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कुंडली में भाग्य स्थान का विशेष महत्त्व

जीवन में सफलता असफलता की स्थिति तो सामान्यतः सभी के सामने आती है परंतु बहुत बार व्यक्ति का भाग्य का उदय होने में बड़ी बाधाएं और विलम्ब सामने आते हैं, जहाँ कुछ लोग अपने प्रयासों से जल्दी ही सफल हो जाते हैं वहीँ कुछ लोगो के भाग्योदय में बहुतसी बाधायें आती हैं और प्रत्येक कार्य के लिए अधिक संघर्ष का सामना करना पड़ता है, वैसे तो हमारी जन्मकुंडली में सभी ग्रह और अन्य घटक मिलकर ही हमारे पूरे भाग्य को निश्चित करते हैं परंतु कुंडली में भाग्य स्थान (नवम भाव) और भाग्येश (नवम भाव का स्वामी) की बड़ी ही महत्वपूर्ण भूमिका होती है, नवम भाव को जहाँ धर्म भक्ति और आस्था का कारक माना गया है वही व्यक्ति के भाग्य का प्रतिनिधित्व भी नवम भाव ही करता है, कुंडली में नवम भाव भाग्य स्थान होने के कारण ही सबसे विशेष स्थान रखता है तथा भाग्य स्थान व भाग्येश की स्थिति जीवन के प्रत्येक कार्य की सफलता में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, कुंडली में भाग्य स्थान और भाग्येश अच्छी और बलवान स्थिति में होने पर व्यक्ति का भाग्योदय जल्दी व सरलता से होजाता है तो वहीँ भाग्य स्थान व भाग्येश कमजोर और पीड़ित होने पर जीवन में संघर्ष की अधिकता होती है आसानी से भाग्योदय नहीं होता तथा प्रत्येक कार्य की पूर्ति में बाधायें आती हैं।

1. यदि भाग्येश भाग्य स्थान में ही स्थित हो या भाग्येश की भाग्य स्थान पर दृष्टि हो तो जीवन में अच्छी सफलता देता है और जल्दी ही व्यक्ति का भाग्योदय हो जाता है।

2. कुंडली में भाग्येश यदि स्व उच्च राशि में होकर शुभ स्थान में हो तो अच्छी सफलता देता है तथा समय पर व्यक्ति का भाग्योदय हो जाता है।

3. भाग्येश का केंद्र त्रिकोण (1,4,7,10,5,9 भाव) में होना व्यक्ति को अच्छा भाग्य देता है तथा जीवन में किये गए प्रयास सफल रहते हैं।

4. भाग्य स्थान में शुभ ग्रह होना भी भाग्य वृद्धि करता है।

5. यदि भाग्येश नीच राशि में हो तो व्यक्ति के भयोदय में विलम्ब और संघर्ष होता है।

6. यदि भाग्येश पाप भाव (6,8,12) में हो तो जीवन में संघर्ष की अधिकता होती है तथा भाग्योदय में विलम्ब होता है।

7. यदि भाग्य स्थान में कोई पाप योग (ग्रहण योग, गुरुचांडाल योग, अंगारक योग आदि) बन रहा हो तो ऐसे में व्यक्ति के भाग्य में बहुत अड़चने आती हैं। और आसानी से भाग्योदय नहीं हो पाता।

8. भाग्य स्थान में कोई पाप ग्रह नीच राशि में हो तो वः भी भाग्योदय में विलम्ब और संघर्ष कराता है।
यदि कुंडली में भाग्येश अच्छी स्थिति में हो और शुभ स्थान में बैठा हो तो ऐसे में भाग्येश की दशा आने पर व्यक्ति की बहुत उन्नति और भाग्योदय होता है तथा व्यक्ति जीवन में अपनी प्लानिंग्स को पूरा करने में सक्षम होता है और अपने लक्ष्यों की और आगे बढ़ता है।

।।श्री हनुमते नमः।।

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