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लता मंगेशकर जी की कुंडली का विश्लेषण

भारतीय संगीत गायन और म्यूजिक इंडस्ट्री में सर्वोच्च स्थान पर आसीन होने वाली स्वर कोकिला श्री लता मंगेशकर जी भारतीय हिंदी गायन में कोहिनूर के समान ही प्रकाशमान हैं जिनकी प्रतिभा और मधुर आवाज विश्वविख्यात है वैसे तो बहुत से गायक अच्छी प्रतिभा रखते हैं परंतु लता जी की अति मधुर आवाज और अपने गायन को इतने दीर्घ काल तक सर्व श्रेष्ठ स्थिति में रखना किसी दिव्य वरदान से कम नहीं है लता जी न केवल इन्डियन म्यूजिक इंडस्ट्री का कोहिनूर हैं बल्कि भारत के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से भी सम्मानित हैं और वास्तव में उन्होंने भरतीय संगीत में अपने अतुल्य गायन से जो स्वर्णिम इतिहास रचा है वह सदैव भारतीय संगीत के क्षेत्र में अमर रहेगा, तो आईये जानते हैं के लता जी की कुंडली में कौनसे ऐसे विशेष ग्रह योग हैं जो उन्हें गायन की प्रतिभा के श्रेष्ठ स्तर पर विराजमान करता है। ..........

श्री लता मंगेशकर जी की कुंडली वृष लग्न और कर्क राशि की है लग्न में बृहस्पति, तीसरे भाव में चन्द्रमाँ, शुक्र चातुर्थ भाव में, पंचम भाव में सूर्य बुध, मंगल केतु छटे भाव में शनि अष्टम में और राहु बारहवे भाव में है।
लता जी की कुंडली में लग्नेश शुक्र केंद्र में स्थित है तथा लग्न में बृहस्पति है ये दोनों ही स्थितियां फलित ज्योतिष में श्रेष्ठ मानी गयी हैं लग्न स्थित बृहस्पति को श्रेष्ठ फल देने वाला माना गया है लता जी की कुंडली में लग्न में बृहस्पति होना उन्हें विवेकशीलता और सौम्य प्रवर्ति देता है साथ ही पंचम भाव में बना बुधादित्य योग उन्हें बुद्धिमान और श्रेष्ठ निर्णय लेने में कुशल बनाता है लग्न में सौम्य और सत्व कारक ग्रह बृहस्पति का होना उन्हें सुन्दर और सौम्य हाव-भाव प्रदान करता है। बृहस्पति का केंद्र में बैठना व्यक्ति को दीर्घायु प्रदान करता है लता जी की कुंडली में बृहस्पति तो लग्न में स्थित है ही साथ ही लग्नेश शुक्र भी केंद्र में स्थित है इसके अलावा शनि का आठवे भाव में होना भी व्यक्ति को दीर्घायु देता है ये सभी योग लता जी की कुंडली में उपस्थित होना लता जी की कुंडली को एक विशेषता देते हैं।

अब विशेष रूप से बात करते हैं लता जी की अतुल्य गायन प्रतिभा की, ज्योतिषीय दृष्टि में जहां शुक्र की प्रबलता व्यक्ति में संगीत की कला का उदय करती है वहीँ बुध और द्वितीय भाव (वाणी और गले का स्थान) की प्रबलता गायन में पारंगत बनाती है शुक्र संगीत है तो बुध गले और गायन की क्षमता है

