Article of the Month - Astroindusoot

Astro Articles

जानिए आपकी कुंडली में कौनसे ग्रह हैं मारकेश और क्या उपाय करें मारकेश से बचने के लिए

फलित ज्योतिष और जन्मकुंडली विश्लेषण में "मारकेश" शब्द बहुत ही चर्चित विषय है जिसके बारे में हम सभी सुनते ही रहते हैं और कुंडली में मारकेश की दशा को लेकर सभी के मन में एक भय भी बना ही रहता है क्योंकि मारकेश का सीधा अर्थ होता है मारने वाला या मृत्यु तुल्य कष्ट देने वाला मारकेश नाम से ही किसी बड़े अनिष्ट या शारीरिक कष्ट की छवि मष्तिष्क में बनने लगती है तो आज हम यहाँ इसी बात की चर्चा करेंगे के जन्मकुंडली में मारकेश की भूमिका कौनसे ग्रह निभाते हैं और कौनसे ग्रह अपनी दशाओं में मारक बनते हैं और क्या होता है होता है मारकेश की दशाओं का हमारे जीवन पर प्रभाव आईये जाने…

ज्योतिषीय दृष्टि से कुंडली का आठवां भाव मृत्यु का भाव माना गया है और आयु को निश्चित करने में आठवां भाव अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है इसलिए इसे आयु भाव भी कहा गया है तथा ज्योतिष में भावतभावम के अनुसार कुंडली का तीसरा भाव अष्टम से अष्टम होने से यह भी अष्टम भाव के तुल्य प्रभाव करता है और किसी भी भाव से बारहवे भाव को उस भाव का हानि भाव माना गया है इसी आधार पर आठवे से बारहवा भाव (अर्थात कुंडली का सातवां भाव) और तीसरे से बारहवा भाव (अर्थात कुंडली का दूसरा भाव) मारक भाव कहा गया है और सातवे और दूसरे भाव के स्वामी को ही मारकेश ग्रह कहा जाता है अर्थात कुंडली में "धनेश और सप्तमेश" मारक ग्रह कहे जाते इसके आलावा छठा भाव भाव बीमारी का भाव होने और आठवां भाव मृत्यु का भाव होने से ये दोनों भाव भी मारक भाव की श्रेणी में ही आते हैं तो इस प्रकार कुंडली में धनेश, सप्तमेश, षष्टेश और अष्टमेश अपनी दशाओं में अपना मारक परिणाम दिखाते हैं पर यहाँ इस बात को समझना आवश्यक है के मारकेश का अर्थ केवल मृत्यु देने वाला ग्रह ना समझकर मृत्यु तुल्य कष्ट देने वाला ग्रह समझना चाहिए, किसी भी व्यक्ति की कुंडली में जब मारकेश ग्रह की महादशा अन्तर्दशा या प्रत्यंतर दशा चल रही होती है तो ऐसे में विशेष कर उस व्यक्ति को स्वास्थ समस्यायों और शारीरिक कष्टों का सामना करना पड़ता है मारकेश ग्रहों की दशाओं में कुछ व्यक्तियों को सामान्य शारीरिक कष्ट होते हैं तो कुछ व्यक्तियों को गंभीर कष्टों का भी सामना होता है स्वास्थ में आने वाले लगातार उतार चढाव, शारीरिक कष्ट और दुर्घटनाओं आदि का भी सामना होता है पर क्योंकि व्यक्ति की व्यक्तिगत कुंडली की ग्रहस्थिति कैसी है और मारकेश ग्रह की दशा के अलावा उस समय में कुंडली में चल रही अन्य दशाओं और गोचर ग्रह सभी के सम्मिश्रण से परिणाम निकाला जाता है तो कुंडली में मारकेश की दशा आने पर सचेत अवश्य होजाना चाहिए पर इस समय में आपको बहुत बुरे परिणाम निश्चित रूप से ही मिलेंगे ऐसा आवश्यक नहीं है मारकेश की दशा व्यक्ति के लिए सामान्य कष्टकारी होगी या फिर गंभीर कष्टकारी यह उसकी कुंडली में स्थित मारकेश ग्रह की स्थिति पर निर्भर करता है, यह एक बड़ी महत्वपूर्ण बात है के कुंडली में कोई भी ग्रह जब बहुत ही पीड़ित और कमजोर स्थिति में होता है तभी वो अधिक बुरे परिंणाम देता है तो व्यक्ति की कुंडली में जिस भी मारकेश ग्रह की दशा चल रही है यदि वह कुंडली में शुभ स्थिति शुभ स्थान में और बाली होकर बैठा है तो मारकेश होने पर भी मृत्यु तुल्य कष्ट ना देकर सामान्य शारीरिक कष्ट देगा और मारकेश ग्रह कुंडली में जितना अधिक पीड़ित और कमजोर होगा या दुःख भावों में होगा उतना ही अधिक कष्ट अपनी दशा में देगा…

