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जन्म-कुंडली में राजयोग

ज्योतिषीय दृष्टिकोण में व्यक्ति के जीवन के सभी पहलु उसकी कुंडली में स्थित ग्रह-स्थिति पर ही निर्भर करते हैं हम में से कुछ लोग संघर्ष भरा जीवन जीते हैं, कुछ सामान्य और कुछ को वैभव-शाली जीवन को प्राप्त करते हैं तथा एक राजा के सामान जीवन जीते हैं। राजयोग का मतलब वर्तमान समय के हिसाब से केवल राजा बनना ही नहीं है राजयोग का तात्पर्य है वैभवशाली जीवन जीने से है तो आइये जानते हैं हमारी कुंडली में कौन-कौन से ग्रह-योग हमें राजयोग प्रदान करते हैं -

हमारी जन्मकुंडली में दशम अर्थात दसवां भाव राज का भाव माना गया है तथा दशम भाव के स्वामी का सम्बन्ध जब त्रिकोण(1,5,9,) के स्वामी से होता है तो इसे राजयोग कहा जाता है इसके अलावा और भी कुछ विशेष स्थितियां राजयोग बनाती हैं पर यहाँ इस बात को ध्यान रखना भी आवश्यक है के राजयोग का नैसर्गिक कारक "शुक्र" किस स्थिति में है -

1. कुंडली में जब दशमेश और नवमेश का योग हो या दशमेश और नवमेश का रशिपरिवर्तन हो तो राजयोग बनता है।

2. जब दशमेश और लग्नेश का योग हो या दशमेश और लग्नेश का राशि परिवर्तन हो तो राजयोग बनता है।

3. जब दशमेश और पंचमेश का योग हो या दशमेश और पंचमेश का रशिपरिवर्तन हो तो राजयोग बनता है।

4. किसी भी केंद्र(1,4,7,10,) और त्रिकोण(1,5, 9) के स्वामियों का योग व रशिपरिवर्तन भी राजयोग बनाता है।

5. यदि शुक्र कुंडली के बारहवे भाव में बलि होकर स्थित हो तो वह भी राजयोग देता है।

6. केवल त्रिकोण (अर्थात पहला, पांचवा, नवा) के स्वामियों का रशिपरिवर्तन या साथ बैठना भी राज योग बनाता है।

7. बृहस्पति और चन्द्रमाँ के योग से बना "गजकेशरी" योग यदि त्रिकोण या दसवें, ग्यारहवे स्थान में बने तो राजयोग प्रदान करता है।

8. भाग्येश और शुक्र एक साथ उच्च राशि में होने से बना लक्ष्मी योग भी राजयोग देता है।

9. बृहस्पति यदि लग्न में स्व या उच्च राशि में हो तो राजयोग देता है।

10. यदि चन्द्रमाँ लग्न कुंडली और नवमांश कुंडली दोनों में उच्च राशि ( वृष ) में हो तो वह भी राजयोग देता है।

11. यदि शुक्र स्व या उच्च राशि में होकर केंद्र में बैठा हो तो इससे भी राजयोग बनता है

12. अगर शुक्र और चन्द्रमाँ का योग केंद्र त्रिकोण आदि शभ भावों में बने और पाप प्रभाव से मुक्त हो तब भी जीवन में अच्छी समृद्धि मिलती है

इस प्रकार कुछ विशेष ग्रह-योग व्यक्ति को राजयोग देकर उसे धन, संपत्ति,ऐश्वर्य,वैभव, उच्च-पद, प्रतिष्ठा, मान और सम्मान देकर एक विशेष व्यक्ति के रूप में विख्यात करते हैं। ज्योतिषीय नियमों के हमेशा वर्तमान परिवेश के साथ मिलकर अवश्य देखना होता है और आज के समय में राज-योग तातपर्य केवल राज करने से ना होकर जीवन में अच्छी समृद्धि और भौतिक सुविधाओं का होना होता है कुंडली में राजयोग की स्थिति यह निश्चित करती है के इस व्यक्ति को जीवन में अच्छी सुख समृद्धि की प्राप्ति होगी।

विशेष- शुक्र राजयोग का नैसर्गिक कारक है अतः राजयोग बनने पर यदि कुंडली में शुक्र कमजोर या पीड़ित स्थिति में हो तो राजयोग पूरी तरह फलीभूत नहीं होता। इसके अलावा भी राज योग की कोई स्थिति कुंडली में बनी हुई हो लेकिन बाकी सभी ग्रह कमजोर हों तो भी राज योग का पूरा परिणाम नहीं मिल पाता, कई बार ऐसा भी होता है के व्यक्ति की कुंडली में राजयोग तो है परन्तु जीवन के शुरूआती समय में कुंडली में चल रही ग्रहदशाएँ नकारात्मक होती हैं जिस कारण उस समय में तो जीवन में विशेष उन्नति नहीं हो पाती पर जब कुंडली की दशाएं सकारात्मक होती हैं उस समय कुंडली में बना राजयोग फलीभूत होता है और व्यक्ति का जीवन समृद्ध हो जाता है।

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