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निर्जला एकादशी पर 6 साल बाद बन रहा है ये महाशुभ संयोग

सनातन हिन्दू संस्कृति में एकादशी तिथि और एकादशी व्रत को सर्वाधिक महत्त्व रखने वाला माना गया है एकादशी तिथि का व्रत विशेष रूप से जगत पालनकर्ता भगवान् विष्णु के निमित्त किया जाता है और एकादशा व्रत को जीवन में सर्व समृद्धि देने वाला और सदगति प्रदान करने वाला माना गया है हिन्दू पंचांग के वर्ष भर में कुल 24 एकादशी पड़ती हैं पर "निर्जला एकादशी" को सभी एकादशियों में श्रेष्ठ माना गया है, हिन्दू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी "निर्जला एकादशी" कही जाती है और क्योंकि इस एकादशी के व्रत में जल का त्याग किया जाता है अर्थात व्रत के दिन जल ग्रहण नहीं किया जाता इसी लिए इसे निर्जला एकादशी कहा जाता है।

इस बार विशेष - इस बार निर्जला एकादशी 13 जून बृहस्पतिवार को है और ये ही इस बार की विशेषता है के निर्जला एकादशी और बृहस्पतिवार का संयोग बन रहा है जो एक बहुत दुर्लभ और शुभ संयोग है, असल में निर्जला एकदशी का व्रत भगवान् विष्णु जी के निमित्त किया जाता है और इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की उपासना की जाती है और सभी वारों में बृहस्पतिवार भी भगवान विष्णु को सबसे ज्यादा प्रिय है इसलिए बृहस्पतिवार को ही भगवान् विष्णु की पूजा के लिए सबसे ज्यादा शुभ माना गया है और इस बार निर्जला एकादशी बृहस्पतिवार को पड़ने से इस बार की एकादशी का महत्त्व कई गुना बढ़ गया है इसलिए इस बार निर्जला एकादशी का व्रत करना भगवान विष्णु की पूजा अर्चना, दान और तीर्थ स्थान आदि से असख्य गुना पुण्य शुभ फल की प्राप्ति होगी ... अब से पहले निर्जला एकादशी और बृहस्पतिवार का शुभ संयोग 6 साल पहले वर्ष 2013 में बना था।

निर्जला एकादशी का इतिहास और महत्त्व -

महाभारत काल में महर्षि वेदव्यास ने भीम को बताया था के तुम केवल ज्येष्ठ मास में पड़ने वाली "निर्जला एकादशी" का व्रत करो ये सभी एकादशियों में श्रेष्ठ है इस एक व्रत से ही तुन्हे वर्ष भर की सभी एकादशियों के व्रत का फल मिलेगा इस बात से भीम बड़ा प्रसन्न हुआ इसलिए निर्जला एकादशी को "भीम सैनी एकादशी" भी कहा जाता है और इसी लिए निर्जला एकादशी का व्रत करने से वर्ष भर में पड़ने वाली सभी एकादशियों के व्रत का पुण्य प्राप्त होता है। निर्जला एकादशी व्रत का केवल धार्मिक महत्त्व ही नहीं है बल्कि व्यावहारिक दृष्टि से भी देखें तो इस व्रत में पूरे दिन जल का त्याग किया जाता है जिससे हमें अपने जीवन मंय जल का महत्त्व समझ आता है के एक दिन भी जल के बिना रहना कितना कठिन है और इसीलिए ये व्रत हमें जल संरक्षण का सन्देश भी देता है इसके अलावा वैज्ञानिक दृष्टि से भी गर्मी के मौसम दिन भर जल के बिना रहना हमारे शरीर की सहनशक्ति को बढ़ाता है।

निर्जला एकादशी को क्या करें –

इस दिन प्रातः काल स्नान आदि से निवृत होकर मन में भगवान् विष्णु के निमित्त व्रत का संकल्प करें विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें या ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः का जाप करें और दिन भर हरी चिंतन करते हुए संध्याकाल में व्रत का पारायण करें ..... अगर आप निर्जला एकादशी को व्रत न भी कर पाएं को इस दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान आदि अवश्य करें इस दिन विशेष रूप से "जल का दान" करना सबसे श्रेष्ठ माना गया है इसके अलावा भी भोजन और अन्य खाद्य पदार्थों का दान भी कर सकते हैं.... निर्जला एकादशी को व्रत करने और दान आदि करने से निश्चित ही जीवन में सर्व समृद्धि अच्छे स्वास्थ वैभव और परिवार में शांति की प्राप्ति होती है।

।। श्री हनुमते नमः।।

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