अब जैसा के हम बता ही चुके हैं के कुंडली में धनेश, सप्तमेश, षष्टेश और अष्टमेश मुख्य रूप से मारकेश ग्रह होते हैं जो अपनी दशाओं में शारीरिक कष्ट देते हैं पर अब यहाँ एक गहन बात यह है के बहुतसी विशेष परिस्थियों में ऊपर बताये गए ये मारकेश ग्रह अन्य शुभ भावों के स्वामी भी होने के कारण अपना मारक प्रभाव छोड़ देते हैं जैसे बहुत बार धनेश ग्रह लग्नेश (स्वास्थ का स्वामी) का मित्र होने से अधिक मारक नहीं बनता ऐसे ही मेष और तुला लग्न में लग्नेश ही अष्टमेश होता है जिससे वह मारक फल नहीं करता तो इससे हमारा तात्पर्य यही है के ऊपर बताये गए ये चार ग्रह मारकेश होते और अपनी दशा में मारक फल करते अवश्य हैं पर इनके मारक परिणाम की तीव्रता व्यक्ति की अपनी कुंडली की भिन्न भिन्न ग्रहस्थिति पर ही निर्भर करती है , मारकेश की दशा को लेकर मृत्यु होने जैसी स्थिति कभी भी केवल मारकेश की दशा के कारण नहीं आती इसलके लिए तो जब कुंडली में मारकेश की दशा के साथ साथ अन्य दशाएं और ग्रह गोचर आदि सभी ग्रह व्यक्ति के प्रतिकूल हो तभी ऐसा होता है बाकि मारकेश ग्रहों की दशाएं तो बालयवस्था से वृद्ध होने तक छोटे बड़े रूप में बार बार अति ही रहती हैं जो केवल स्वास्थ और शारीरिक कष्ट उत्पन्न करती हैं…….. कुछ विशेष परिस्थितियों में धनेश, षष्टेश और अष्टमेश मारक नहीं बनते इसी लिए हम बारह लग्नो में विशेष मारकेश ग्रहों के विषय में यहाँ अलग से भी बता रहे हैं -

लग्न मारक ग्रह

मेष लग्न - शुक्र, बुध

वृष लग्न - बृहस्पति, मंगल

मिथुन लग्न - मंगल, बृहस्पति, चन्द्रमाँ

कर्क लग्न - शनी

सिंह लग्न - शनि, बुध

कन्या लग्न - बृहस्पति, मंगल

तुला लग्न - मंगल, बृहस्पति

वृश्चिक लग्न - शुक्र, बुध

धनु लग्न - शुक्र, बुध, शनि

मकर लग्न - चन्द्रमाँ, सूर्य

कुम्भ लग्न - चन्द्रमाँ, सूर्य, बृहस्पति

मीन लग्न - बुध, शुक्र

यदि कुंडली में चल रही किसी भी मारकेश ग्रह की दशा में अधिक कष्ट सामने आ रहे हों तो ये उपाय करें -

1. मारकेश ग्रह के बीज मंत्र का जितना हो सके जाप करें।

2. जिस मारकेश ग्रह की दशा चल रही है उस ग्रह से सम्बंधित दान नियमित करते रहें।

3. महामृत्युंजय मंत्र का यथाशक्ति जाप करें या योग्य ब्राह्मण से कराएं।

।।श्री हनुमते नमः।।

अगर आप अपने जीवन से जुडी किसी भी समस्या किसी भी प्रश्न जैसे हैल्थ एज्युकेशन करियर जॉब मैरिज बिजनेस आदि का सटीक ज्योतिषीय विश्लेषण और समाधान लेना चाहते हैं तो हमारी वैबसाईट पर Online Consultation के ऑप्शन से ऑनलाइन कंसल्टेशन लेकर अपनी समस्या और प्रश्नो का घर बैठे समाधान पा सकते हैं अभी प्लेस करें अपना आर्डर कंसल्ट करें ऑनलाइन

Customer Care – 9027498498

WhatsApp - 9068311666

ASTRO ARTICLES