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स्त्रियाँ निःसंकोच करें हनुमान चालीसा का पाठ

श्री राम की कृपा और हनुमान जी की प्रेरणा से तुलसी बाबा ने रामायण से पूर्व "श्री हनुमान चालीसा" की रचना जगत कल्याण के लिए की जो स्वयं में एक सिद्ध ग्रन्थ है हनुमान चालीसा के दिव्य प्रताप से ही तुलसी बाबा ने राम चरित मानस की रचना की। आज के समय में शायद ही दूसरा ग्रन्थ, मंत्र या स्तोत्र हो जिसका पाठ हनुमान चालीसा के समतुल्य किया जाता हो, हनुमान चालीस आज के समय में सबसे अधिक पढ़ा जाने वाला और पाठ किया जाने वाला ग्रन्थ है, छोटे बच्चों से लेकर युवा और वृद्ध सभी हनुमान चालीस का पाठ श्रद्धापूर्वक करते हैं जो सबके लिए और सर्वप्रकार कल्याणकारी है और हनुमान चालीस के पाठ का साक्षात प्रभाव आप अपने जीवन में साक्षात् देख सकते हैं श्री हनुमान जी महाराज वायु की गति से व्यक्ति को परिणाम दिखाते हैं और उनकी कृपा प्राप्ति का हनुमान चालीसा के पाठ से अच्छा कोई साधन नहीं है और क्या कमाल की शक्ति है हनुमान चालीस में जिसके केवल नाम के बल पर एक छोटा सा बच्चा भी किसी अंधियारे रस्ते से पूर्ण निडरता के साथ निकल जाता है, जय हनुमान ज्ञान गुण सागर। ...बोलते ही व्यक्ति को अनुभव होता है के श्री हनुमान जी उसके साथ खड़े हैं और निश्चित ही कलयुग में श्री हनुमान चालीसा का पाठ प्राणी को हर प्रकार के कष्ट से मुक्ति दिलाकर हनुमान जी की कृपा का पात्र बनाता है

श्री हनुमान जी और हनुमान चालीसा के गुणों का वर्णन तो अनंत है और इसका वर्णन कर पाना हमारी क्षमता से भी बहुत परे है पर श्री हनुमान जी की प्रेरणा स्वरुप आज का हमारा विषय हनुमान चालीसा को लेकर समाज में फैली एक भ्रान्ति पर है, आज के समय में भी अक्सर हमे सुनने को मिलता रहता है के स्त्रियों को हनुमान चालीसा का पाठ नहीं करना चाहिए सदियों से चल रही यह भ्रान्ति आज तक लोगो के मन मष्तिष्क में घर किये हुए है और इस बात से हमें बहुत दुःख भी पहुँचता है, अधिकतर हम लोग किसी बात के मूल में जाने का प्रयास नहीं करते और इसी से सत्य से परे रहते हैं …………………………………… दसवे रूद्र के रूप में धरती पर अवतरित "श्री हनुमान जी" जगत पिता हैं क्योंकि वे भगवन शिव के ही तो साक्षात रूप हैं तो एक बेटी को अपने पिता के पास जाने और उनका नाम सुमिरन करने में कैसे दोष हो सकता है, कुछ लोग ये बात कहते हैं के हनुमान जी ने ब्रह्मचर्य धारण किया है इसलिए स्त्रियों को उनकी पूजा नहीं करनी चाहिए वैसे तो उपरोक्त पंक्तियों में हम स्पष्ट कर चुके हैं फिर भी ब्रह्मचर्य में स्त्री के केवल एक ही रूप का त्याग किया जाता है वह है "पत्नी" ऐसा नहीं है के कोई ब्रह्मचारी अपनी माता, बहन या बेटी तुल्य बच्ची का त्याग करता हो और सभी स्त्रियां, मातायें, बहने श्री हनुमान जी को बाबा, पिता और परमात्मा के साक्षात् स्वरुप के रूप में ही उनकी उपासना करती हैं इसमें कोई दोष कैसे होसकता है।
श्री हनुमान जी पवन स्वरूपमय हैं पवन अर्थात वायु अर्थात प्राण जिसके बिना प्राणी मात्र के जीवन की कल्पना भी नहीं की जासकती वायु रूप में वे प्रत्येक प्राणी से जुड़े हुए हैं कोई भी व्यक्ति वायु से संपर्क के बिना रह ही नहीं सकता स्त्री हो या पुरुष, श्री हनुमान जी परमात्मा का साक्षात् स्वरुप हैं और वास्तविकता तो यह है के परमात्मा और जीवात्मा के सम्बन्ध में स्त्री और पुरुष का भेद होता ही नहीं यहाँ तो एक और जीवात्मा है और दूसरी और परमात्मा इतना कुछ समझने के बाद एक सबसे महत्वपूर्ण बात सुनिये। .................. हनुमान चालीसा की रचना करने वाले "तुलसी दास बाबा" ने हनुमान चालीस में स्पष्ट रूप से लिखा है। ...... " जो यह पढ़े हनुमान चालीसा, होय सिद्धि साखी गौरीसा" ये नहीं लिखा के जो पुरुष पढ़े हनुमान चालीसा या जो नर पढ़े हनुमान चालीसा जब रचना करने वाले ने ही लिखा है जो यह पढ़े हनुमान चालीसा तो दूसरा कौन कह सकता है के स्त्रियों को हनुमान चालीसा का पाठ नहीं करना चाहिए जो यह पढ़े। ... का मतलब है स्त्री पढ़े पुरुष पढ़े बालक पढ़े वृद्ध पढ़े इसमें तो सम्पूर्ण प्राणी मात्र ही आजाता है अतः स्त्रियों को हनुमान चालीसा का पाठ करने में तनिक भी संकोच नहीं करना चाहिए। और आज के समय में तो अपने मनोबल, इच्छाशक्ति और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने के लिए स्त्रियों को हनुमान चालीसा का पाठ अवश्य करना ही चाहिए और यदि श्रद्धा पूर्वक कोई भी प्राणी श्री हनुमान चालीसा का पाठ करता है तो श्री हनुमान जी सदैव उसकी रक्षा के लिए उसके साथ रहते हैं। ..... जय श्री राम।।

।।श्री हनुमते नमः।।

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