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भद्र-योग के अद्बुध लाभ

भद्रा योग "पंच महापुरुष" योगों में से एक है जो बुध की कुछ विशेष स्थितियों से बनता है अगर कुंडली में बुध स्व या उच्च राशि (मिथुन, कन्या) में होकर केंद्र भाव (पहला चौथा सातवा और दसवा भाव) में बैठा हो तो इसे भद्र योग कहते हैं।

अगर किस व्यक्ति की कुंडली में भद्र योग बन रहा हो तो ये व्यक्ति को विलक्षण प्रतिभा और कुशल बौद्धिक क्षमता प्रदान करता है। जिस व्यक्ति की कुंडली में भद्र योग हो वह बहुत बुद्धिमान, तर्कशील, दूरदृष्टा, और व्यव्हार कुशल होता है ऐसे व्यक्ति की कैचिंग बहुत तेज होती है और किसी भी गहन बात को शीघ्र ही समझ लेता है ऐसा व्यक्ति दूसरे लोगों के मन की बात को भांपने में कुशल होता है गणनात्मक और बौद्धिक कार्यों में हमेशा आगे रहता है। कुंडली में भद्र योग बनने पर व्यक्ति की वाक शक्ति या वाणी क्षमता भी बहुत अच्छी अच्छी होती है ऐसा व्यक्ति अपनी बातों से दूसरे लोगों को जल्दी ही प्रभावित कर देता है और अपने बौद्धिक चातुर्य से अपनी सभी बातों को सही साबित कर देता है। जिन बच्चों की कुंडली में भद्र योग होता है वे शिक्षा पक्ष में हमेशा अच्छे स्तर पर रहते हैं और गणनात्मक और तकनीकी विषयों में ऐसे बच्चों की रूचि ज्यादा होती है। जिन लोगों की कुंडली में भद्र योग होता है उनकी इंट्यूशन पावर भी अच्छी होती है।

जिन बच्चों की कुंडली में भद्र योग बना होता है उन्हें विज्ञान और तकनीकी क्षेत्रों में अच्छी सफलता मिलती है और भद्र योग होने पर व्यक्ति रिसर्च के क्षेत्र में भी अच्छी सफलता पाता है। करियर के नजरिये से भी अगर कुंडली में भद्र योग बना हो तो ऐसे में अकाउंटैंट, मार्केटिंग, सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, कम्प्यूटर साइंस, इन सभी कार्यों में अच्छी सफलता मिलती है इसके अलावा ऐसा व्यक्ति एक अच्छा राईटर भी बन सकता है। कुंडली में भद्र योग होना व्यक्ति को एक कंसल्टैंट के रूप में भी आजीविका दिलाता है। जिन लोगों की कुंडली में भद्र योग बना होता है वे पत्रकारिता के क्षेत्र में भी अच्छी सफलता पाते हैं अच्छे पत्रकार के साथ साथ अच्छे एंकर भी बन सकते हैं। जिन लोगों की कुंडली में भद्र योग होता है उनमे व्यापारिक गुण भी बहुत अच्छे होते हैं इसलिए ऐसे व्यक्ति बिजनेस के क्षेत्र में भी अच्छी पकड़ रखते हैं।

।। श्री हनुमते नमः।।

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