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श्रावण मास का महत्व

वैसे तो वर्ष भर के बारह माह ही अपने में कुछ न कुछ विशेषता रखते हैं परन्तु वर्ष भर में भी "श्रावण मास" आध्यात्मिक, धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक परम्पराओं की दृष्टि से अपना विशेष महत्व रखता है। श्रावण मास जहाँ भगवान शिव की उपासना के लिए श्रेष्ठ समय होता है वहीँ कांवड़ यात्रा की परम्परा धर्म के साथ-साथ सामाजिक एकता को भी दर्शाती है इसी माह में हरियाली तीज का पर्व नई ऋतु आगमन की सूचना देता है और रक्षाबंधन का
पवित्र पर्व पारिवारिक रिश्तों को मजबूत करने का कार्य करता है –

शिव उपासना के लिए खास है श्रावण मास -

श्रावण मास को भगवान शिव की उपासना के लिए श्रेष्ठ समय माना गया है इस समय में की गई शिवोपासना से विशेष शिवकृपा प्राप्त होती है। भगवान शिव परम सरल व शीघ्रता से प्रसन्न होने वाले देव हैं जो सम्पूर्ण जगत की मनोकामनाओं को पूरा करने वाले हैं परन्तु स्वयं के लिये उन्हें न तो ऐश्वर्यशाली स्थान की आवश्यकता है न ही विशेष पदार्थो की कंदमूल और जल से ही वे प्रसन्न हो जाते हैं बिल्व पत्र और जल मात्र अर्पण करने से प्रसन्न होकर कृपा प्रदान करते हैं।

शिवोपासना में शिवलिंग की पूजा और जलाभिषेक का बड़ा विशेष महत्व है वास्तव में भगवान शिव का लिंगस्वरूप तो उनके निराकार ब्रह्म रूप को दिखाता है जिसका रूप,रंग, मुद्रा हाथ पैर नहीं हैं अर्थात शिवलिंग भगवन शिव का निराकार प्रतीक है अतः श्रावण मास में शिवलिंग का जलाभिषेक व उपासना सभी प्रकार से जीवमात्र के लिए कल्याणकारी है क्योंकि सोमवार भगवान शिव को प्रिय है इसलिए श्रावण में भी सोमवार को शिवोपासना और शिवलिंग का अभिषेक विशेष फलदायी होता है। “श्रावण मास में पूरे माह का व्रत रखने का भी विधान है माह के प्रतिदिन व्रत रखकर पूर्णिमा को पारायण किया जाता है इससे भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।“

श्रावण में कांवड़ यात्रा का महत्व -

श्रावण मास आरम्भ होते ही शिव भक्त अपने कंधे पर कांवड़ धारण करके लम्बी पदयात्रा पर निकल जाते हैं और हरिद्वार आदि पावन तेीर्थ स्थलों से गंगाजल लाकर श्रावण मास की शिवरात्रि को शिवलिंग का अभिषेक करते हैं शिव भक्तो की मीलों लम्बी यह पद यात्रा वास्तव में भगवान शिव के प्रति उनके पूर्ण समर्पण को दिखाती है परन्तु इसमें केवल पदयात्रा का ही महत्व नहीं है भगवान की प्रसन्नता के पीछे मूल वस्तु हमारा उनके प्रति प्रेम और पूर्ण समर्पण ही तो है तो कांवड़ यात्रा में यह बात विशेष विचारणीय है सात्विक भावना और विचार रखें और संकल्प करना चाहिए के मैं क्रोध, अहंकार, असत्य से परे रहूँगा और प्रत्येक प्राणिमात्र में शिव रूप के दर्शन करूँगा, तो यदि ऐसी भावना के साथ कांवरिया गंगाजल लाकर भगवान शिव का अभिषेक करते हैं तो निश्चित ही भगवान आशुतोष उन पर सदैव अपनी कृपा बनाये रखते हैं।

कालसर्प योग की शांति के लिए विशेष है श्रावण -

ज्योतिषीय दृष्टि में भी श्रावण मास का बहुत गूढ़ महत्व होता है कालसर्प योग और कमजोर चन्द्रमाँ की शांति और उपाय के लिए यह बहुत विशेष समय होता है भगवान शिव की उपासना से कालसर्प योग की शांति होती है और चन्द्रमाँ मजबूत बनता है यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में कालसर्प योग हो या चन्द्रमाँ कमजोर हो उन्हें श्रावण मास में निम्न उपाय करना बहुत लाभकारी होता है -

1. ॐ नमः शिवाय का सामर्थ्यानुसार नित्य जाप करें।

2. जल में दूध, सफ़ेद चंदन और काले-सफ़ेद तिल मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक करें।

3. श्रावण के किसी एक सोमवार को रुद्राभिषेक करायें।

4. प्रत्येक सोमवार को खीर बनाकर शिवमंदिर में भोग लगाकर गरीबों में बाटें।

"इस बार श्रावण मास 17 जुलाई से 15 अगस्त पूर्णिमा के दिन तक वर्तमान रहेगा। और 30 जुलाई को शिवरात्रि का महापर्व मनाया जाएगा 3 अगस्त को हरियाली तीज का पर्व मनाया जाएगा 5 अगस्त को नाग-पंचमी और 15 अगस्त को रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा।

श्रावण आरम्भ होते ही कांवड़ यात्रा भी शुरू हो जायेगी जिसके लिए निम्न कांवड़ धारण मुहूर्त श्रेष्ठ होंगे।

कांवड़ धारण मुहूर्त - 18, 19, 22, 24, 25, 28 और 29 जुलाई

।। श्री हनुमते नमः।।

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