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शारदीय नवरात्र 17 तारिख से आरम्भ - इस समय करें घट स्थापना -

नवरात्र के नो दिन देवी माँ की उपासना के लिए बहुत विशेष महत्व रखते हैं हिन्दू पंचांग के अनुसार वर्षभर में प्रमुख रूप से दो बार नवरात्र आते हैं चैत्र में और अश्विन मास में, अश्विन मास में शरद ऋतु होने के कारण ही अश्विन के नवरात्र को शारदीय नवरात्र भी कहा जाता है, अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शारदीय नवरात्र आरम्भ होते हैं और महानवमी के बाद विजय-दशमी के दिन नवरात्र का समापन या विसर्जन हो जाता है। इस बार 17 अक्टूबर से शारदीय नवरात्र शुरू हो रहे हैं और 17 से 25 अक्टूबर तक नवरात्र रहेंगे। इस बार शारदीय नवरात्र में कोई भी तिथि क्षय तो नहीं होगा नवरात्र की सभी तिथियां श्रेणीबद्ध रूप में ही रहेगी जिसमे 17 तारिख को प्रतिपदा 18 को द्वितिया 19 को तृतीया, 20 को चतुर्थी, 21 को पंचमी 22 को षष्टी 23 को सप्तमी 24 को दुर्गाष्टमी अष्टमी और 25 को महानवमी होगी लेकिन 26 अक्टूबर को दशमी तिथि सुबह 7 बजे ही समाप्त हो जाएगी जिससे दशहरा-पूजन नहीं हो पायेगा इसलिए 25 अक्टूबर को महानवमी के दिन ही विजय-दशमी पर्व और दशहरा पूजन किया जायेगा।

नवरात्री में प्रत्येक दिन देवी माँ के अलग अलग रूप की पूजा की जाती है - नवरात्री में देवी के नौ रूपों में से प्रथम दिन "माँ शैलपुत्री" की पूजा की जाती है दूसरे दिन "ब्रह्मचारिणी" स्वरुप की तीसरे दिन "चंद्रघंटा" चौथे दिन "कुष्मांडा" पांचवे दिन "स्कन्दमाता" छटे दिन "कात्यायनी" सातवे दिन "कालरात्रि" आठवे दिन "महागौरी" तथा नवरात्रि के नौवे दिन माँ "सिद्धिदात्री" की पूजा की जाती है।

श्लोक - प्रथमं शैलपुत्री च द्वितयं ब्रह्मचारिणी। तृतीयं चन्द्रघण्टेति कुष्मांडेति चतुर्थकं।।
पंचमं स्कन्दमातेति षष्टम कात्यायनीति च। सप्तमं कालरात्रीति महागौरी चाष्टमम ।।
नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा: प्रकीर्तितः।


जिस दिन नवरात्रि का आरम्भ होता है उस दिन देवी माँ एक विशेष वाहन पर सवार होकर धरती पर आती हैं और इस बार शनिवार से नवरात्रि का आगमन है जिस कारण इस बार देवी माँ का वाहन अश्व (घोडा) है इसलिए इस नवरात्री में देवी माँ का आगमन अश्व सवारी से होगा।

इस तरह करें नवरात्रि का आरम्भ -

नवरात्रि में देवी माँ की पूजा के लिए जहाँ कुछ लोग अपने घर में नौ दिनों के लिए देवी माँ की प्रतिमा स्थापित करते हैं तो अधिकांश लोग कलश या घट स्थापना भी करते हैं... तो इसके लिए नवरात्रि के पहले दिन यानि के प्रतिपदा को अपने घर के पूजास्थल के पास या अपने घर के ईशान कोण में एक लकड़ी की चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर उस पर देवी माँ की प्रतिमा को स्थापित करें और अगर आपको कलश स्थापना करनी है तो इसे भी आप अपने घर के पूजा स्थल के पास या फिर अपने घर के ईशानकोण में स्थापित करें और नवरात्रि के नौ दिन नियमित रूप से धूप दीप मिष्ठान फल फूल द्वारा माँ की आराधना करें।

घट स्थापना का शुभ समय - इस बार घट स्थापना के लिए श्रेष्ठ मुहूर्त 17 अक्टूबर को सुबह 8:45 से 11 बजे के बीच होगा इस समय स्थिर लग्न (वृश्चिक) और शुभ चौघड़िया मुहूर्त चल रहा होगा।

अब नवरात्रि के विषय में एक और ख़ास बात ये है के नवरात्रि के नौ दिनों का समय धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से तो बहुत श्रेष्ठ होता ही है और इस समय में की गयी साधना मंत्र जाप दान आदि बहुत श्रेष्ठ परिणाम देने वाले होते हैं लेकिन ज्योतिषीय दृष्टि से नवरात्रि का समय अपने आप में एक सिद्ध मुहूर्त का समय भी होता है जिस समय में किये गए सभी कार्यों में आपको अच्छे परिणाम मिलते हैं इसलिए इस समय को किसी भी नए कार्य की शुआत करने के लिए भी बहुत शुभ माना गया है इसमें आप नीव पूजन, गृहप्रवेश, ऑफिस ओपनिंग, बिजनेस स्टार्ट और वाहन खरीदने जैसे सभी कार्य किये जा सकते हैं।

इस बार नवरात्र की नौ तिथियां -

प्रतिपदा - 17 अक्टूबर

द्वितीय - 18 अक्टूबर

तृतीया - 19 अक्टूबर

चतुर्थी - 20 अक्टूबर

पंचमी - 21 अक्टूबर

षष्टी - 22 अक्टूबर

सप्तमी - 23अक्टूबर

अष्टमी - 24 अक्टूबर

नवमी - 25 अक्टूबर



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