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चंद्र रत्न मोती धारण करने के अद्बुध लाभ

ज्योतिष की रत्न शाखा में चन्द्रमाँ के लिए "मोती" को निश्चित किया गया है जिसे हम पर्ल नाम से भी जानते हैं मोती एक प्रकार से चन्द्रमाँ का ही प्रतिरूप होता है इसमें चन्द्रमाँ के गुण विद्यमान होते हैं, मोती स्वेत रंग की आभा से पूर्ण शीतल प्रभाव रखने वाला एक सौम्य प्रवर्ति का रत्न है रत्न है जिसे ज्योतिषीय दृष्टि में चन्द्रमाँ को बली या मजबूत करने के लिए धारण किया जाता है, सामान्यतः कुंडली में चन्द्रमाँ कमजोर या पीड़ित होने पर ज्योतिषी मोती धारण करने की सलाह देते हैं।

मोती धारण करने से व्यक्ति में सौम्यता व शीतलता का उदय होता है, मन एकाग्र होता है ओवर थिंकिंग, नेगेटिव थिंकिंग, मानसिक तनाव, एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी समस्याओं में मोती धारण करने से लाभ होता है इसके अलावा लंग्स से जुडी समस्या, अस्थमा, माइग्रेन, साइनस की समस्या, शीत रोग तथा मानसिक रोगों में भी मोती धारण करने से लाभ होता है तथा मानसिक अस्थिरता से व्यक्ति एकाग्रता की और बढ़ने लगता है स्थूल रूप में कहा जाये तो मोती धारण करने से पीड़ित या कमजोर चन्द्रमाँ के सभी दुष्प्रभावों में लाभ व सकारात्मक परिवर्तन होता है। ............ परंतु आब यहाँ सबसे विशेष बात यही है के प्रत्येक व्यक्ति को मोती धारण नहीं करना चाहिए मोती धारण करना सभी व्यक्तियों के लिए शुभ हो ऐसा बिलकुल भी आवश्यक नहीं है अधिकांश लोग की सोच होती है के मोती तो सौम्य प्रवर्ति का रत्न है और इसे धारण करने से तो मानसिक शांति मिलती है इसलिए हमें भी मोती धारण कर लेना चाहिए पर यहाँ यह बड़ी विशेष बात है के बहुतसी स्थितियों में मोती आपके लिए मारक रत्न का कार्य भी कर सकता है और मोती धारण करने पर बड़े स्वास्थ कष्ट, बीमारियां, दुर्घटनाएं और संघर्ष बढ़ सकता है इसलिए अपनी इच्छा से बिना किसी योग्य ज्योतिषी की सलाह के मोती नहीं धारण करना चाहिए, वास्तव में कुंडली में चन्द्रमाँ कमजोर होने पर मोती धारण की सलाह केवल उन्ही व्यक्तियों को दी जाती है जिनकी कुंडली में चन्द्रमाँ शुभ कारक ग्रह होता है, क्योंकि मोती धारण करने से कुंडली में चन्द्रमाँ की शक्ति बहुत बढ़ जाती है और ऐसे में यदि चन्द्रमाँ कुंडली का अशुभ फल देने वाला ग्रह हुआ तो मोती पहनना व्यक्ति के लिए बहुत हानिकारक सिद्ध होगा इसलिए किसी योग्य ज्योतिषी से अपनी कुंडली का विश्लेषण कराने के बाद की मोती धारण करना चाहिए और यदि चन्द्रमाँ आपकी कुंडली का शुभ कारक ग्रह है तो निःसंदेह मोती धारण से बहुत शुभ परिणाम प्राप्त होंगे। .......

लग्न अनुसार मोती धारण -

समान्यतः मेष, कर्क, वृश्चिक और मीन लग्न के जातकों के लिए मोती धारण शुभ है। इसके अलावा वृष, मिथुन, कन्या, तुला और मकर लग्न के लिए मध्यम है अतः इन लग्नो में भी योग्य ज्योतिषी से परामर्श के बाद मोती धारण किया जासकता है। परंतु सिंह, धनु और कुम्भ लग्न की कुंडली होने पर मोती कभी नहीं धारण करना चाहिए अन्यथा यह हानिकारक हो सकता है और इसके विपरीत परिणाम भी मिल सकते हैं।

व्यक्ति की आयु, भार तथा कुंडली में चन्द्रमाँ की स्थिति का पूरा विश्लेषण करने पर मोती के भार को निश्चित किया जाता है पर स्थूल रूप से देखें तो आयु 25 वर्ष से कम होने पर सवा पाँच रत्ती, आयु 25 से 50 वर्ष के मध्य में सवासात रत्ती तथा 50 से ऊपर सवा नौ रत्ती वजन का मोती धारण किया जाता है कुंडली में चन्द्रमाँ कितना कमजोर या पीड़ित स्थिति में है इससे भी मोती की क्वांटिटी पर प्रभाव पड़ता है।

मोती धारण विधि -

मोती को चाँदी की अंगूठी में बनवाकर सीधे हाथ की कनिष्ठा या अनामिका उंगली में धारण कर सकते हैं इसके अतिरिक्त सफ़ेद धागे या चांदी की चेन के साथ लॉकेट के रूप में गले में भी धारण कर सकते हैं मोती को सोमवार के दिन प्रातः काल सर्व प्रथम गाय के कच्चे दूध व गंगाजल से अभिषेक करके धुप दीप जलाकर चन्द्रमाँ के मन्त्र का तीन माला जाप करना चाहिए फिर पूर्व या उत्तर दिशा की और मुख करके मोती धारण कर लेना चाहिए। ......

मोती धारण मन्त्र - ॐ सोम सोमाय नमः

।।श्री हनुमते नमः।।

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