Article of the Month - Astroindusoot

Astro Articles

कैसा फल देगी राहु की दशा

अपनी जन्मकुंडली में चल रही राहु की किसी दशा (महादशा, अंतर्दशा, प्रत्यन्तर्दशा) को लेकर प्रत्येक व्यक्ति के मन में एक भय व्याप्त रहता है और काफी हद तक यह सही भी है परंतु राहु की दशा सभी व्यक्तियों के लिए एक जैसा ही फल करे ऐसा आवश्यक नहीं है कुछ लोगों को राहु की दशा में बहुत संघर्ष और बाधाओं का सामना करना पड़ता है तो कुछ लोग राहु की दशा में अप्रत्याशित उन्नति भी करते है…………. वास्तव में राहु की दशा आपको कैसा फल देगी यह इस बात करता है के राहु आपकी कुंडली में है किस स्थिति में राहु की अपनी कोई राशि नहीं होती और राहु को एक छाया ग्रह माना गया है इसलिए कुंडली में राहु जैसे ग्रहों और भाव के प्रभाव में होता है वैसा ही फल करता है छाया ग्रह होने के कारण राहु जिस ग्रह होता है या जिस ग्रह के प्रभाव में होता है उसी के गुण-दोष ग्रहण कर लेता है और वैसा ही फल करता है………….

सामान्यतः कुंडली में राहु की शुभ स्थितियों को देखें तो कुंडली के लाभ स्थान अर्थात ग्यारहवे भाव में राहु की स्थिति को श्रेष्ठ माना गया है इसके अलावा कुंडली के तीसरे छटे दसवे लग्न पंचम और नवम भाव का राहु भी सामान्यतः शुभ फल करता है इसके अलावा राहु यदि कुंडली के शुभकारक ग्रह लग्नेश पंचमेश और भाग्येश के प्रभाव में हो तो भी राहु इनके गुण लेकर अच्छा करता है अतः यदि कुंडली में राहु इन पुरोक्त स्थितियों में हो अपनी दशा में अच्छा फल करेगा और उन्नति कराएगा विशेष रूप से यदि एकादश भाव में हो तो ऐसे में राहु की दशा व्यक्ति को आकस्मिक लाभ और अप्रत्याशित उन्नति भी कराती है………….

अब यदि राहु की अशुभ स्थितियों को देखें कुंडली के चौथे आठवे और बारहवे भाव में स्थित राहु संघर्ष और बाधाएँ बढ़ाने वाला होता है इसमें भी विशेष रूप से कुंडली के आठवे भाव में स्थित राहु सर्वाधिक समस्याकारक माना गया है इसके अलावा यदि राहु अपनी नीच राशि धनु में हो या कुंडली के अकारक ग्रहों षष्टेष, अष्टमेश या द्वादशेश के प्रभाव में हो तो भी राहु संघर्ष बढ़ाने का कार्य करता है तो यदि कुंडली में राहु इन उपरोक्त स्थितियों में हो तो ऐसे में राहु की दशा व्यक्ति के जीवन में बहुत संघर्ष बढ़ाने वाली होती है और कुंडली में अशुभ स्थिति में स्थित राहु की दशा व्यक्ति की मति भ्रमित कर उसे गलत निर्णयों की और ले जाती है व्यक्ति कुसंगति की और जाने लगता है ऐसे में व्यक्ति मानसिक चलायमानता और अवसाद जैसी समस्याएं भी होती है और व्यक्ति कर्म को एकाग्रता से नहीं कर पाता अशुभ स्थितियों में स्थित राहु की दशा में व्यक्ति को दूसरों की सही बात भी गलत लगने लगती है और स्वभाव भी इरिटेटिड रहता है विवाद बढ़ते हैं और शत्रु बाधा भी होती है विशेष रूप से बारहवे भाव में स्थित राहु की दशा व्यय बढाती है तो आठवे राहु की दशा में शारीरिक और मानसिक समस्याएं बढ़ती हैं।
तो यहाँ हमने देखा के किन स्थितियों में राहु की दशाएं अच्छा फल करती हैं और किन स्थितियों में संघर्ष बढ़ाती हैं इसलिए केवल राहु की दशा सभी को एक सामान फल दे ऐसा आवश्यक नहीं है उपरोक्त गणनाओं के अनुसार कुछ स्थितियों में राहु की दशा संघर्ष उत्पन्न करती है तो कुछ स्थितयों में व्यक्ति को अप्रत्याशित उन्नति भी करा देती है इसलिए किसी भी व्यक्ति की कुंडली के गहन अध्यन और उसमे राहु की स्थिति को देखकर ही राहु की दशा का फल निश्चित किया जाता है।

यदि राहु की किसी भी दशा (महादशा, अंतर्दशा, प्रत्यन्तर्दशा) में संघर्ष या बाधाएँ बढ़ रही हों तो ये उपाय लाभकारी होंगे -

1. ॐ राम राहवे नमः का नियमित जाप करें।

2. प्रत्येक शनिवार को साबुत उडद का दान करें।

3. प्रतिदिन पक्षियों को भोजन दें।

4. सफ़ेद चन्दन का तिलक लगाएं।

5. सफ़ेद चन्दन से बनी माला गले में धारण करें।

6. तामसिक पदार्थों का त्याग करें।

7. किसी योग्य ज्योतिषी की सलाह के बिना गोमेद बिलकुल न पहने।

।।श्री हनुमते नमः।।

अगर आप अपने जीवन से जुडी किसी भी समस्या किसी भी प्रश्न जैसे – हैल्थ, एज्युकेशन, करियर, जॉब मैरिज, बिजनेस आदि का सटीक ज्योतिषीय विश्लेषण और समाधान लेना चाहते हैं तो हमारी वैबसाईट पर Online Consultation के ऑप्शन से ऑनलाइन कंसल्टेशन लेकर अपनी समस्या और प्रश्नो का घर बैठे समाधान पा सकते हैं अभी प्लेस करें अपना आर्डर कंसल्ट करें ऑनलाइन
ऑनलाइन कंसल्टेशन की जानकारी के लिए हमारे कस्टमर केयर या वाट्सएप्प नंबर पर भी बात कर सकते हैं


Customer Care – 9027498498

WhatsApp - 9068311666

ASTRO ARTICLES