लता जी की कुंडली में शुक्र चतुर्थ भाव में दिक्बली होने से बलवान तो है ही साथ ही दशम भाव (करियर का भाव) पर शुक्र की सीधी दृष्टि पड़ रही है शुक्र का बली होना लता जी में संगीत की श्रेष्ठ प्रतिभा का उदय तो करता ही है दशम भाव पर शुक्र की दृष्टि संगीत को ही उनके करियर के रूप में स्थापित करती है पर लता जी की कुंडली की सबसे बड़ी विशेषता बुध की प्रबल स्थिति है लता जी की कुंडली में बुध पंचम भाव में उच्च राशि में होने से बहुत बलवान है यही वह विशेष ग्रह योग है जो श्री लता जी को अति मधुर आवाज का स्वामी बनाता है लता जी की कुंडली में गले और गायन बुध उच्च राशि में तो है ही साथ ही नवांश कुंडली में भी उच्च राशि में है जिससे बुध यहाँ अति बलवान और श्रेष्ठ स्थिति में आ गया है यहाँ एक और विशेष बात है बुध ही लता जी की की कुंडली में द्वितीय स्थान (गले का स्थान) का स्वामी है यह बड़ा दुर्लभ योग है तो लता जी की कुंडली में संगीत कारक शुक्र तो अच्छी स्थिति में है ही पर विशेष रूप से बुध का बलि होना लता जी को शहद की धार के समान मधुर और निरंतर बनी रहने वाली आवाज और गायन क्षमता प्रदान करता है। गायन की ऐसी अतुल्य प्रतिभा होना तो है ही पर फ़िल्मइंडस्ट्री में इतने लम्बे समय तक सर्वोच्च स्थिति में बने रहना भी एक दुर्लभ स्थिति ही है इसका कारण लता जी की की कुंडली में पंचम भाव का बली होना है शुक्र तो फ़िल्मइंडस्ट्री का कारक है ही पर पंचम भाव को फ़िल्मइंडस्ट्री का भाव माना गया है लता जी की कुंडली में शुक्र दिक्बली है ही पर विशेष रूप से पंचमेश बुध के पंचम भाव में होने से पंचम भाव बहुत बली हो गया है जिस कारण लता जी को भारतीय सिनेमा के क्षेत्र में निरंतर श्रेष्ठ सफलता मिलती रही है।

श्री लता जी की अतुल्य गायन प्रतिभा के अतिरिक्त जीवन में मिली साफलता और प्रसिद्धि को देखें तो

बृहस्पति का लग्न में बली होना व्यक्ति को सामाजिक प्रतिष्ठा और यश प्रदान करता है लता जी की कुंडली में प्रसिद्धि, प्रतिष्ठा और यश का कारक सूर्य त्रिकोण भाव में बहुत अच्छी स्थिति में तो है ही नवांश कुंडली में भी सूर्य उच्च राशि में है इसके अलावा सूर्य और बृहस्पति का त्रिकोण सम्बन्ध होना लाता जी को विश्वविख्यात और भारत रत्न जैसे श्रेष्ठ सम्मान की प्राप्ति कराता है। लाता जी की कुंडली में लग्नेश शुक्र और बृहस्पति का केंद्र में होना उन्हें राजयोग प्रदान करता है साथ ही चतुर्थेश सूर्य और पंचमेश बुध से बना केंद्र त्रिकोण का योग भी जीवन की पूर्ण समृद्धि प्रदान करता है दशमेश शनि की दशम भाव पर दृष्टि और धनेश बुध का उच्चस्थ होना करियर और आर्थिक पक्ष को मजबूत बनाता है इसके अलावा लता जी की कुंडली में तृतियेश चन्द्रमाँ तीसरे भाव में होना उनमे अपने काम को पूर्ण लगन और मेहनत से करने की क्षमता तो देता ही है और छटे भाव में मंगल और केतु के योग ने जीवन पर्यन्त लता जी को अपने करियर में गायन की प्रतिस्पर्धा में हमेशा आगे रखा, लता जी की कुंडली में सप्तम भाव का पापकर्तरी योग में होना तथा मंगल और केतु का योग विवाह ना होने का कारण बना पर पर लता जी की कुंडली में बने अन्य सभी ग्रहयोग वास्तव में बहुत श्रेष्ठ है विशेषकर बुध का बली होना उन्हें उन्हें सदी की श्रेष्ठ गायिका के रूप में स्थापित करता है साथ ही बृहस्पति का लग्न में होना और सूर्य बृहस्पति का त्रिकोण सम्बन्ध लता दी की प्रतिष्ठा को अमरत्व प्रदान करता है। ...........

।। श्री हनुमते नमः।।

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