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मंगल और रुचक योग ये हैं इसके विशेष परिणाम

कुंडली में मंगल यदि स्व राशि (मेष, वृश्चिक) या उच्च राशि (मकर) में होकर केंद्र (1, 4, 7, 10) भाव में बैठा हो तो इसे रूचक योग कहते हैं।

यदि कुंडली में रूचक योग बना हो तो ऐसा व्यक्ति हिम्मत, शक्ति, प्रक्रम से परिपूर्ण एक निडर व्यक्ति होता है। प्रतिस्पर्द्धा और साहसी कार्यों में हमेशा आगे रहता है ऐसे व्यक्ति को कभी शत्रु दबा नहीं पाते। रूचक योग वाला व्यक्ति जिस बात को ठान ले उसे अवश्य पूरा करता है। इस योग के बनने पर व्यक्ति की मांसपेशियां बहुत अच्छी होती हैं और व्यक्ति उम्र बढ़ने पर भी तरुण अवस्था का प्रतीत होता है। रूचक योग वाला व्यक्ति कर्मप्रधान होता है और मेहनत करने में कभी नहीं घबराता, ऐसा व्यक्ति कठिन से कठिन परिस्थिति में भी अपने कर्म को नहीं छोड़ता और विपरीत परिस्थितियों में भी अपने को समान्य बनाये रखता है, कुंडली में रुचक योग बनने पर व्यक्ति में खेलों (स्पोर्ट्स) में आगे बढ़ने की विशेष प्रतिभा होती है और हमेशा प्रतिस्पर्धा में आगे रहता है, रुचक योग बनने के साथ अगर कुंडली में शिक्षा की भी अच्छी स्थिति हो तो ऐसे में व्यक्ति टेक्नीकल फील्ड (इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, सिविल इंजीनियरिंग) और डिफेन्स में भी आगे जा सकता है। ऐसे में मंगल की दशा भी बहुत अच्छे परिणाम देती है

।। श्री हनुमते नमः।।

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