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कुण्डली में ग्रहण योग

फलित ज्योतिष में कुंडली में बनने वाली विभिन्न ग्रहस्थतियों से उत्पन्न अनेको योगो का वर्णन किया गया है जिनमे से व्यावहारिक रूप से बहुत से योग अपना सटीक परिणाम भी दिखाते हैं कुछ योग जीवन में शुभ फल की वृद्धि करने वाले होते हैं तो कुछ संघर्ष और समस्या बढ़ाने का काम करते हैं ऐसा ही एक योग है ग्रहण-योग इस योग का वर्णन ज्योतिष में बहुत सी जगहों पर देखने और पढ़ने को मिलता है और व्यावहारिक रूप से भी यह योग अपना पूरा परिणाम दिखाता है ग्रहण योग एक नकारात्मक योग है जो जीवन में संघर्ष और समस्याओं को बढ़ाता है।

"ग्रहण योग राहु के साथ सूर्य और चन्द्रमाँ की युति होने पर बनता है अर्थात कुंडली में जब सूर्य और राहु एक साथ हो या जब चन्द्रमाँ और राहु एक साथ हो तो इसे ग्रहण योग कहते हैं अतः ग्रहण योग दो प्रकार से बनता है सूर्य और राहु के एक साथ होने से तथा चन्द्रमाँ और राहु के एक साथ होने से। ग्रहण योग विपरीत परिणाम देने वाला योग होता है यदि कुंडली में ग्रहण योग है तो जिस भाव में यह योग बना हुआ हो उस भाव को पीड़ित करके उस भाव से सम्बंधित वस्तुओं के सुख में कमी या बाधा उत्पन्न करता है, ग्रहण योग सूर्य या चन्द्रमाँ जिस भी ग्रह से बनता है वह ग्रह स्वयं भी पीड़ित हो जाता है क्योकि राहु, चन्द्रमाँ और सूर्य दोनों का परम् शत्रु और पाप ग्रह है जो सूर्य और चन्द्रमाँ दोनों को अपने साथ होने पर पीड़ित करता है"

सूर्य से ग्रहण योग -
जब सूर्य और राहु की युति के कारण कुंडली में ग्रहण योग बनता है तो ऐसे में व्यक्ति को जीवन में यश की प्राप्ति नहीं होती अच्छी प्रसिद्धि और प्रतिष्ठा नहीं मिल पाती, अपना काम अच्छा करने पर भी एप्रिसिएशन नहीं मिल पाती, अपने सीनियर्स और बॉस के साथ अनबन की स्थिति रहती है और ऐसे में व्यक्ति को दूसरो का भला करने पर भी भलाई नहीं मिलती, ग्रहण योग होने पर व्यक्ति का आत्मविश्वास और इच्छा शक्ति कमजोर होती है अपनी प्रतिभाओं को अच्छे से प्रदर्शित नहीं कर पाता। ऐसे में व्यक्ति को पिता के सुख में कमी होती है या पिता के साथ विचार न मिलने पर अनबन की स्थिति बनी रहती है, सूर्य से ग्रहण योग बनने पर व्यक्ति को जीवन में सरकारी समस्याएं या लीगल प्रॉब्लम्स भी बहुत आती हैं, स्वास्थ की दृष्टि से यह योग कैल्सियम की कमी, आँखों, हड्डियों और हेयरफॉल से जुडी समस्याएं देता है।

चन्द्रमाँ से ग्रहण योग -
जब चन्द्रमाँ और राहु की युति से कुंडली में ग्रहण योग बन रहा हो तो ऐसे में व्यक्ति को मानसिक रूप से बहुत सी समस्याओं का सामना होता है मानसिक शांति की हमेशा कमी रहती है, व्यक्ति को ओवर थिंकिंग या नेगेटिव थिंकिंग का शिकार होता है ऐसे में व्यक्ति को एंग्जायटी और घबराहट और डिप्रेशन की भी समस्या होती है। ऐसा व्यक्ति जल्दी ही किसी भी बात को लेकर परेशान हो जाता है व्यक्ति में मानसिक शक्ति की कमी होती है इसलिए ऐसे व्यक्ति पर नकारात्मक विचार जल्दी ही हावी हो जाते हैं और ऐसे में व्यक्ति इमोशनली बहुत सेंसिटिव होता है। चन्द्रमाँ से ग्रहण योग बनने पर व्यक्ति को माता के सुख में कमी होती है या विचार न मिलने के कारण अनबन की स्थिति रहती है इस योग के कारण व्यक्ति को सामान्य यात्राओं में और विदेश यात्रा में भी बहुत बाधायें आती हैं।
स्वास्थ की दृष्टि से यह योग फेफड़ो से जुडी समस्या, अस्थमा, सर्दी से होने वाले रोग, माइग्रेन, साइनस और साइकोलॉजिकल डिसऑडर्स जैसी समस्याएं दे सकता है।

उपाय - यदि कुंडली में ग्रहण योग बनने पर बाधाओं का सामना हो रहा हो तो ये उपाय करें अवश्य लाभ होगा। ..........
सूर्य से ग्रहण योग बनने पर

1. ॐ घृणि सूर्याय नमः का जाप करें ( एक माला रोज )

2. आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें।

3. सूर्य को रोज जल दें।

4. रविवार को गाय को गुड़ खिलाएं।

5. शनिवार को साबुत उडद का दान करें।

चन्द्रमाँ से ग्रहण योग बनने पर -

1. ॐ सोम सोमाय नमः का जाप करें ( एक माला रोज )

2. प्रतिदिन शिवलिंग का अभिषेक करें।

3. सोमवार को गरीब व्यक्ति को दूध दान करें।

4. महामृत्युंजय मन्त्र का क्षमतानुसार जाप करें।

5. शनिवार को साबुत उडद का दान करें।

।।श्री हनुमते नमः।।

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