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आर्थिक संघर्ष बढ़ाता है बारहवाँ राहु

राहु कुण्डली में शुभ स्थिति में होने पर आकस्मिक लाभ देता है तो वहीँ कुण्डली में अशुभ स्थिति में होने पर जीवन में बड़ी बाधायें और संघर्ष भी उत्पन्न करता है आज हम विशेष रूप से राहु के कुंडली में बारहवे भाव में होने को लेकर चर्चा कर रहे हैं तो आईये देखते हैं राहु कुंडली के बारहवे भाव में कैसे परिणाम देता हैं

फलित ज्योतिष में कुंडली के द्वादश अर्थात बारहवे भाव को एक पाप या दुःख भाव माना गया है क्योंकि बारहवाँ भाव व्यय, हानि, खर्चा, नुकसान, अस्थिरता, धन क्षय और विच्छेदन का भाव माना गया है इसीलिए राहु का कुंडली के बारहवें भाव में होना बहुतसी समस्यायें और संघर्ष उत्पन्न करता है इसमें भी विशेष रूप से यदि कुंडली के बारहवें भाव में राहु शत्रु राशि में हो तो अधिक संघर्ष कारक होता है, बारहवें भाव में स्थित राहु हानि, नुकसान और अनियंत्रित खर्चे कराने वाला माना गया है जिन लोगो की कुंडली में बारहवे भाव में राहु हो तो ऐसे में व्यक्ति के जीवन में अनचाहे खर्चों की अधिकता होती है और धन स्थिर नहीं हो पाता व्यक्ति अच्छी अर्निंग या धन लाभ पाने पर भी धन को अपने पास नहीं रोक पाता अर्थत बारहवां राहु जीवन में स्थायी धन की कमी करता है तथा ऐसे व्यक्ति को जीवन में बहुत बार बड़ी धन हानि का भी सामना करना पड़ता है जिससे जीवन में आर्थिक स्थिति में स्थिरता नहीं आ पाती इसी लिए ऐसे लोगो को अपने प्रत्यक्ष-धन अर्थात कैश को किसी अन्य रूप में इन्वेस्ट करके रखना चाहिए और आर्थिक लेनदेन के मामलों में हमेशा सावधानी बरतनी चाहिए, कुंडली के बारहवे भाव में शत्रु या नीच राशि में स्थित राहु व्यक्ति को विदेश या दूरस्थ स्थानों से जुड़कर लाभ लेने में भी बाधक बनता है इससे विदेश यात्रा के योग मंी भी बाधाएँ उत्पन्न होती हैं इसके अलावा कुण्डली में बारहवां राहु बायीं आँख से जुडी समस्याएं भी उत्पन्न करता है

यदि राहु कुण्डली के बारहवें भाव में हो तो ऐसे में राहु की दशा भी संघर्ष बढ़ाने वाली होती है ऐसे में राहु की दशा में मानसिक तनाव और अस्थिरता बनी रहती है कार्यों में बाधायें उत्पन्न होती हैं व्यक्ति अपने पथ से भटक जाता है और किये गए गलत निर्णयों से हानि उठाता है। कुण्डली में बारहवां राहु अपनी दशा में धन हानि या नुकसान की स्थिति बनाता है इसलिए ऐसे में व्यक्ति को आर्थिक लेनदेन में बहुत सावधानी बरतनी चाहिए।

बारहवें राहु के दुष्परिणाम से बचने के ज्योतिषीय उपाय -

1. ॐ राम राहवे नमः का नियमित जाप करें।

2. शनिवार को साबुत उडद का दान करें।

3. प्रतिदिन पक्षियों को भोजन दें।

4. मस्तक पर सफ़ेद चन्दन का तिलक लगायें।

5. शनिवार को पीपल पर या शनि मन्दिर में सरसों के तेल का दिया जलायें।

6. तामसिक और मादक वस्तुओं के सेवन से राहु के दुष्परिणाम बहुत बढ़ जाते हैं अतः तामसिक और मादक पदार्थों का त्याग करें।

।। श्री हनुमते नमः।।

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