से बृहस्पति का वृश्चिक राशि में प्रवेश वृष, कर्क, तुला, वृश्चिक, मकर और मीन राशि के लिए शुभ है मिथुन, कन्या और कुम्भ राशि के लिए मध्यम है तथा मेष, सिंह और धनु राशि के लिए ये संघर्ष बढ़ाने वाला है।

बृहस्पति के वृश्चिक राशि में प्रवेश का सबसे पहले अगर भारत वर्ष पर प्रभाव देखें तो स्वतंत्र के समय बनी भारत की वृष लग्न की कुंडली के हिसाब से बृहस्पति का वृश्चिक राशि में आना भारत के लिए बहुत शुभ है क्योंकि भारत राष्ट्र की कुंडली में तीसरे भाव में कर्क राशि में शनि शुक्र बुध चन्द्रमाँ और सूर्य की युति राजयोग बना रही है और बृहस्पति के वृश्चिक में आने पर बृहस्पति की शुभ दृष्टि से ये योग प्रबल हो जायेगा जिससे भारत की कीर्ति यश प्रसिद्धि और प्रतिष्ठा और बढ़ेगी, इसके अलावा भारत की कुंडली में यश और इच्छा शक्ति कारक सूर्य, आजीविका कारक शनि, निति कारक बुध, आपसी और बाहरी सम्बन्ध कारक चन्द्रमाँ व धन समृद्धि करक शुक्र पर भी बृहस्पति की शुभ दृष्टि होगी अतः बृहस्पति के वृश्चिक राशि में रहते अगले एक वर्ष में भारत में राष्ट्रिय व राजनैतिक इच्छा शक्ति बढ़ेगी पराक्रम बढ़ेगा , रोजगारों में वृद्धि होगी, बाहरी देशों से और अच्छे सम्बन्ध बनेंगे और राष्ट्र में आर्थिक उन्नति भी होगी।

वृश्चिक के बृहस्पति का बारह राशियों पर प्रभाव -

मेष राशि - संघर्षकारक है, स्वास्थ कष्ट बढ़ेगा अतः स्वास्थ के प्रति सचेत रहें, व्यर्थ के विवादों से बचने का प्रयास करें।

वृष राशि - शुभ है, आत्मविश्वाश और प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी, आय के श्रोत बढ़ेंगे, विवाह योग्य जातकों के विवाह का योग बनेगा।

मिथुन राशि - मध्यम है, करियर में सकारात्मक परिवर्तन होंगे पर स्वास्थ के प्रति सचेत रहें उतार चढ़ाव संभव है।

कर्क राशि - शुभ है, चल रहे पारिवारिक विवाद रुकेंगे, आत्मविश्वाश और प्रतिष्ठा बढ़ेगी मन में शांति आएगी, भाग्य
वृद्धि होगी किये गए प्रयासों में सफलता मिलेगी, आय के श्रोत बढ़ेंगे।

सिंह राशि - संघर्षकारी है विशेष रूप से गृहक्लेश और पारिवारिक विवाद बढ़ेंगे अतः आर्ग्युमेंट्स से बचें और व्यर्थ विवादों में ना पड़ें, करियर के लिए सकारात्मक परिवर्तन होंगे।

कन्या राशि - मध्यम है, कार्यों की सफलता के लिए अधिक प्रयास करने पड़ेंगे पर कुछ बाधाओं के बाद कार्य सफल अवश्य होंगे, वैवाहिक जीवन में मधुरता बढ़ेगी।

तुला राशि - शुभ है, आर्थिक उननति होगी, करियर के लिए अच्छा है करियर में उन्नति होगी।

वृश्चिक राशि - शुभ है, चल रहे अधिक धन खर्च में कमी आएगी, भाग्य वृद्धि होगी किये गए प्रयास सफल रहेंगे, वैवाहिक जीवन में मधुरता बढ़ेगी, विवाह योग्य जातकों के विवाह का योग बनेगा।

धनु राशि - संघर्ष कारक है, धन खर्च बढ़ेगा जिससे आर्थिक संघर्ष की स्थिति बनेगी अतः आर्थिक लेनदेन में सावधानी बरतें।

मकर राशि - शुभ है, आय के श्रोत और धन लाभ बढ़ेगा, उत्साह में वृद्धि होगी, व्यापार में अच्छे परिवर्तन और लाभ होगा।

कुम्भ राशि - मध्यम है, आर्थिक उन्नति होगी, पारिवारिक शांति बढ़ेगी घर में नयी वस्तु लाने का योग बनेगा, विरोधियों से व्यर्थ विवादों में ना पड़ें।

मीन राशि - बहुत शुभ है, चल रही स्वास्थ समस्यें रुकेंगी, आत्मविश्वास बढ़ेगा भाग्य वृद्धि होगी, कार्यों में सफलता मिलेगी, जीवन में उननति होगी।

अपनी राशि से बृहस्पति अनिष्ट होने पर ये उपाय करें -

1. ॐ बृम बृहस्पते नमः का प्रतिदिन एक माला जाप करें।

2. बृहस्पतिवार को चने की दाल दान करें।

3. बृहस्पतिवार को बेसन के लड़डू गाय को खिलाएं।

4. विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें।

।। श्री हनुमते नमः।।

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