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क्या आपका बच्चा भी करता है ज्यादा गुस्सा ये हैं कारण और ज्योतिषीय उपाय

किसी भी बच्चे का स्वाभाव या व्यवहार उसके माता पिता और पारिवारिक सदस्यों के व्यवहार और आचरण से तो प्रभित होता ही है पर प्रत्येक बच्चे की अपनी एक नैसर्गित प्रकृति और स्वभाव होता है जो जन्मजात ही बच्चे में उपस्थित होता है और धीरे धीरे बच्चा अपने उसी नैसर्गिक स्वाभाव में ढलता चला जाता है जन्मकाल में बच्चे की जन्मकुंडली में जिस प्रकार की ग्रहस्थिति बनी होती है उसी प्रकार के स्वभाव में बच्चा ढलता जाता है


कुंडली के प्रथम भाव (लग्न भाव) को स्वाभाव या प्रकृति का भाव माना गया है तथा पंचम भाव बुद्धि स्थान होने से पंचम भाव भी प्रकृति को प्रभावित करता है पर विशेष रूप से मंगल को गुस्सा, जिद्दी स्वभाव, आक्रामकता, उठापटक का कारक ग्रह माना गया है तथा सूर्य को एकाधिकार का कारक माना गया है तो राहु को तामसिक प्रवृति का कारक माना गया है तो ये ग्रह तो यहाँ विशेष हैं ही पर बुध बुद्धि, बृहस्पति विवेक और चन्द्रमाँ मन का नियंत्रक ग्रह होने से मंगल राहु सूर्य के साथ इनके कुछ विशेष स्थिति में बने योग बच्चों में जिद्दी और आक्रामक प्रवृति तो जन्म देते हैं………

1. यदि बच्चे की कुंडली में मंगल और बुध एक साथ हों तो ऐसे में बच्चा बहुत जल्दी गुस्सा करने वाला और जिद्दी स्वभाव का होता है।

2. कुंडली में सूर्य और मंगल का योग भी बच्चे को क्रोधी और जिद्दी स्वाभाव बनाता है।

3. यदि बच्चे की कुंडली में मंगल और राहु एक साथ हों तो ऐसे में बच्चा बहुत आक्रामक स्वाभाव का होता है तथा छोटी छोटी बातों पर जल्दी ही गुस्सा करने लगता है और जिद्द पर अड़ने पर किसी की बात नहीं सुनता।

4. कुंडली में बना मंगल केतु का योग भी बच्चे को क्रोधी और जिद्दी स्वभाव बनाकर अपनी बात पर अड़े रहने की प्रवृति देता है।

5. यदि बच्चे की कुंडली में बृहस्पति और राहु एक साथ होने से गुरुचाण्डाल योग बना हो तो ऐसे में भी बच्चा नकारात्मक व्यवहार करने वाला होता है और बहुत बार अपशब्द भी बोलने लगता है।

6. कुंडली में चन्द्रमाँ और राहु का योग होने पर बच्चा इरिटेट बहुत जल्दी हो जाता है।

7. यदि कुंडली के प्रथम भाव या पंचम भाव में कोई दुर्योग बना हो जैसे गुरुचण्डाल योग, ग्रहण योग, अंगारक योग या मंगल राहु का योग आदि ऐसे में भी बच्चे की प्रकृति अधिक गुस्सा और जिद्दी स्वाभाव की होती है।

8. जिन बच्चों की कुंडली में लग्न में मंगल स्थित होता है वे भी जिद्दी स्वभाव और अपनी मनमानी करने वाले होते हैं।

9. बच्चे की कुंडली में लग्न में सूर्य का होना बच्चे को डोमिनेटिंग बनाता है।

10. यदि बच्चे की कुंडली में शनि मंगल का योग हो तो भी ऐसा बच्चा जिद्दी और उठा पटक करने वाला होता है।

11. बच्चे की कुंडली में लग्नेश ग्रह का राहु के साथ होना भी बच्चे को जिद्दी और मनमानी करने वाला बनता है।

ऊपर बताये गए ग्रहयोग वैसे तो बच्चों को जिद्दी स्वभव और गुस्सा करने वाला बनाते ही हैं पर यदि ये ग्रहयोग कुंडली के प्रथम भाव या पंचम भाव में बने हो तो अपना विशेष प्रभाव दिखाते हैं। .........ऐसी स्थिति हमें बहुत बार देखने को मिलती है के बच्चा समान्य से अधिक आक्रामक, जिद्दी और कहना ना मानने वाला है तो ऐसा वास्तव में होता क्यों है यह तो हम ज्योतिषीय दृष्टि से आपको यहाँ बता ही चुके हैं पर यह भी समझना बहुत आवश्यक है के कोई भी बच्चा जिद्दी या क्रोधी प्रवृति का क्यों न हों उसकी इस प्रवृति के मूल में तो ये ग्रहयोग ही छिपे होते हैं इसलिए सर्वप्रथम तो यह ध्यान रखें के इस प्रकार के बच्चे कभी भी क्रोध या विपरीत व्यवहार या डर से आपकी कोई बात नहीं समझेंगे इसलिए ऐसे बच्चों के साथ सौम्यता से ही व्यवहार करके आप उनके जिद्दी स्वभव को नियंत्रित कर सकते हैं बाकि ज्योतिषीय दृष्टि से हम भी यहाँ कुछ समान्य उपाय बता रहे हैं जो जिद्दी और क्रोधी स्वाभाव बच्चो की प्रवृति के परिवर्तन में सहायक होंगे -


1. यदि बच्च बहुत जिद्दी और क्रोधी स्वाभाव का हो तो प्रत्येक मंगलवार को बच्चे के हाथ से साबुत लाल मसूर का दान गरीब व्यक्ति को कराएं।

2. प्रतिदिन सफ़ेद चन्दन का तिलक बच्चे के मस्तक पर लगाएं।

3. प्रत्येक बुधवार को बूंदी के दो लड्डू बच्चे से मंदिर में गणेश जी को अर्पित कराएं।

4. बच्चे की और से माता पिता में से कोई भी ॐ श्राम श्रीम श्रोम सः चन्द्रमसे नमः का एक माला जाप प्रतिदिन करें।

5. बच्चे को गहरे लाल रंग के वस्त्रो का कम प्रयोग कराएं।

6. बच्चे से समय और प्रेमपूर्वक व्यवहार से बात करने का प्रयास करें।

।।श्री हनुमते नमः।।

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