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लग्न में बृहस्पति के शुभ परिणाम

ज्योतिष में कुण्डली के बारह भावों में से केंद्र (पहला, चौथा, सत्व, दसवां भाव) स्थान तथा नवग्रहों में से बृहस्पति दोनों का ही बड़ा विशेष महत्व है, बृहस्पति को ज्ञान, विवेक, शिक्षा, सात्विकता, सामाजिक प्रतिष्ठा, परिपक्वता, अपने गुरु, सच्चरित्रता, प्रबंधन क्षमता, समाधान शक्ति, धर्म, अध्यापन, सकारात्मक ऊर्जा आदि का कारक माना गया तो वहीँ कुंडली में श्रेष्ठ और शुभ बताये गए केंद्र भावों में भी लग्न अर्थात कुंडली में प्रथम भाव को सर्वाधिक महत्वपूर्ण और विशेष माना गया है लग्न भाव को शरीर बल, रूप, आकृति प्रकृति, स्वभाव, प्रसिद्धि, प्रतिष्ठा, यश, तेज, आत्मा, आत्मविश्वाश आदि का कारक माना गया है।

जन्मकुंडली में वैसे तो बृहस्पति का केंद्र में होना ही बहुत शुभ माना गया है पर इसमें भी लग्न में स्थित बृहसपति को श्रेष्ठ और सर्वाधिक शुभ परिणाम देने वाला माना गया है ज्योतिषीय नियमों के अनुसार यह बृहस्पति के सबसे अच्छी स्थिति होती है, सर्वप्रथम तो लग्न में बृहस्पति को पूर्ण दिक्बल प्राप्त होने से यहाँ बृहस्पति बहुत बली स्थिति में होता है केवल अपनी नीच राशि "मकर" के अतिरिक्त सभी स्थितियों में बृहस्पति का लग्न में होना व्यक्ति को बहुत शुभ परिणाम देता है। ........... यदि कुण्डली में बृहस्पति लग्न में स्थित हो तो ऐसा व्यक्ति बहुत ज्ञानवान, विवेकशील और परिपक्व स्वाभाव का होता है ऐसे व्यक्ति में ज्ञान की प्रधानता तो होती ही है साथ ही ऐसे व्यक्ति में आंतरिक सकारात्मक ऊर्जाओं की भी अधिकता होती है जिससे उसके व्यक्तित्व में एक सकारात्मक आभा और आकर्षण बना रहता है पर ऐसे व्यक्ति में अपने आप को ही श्रेष्ठ समझने की आदत भी होती है, लग्न में बृहस्पति होने पर व्यक्ति में एक शिक्षक के अच्छे गुण विद्यमान होते हैं और ऐसा व्यक्ति अपने ज्ञान और विवेक के द्वारा सामाजिक सम्मान और प्रतिष्ठा प्राप्त करता है तथा ऐसे व्यक्ति में प्रत्येक परिस्थिति को मैनेज करने की अच्छी क्षमता होती है। .........लग्न में बृहस्पति होने पर जातक को दीर्घायु या पूर्णायु प्राप्त होती है, लग्न में स्थित बृहस्पति को कुंडली में अनेको दोषो को नष्ट करने वाला माना गया है, जिन लोगो की कुण्डली में लग्न में बलवान बृहस्पति हो तो ऐसे व्यक्तियों में एक विशेष प्रकार की समाधान शाक्ति होती है ऐसे व्यक्ति दूसरे लोगों की समस्याओं का समाधान करने का विशेष गुण रखने से समाज में एक विशेष स्थान और स्नेह प्राप्त करते हैं, लग्न में बृहस्पति यदि स्व, उच्च राशि (धनु, मीन, कर्क) में हो तो इसे राजयोग तुल्य ऐश्वर्य प्रदान करने वाला होता है ऐसे में व्यक्ति के ज्ञान और सद्गुणों की कीर्ति लोकप्रसिद्ध होती है, ऐसा व्यक्ति समाजसेवा और धार्मिक कार्यों में भी अग्रणी होता है, इसके अलावा बृहस्पति लग्न में होने पर कुंडली में पँचम भाव (बुद्धिस्थान) साप्तमभाव (विवाह स्थान) और भाग्य स्थान को अपनी शुभ दृष्टि से बहुत बली कर देता है जिससे व्यक्ति के जीवन में बहुत सी सकारात्मक वृद्धि होती है। .........लग्न में बृहस्पति होना विशेष रूप से बौद्धिक, ज्ञानवर्धक, प्रबंध और उपचार कार्य करने वाले व्यक्तियों के लिए बहुत शुभ होता है।

।।श्री हनुमते नमः।।

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