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श्री कृपा का श्रेष्ठ साधन है श्री सूक्त

श्री अर्थात लक्ष्मी, माता लक्ष्मी जगत पालनकर्ता भगवान् विष्णु की शक्ति स्वरूपा हैं जिनकी कृपा से ही सम्पूर्ण जगत का पालन-पोषण होता है और इसकी कृपा के बिना सृष्टि का संचालन संभव नहीं है श्री या लक्ष्मी का तात्पर्य केवल धन से नहीं बल्कि सम्पूर्ण समृद्धि से है, जब व्यक्ति का शरीर स्वस्थ हो मन प्रसन्न हो अच्छी यश कीर्ति हो धन का अभाव न हो तो ये समृद्धि जीवन को दर्शाता है और माता लक्ष्मी ही सम्पूर्ण जगत और प्राणी मात्र को समृद्धि प्रदान करने वाली हैं जिनकी कृपा होने पर रंक को भी राजा के समान वैभव प्राप्त हो जाता है। ................ हमारे विभिन ग्रंथों और शात्रों में वैसे तो श्री साधना या माता लक्ष्मी की उपासना के लिए बहुत से मंत्र और स्तोत्रों का वर्णन मिलता है परंतु माता लक्ष्मी की साधना और उनकी कृपा प्राप्ति के लिए "श्री सूक्त" को सबसे श्रेष्ठ और सरल साधन माना गया है। श्री सूक्त का वर्णन सर्वप्राचीन "ऋग्वेद" से प्राप्त होता है अर्थात श्री सूक्त ऋग्वेद का ही एक अंश है और क्योंकि ऋग्वेद का परमात्मा के रूप में ही प्राकट्य हुआ है इसलिए श्री सूक्त एक परम सिद्ध स्तोत्र है जो माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्ति का सर्वश्रेष्ठ साधन है।

श्री सूक्त सोलह ऋचाओं वाला स्तोत्र है अर्थात इसमें क्रमबद्ध सोलह मन्त्र हैं जिनमे माँ लक्ष्मी की स्तुति की गयी है। श्री सूक्त का पाठ नियमित और श्रद्धापूर्ण रूप से करने पर व्यक्ति को माँ लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन समृद्ध बनता है, श्री सूक्त के नियमित पाठ से व्यक्ति को धन, यश कीर्ति और सम्पूर्ण समृद्धि की प्राप्ति होती है अतः आभाव और संघर्ष का सामना कर रहे व्यक्ति के द्वारा श्रद्धापूर्वक श्री सूक्त का पाठ करने पर जीवन में शुभ परिवर्तन अवश्य आते हैं। ...... ज्योतिषीय दृष्टिकोण में माँ लक्ष्मी को शुक्र की अधिष्ठात्री देवी माना गया है अतः जिन लोगो की जन्मकुंडली में शुक्र पीड़ित या कमजोर हो उन्हें भी श्री सूक्त का पाठ बहुत शुभ फल प्रदान करता है।

विशेष - श्री सूक्त का पाठ आरम्भ करते समय अपने मन में माँ लक्ष्मी के पड़ चिन्हों का इस प्रकार ध्यान करें के माँ लक्ष्मी आपके घर के मुख्य द्वार से अंदर प्रवेश करती हुईं आ रही हैं और उनके पद चिन्ह घर के अंदर आगे बढ़ते चले आ रहे हैं फिर हरी ॐ..... का दीर्घ उच्चारण करते हुए श्री सूक्त का पाठ आरम्भ करना चाहिए।

।।श्री हनुमते नमः।।

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