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कुंडली के दुःख भावों के शुभ परिणाम

कुंडली में छटे आठवे और भारहवे भाव को दुःख भाव कहा गया है जिसमे छटे भाव को शत्रु, रोग बीमारी, झगड़ा विवाद और कर्ज का कारक माना गया है... आठवे भाव को मृत्यु, दीर्घ रोग, दुर्घटना, शरीर कष्ट और बंधन का कारक माना गया है तो वहीँ बारहवे भाव को व्यय स्थान कहा गया है जो हमारे जीवन में व्यय नुकसान खर्च और विच्छेदन को नियंत्रित करता है तो इन नकारात्मक परिस्थितियों को हमारे जीवन में नियंत्रित या उत्पन्न करने के कारण ये तीनो भाव दुःख भाव कहलाते है जैसा के हम जानते ही हैं पर अब हम आपको इन दुःख भावों के कुछ विशेष और शुभ परिणाम के बारे बताते हैं

छटे भाव के शुभ परिणाम - कुंडली का छटा भाव प्रतिस्पर्धा का भाव भी है इसलिए अगर षष्टेश ग्रह छटे भाव में ही हो या छटे भाव में मंगल, शनि, राहु जैसे क्रोधात्मक ग्रह बैठे हों तो ऐसे में व्यक्ति की प्रतिस्पर्धात्मक शक्ति (कॉम्पटीटिव पावर) बहुत अच्छी और मजबूत होती है और ऐसा व्यक्ति प्रतिस्पार्धाओं में आगे रहने वाला होता है और ऐसे में व्यक्ति के विरोधी या शत्रु उस पर हावी नहीं हो पाते।..... इसके अलावा छटा भाव सेवा या सर्विस का कारक भी है इसलिए अगर कुंडली के छटे भाव में सूर्य बली (मजबूत) स्थिति में हो या बारहवे भाव में होकर छटे भाव पर सूर्य की दृष्टि हो तो ऐसे में सरकारी नौकरी की संभावनाएं बनती है और व्यक्ति सरकारी सेवाओं में आगे जा सकता है। अगर छटे भाव पर बृहस्पति की शुभ दृष्टि हो तो ये जॉब या सर्विस करने वाले लोगों के लिए एक शुभ और जॉब में सहायक योग होता है

आठवे भाव के शुभ परिणाम - दुःख भावों में भी कुंडली के आठवे भाव को सर्वाधिक कष्टकारी माना गया है क्योंकि ये मृत्यु भाव है पर कुंडली के आठवे भाव से जुड़े कुछ सकारात्मक पहलुओं को देखें तो कुंडली का आठवां भाव गूढ़ ज्ञान, रहस्मयी चीजों, गूढ़ रहस्मयी विद्याएं, अनुसंधान शोध और खोज का कारक माना गया है... इसलिए जिन लोगों की कुंडली में अष्टमेश ग्रह अष्टम भाव में ही बैठा हो, अष्टमेश की पंचम भाव पर दृष्टि या किसी भी प्रकार प्रभाव हो, अष्टमेश और पंचमेश का योग हो, बुध या बृहस्पति आठवे भाव में हों तो ऐसे में व्यक्ति का बौद्धिक स्तर बहुत गूढ़ होता है, ऐसा व्यक्ति हर एक बात को बहुत गहराई से सोचने और परखने वाला होता है और गूढ़ विद्याओं में रुचि रखने वाला होता है। ऐसे में व्यक्ति की समझ समान्य स्तर से बहुत ज्यादा गहरी और दूर दृष्टि वाली होती है और ऐसा व्यक्ति परदे के पीछे की बात को भी समझ लेने वाला होता है इसलिए ऐसा व्यक्ति गणनात्मक कार्यों विज्ञान और शोधपरक कार्यों में बहुत आगे जाने की क्षमता रखने वाला होता है

बारहवे भाव के शुभ परिणाम - कुंडली के बारहवे भाव का सम्बन्ध दूरस्थ बाहरी स्थानों, विदेश और लम्बी यात्राओं से है इसलिए अगर कुंडली के बारहवे भाव के स्वामी का दाशमेश या भाग्येश के साथ राशिपरिवर्तन हो तो ऐसे में व्यक्ति दूरस्थ स्थानों या विदेशों तक अपने कार्यों को पहुँचाने वाला होता है , अगर कुंडली के बारहवे भाव में चन्द्रमाँ बैठा हो लग्नेश द्वादशेश का राशिपरिवर्तन हो तो ऐसे में विदेश यात्राओं का सुख प्राप्त होता है। बारहवे भाव के स्वामी का दशम या नवम भाव में होना भी विदेशों से लाभ कराता है। कुंडली में बारहवे भाव में अगर सूर्य अच्छी स्थिति में हो तो सरकारी नौकरी के लिए एक सकारात्मक समभावना बनती है

तो हालाँकि कुंडली के छटे आठवे बारहवे भाव को दुःख भाव माना गया है पर ये तीनो भाव अपने में बहुत सी गहरी और सकारात्मक विशेषताएं भी रखते हैं

।। श्री हनुमते नमः।।

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