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शनि जयंती वट सावित्री व्रत और सोमवती अमावस्या का अद्बुध शुभ संयोग

शनि देव को सृष्टि संचालन के दण्डाधिकारी देवता है इसलिए प्रत्येक जीव को उसके कर्मो के अनुसार फल देते हैं इसलिए शनि का महत्व ज्योतिष, धर्म और अधयात्म से लेकर आम जनता तक के लिए बहुत विशेष है पौराणिक ग्रंथों के अनुसार ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावश्या तिथि को "शनि जयंती" मनायी जाती है इस दिन शनि देव के निमित्त विशेष पूजा, मंत्र जाप, दान, हवन अनुष्ठान अच्छे संकल्प आदि विभिन्न प्रकार से शनि देव की उपासना की जाती है। इसके साथ ही ज्येष्ठ मास की अमावस्या को ही वट अमावस्या या वट सावित्री व्रत भी होता है इस दिन वट वृक्ष (बड़ का पेड़) का पूजन किया जाता है असल में इस दिन विवाहित स्त्रियां अपने पति की लम्बी आयु और अपने मांगल्य को बनाये रखने के लिए व्रत करती हैं और वट वृक्ष का पूजन कर सावित्री और सत्यवान की कथा सुनती हैं इस दिन व्रत करने पर स्त्रियों को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। हर वर्ष ज्येष्ठ अमावस्या को शनि जयंती और वट सावित्री व्रत तो होता ही है पर इस बार एक और शुभ योग बन रहा है इस बार अमावस्या सोमवार को होने से सोमवती अमावस्या भी बन रही है इसलिए इस बार ये महाशुभ संयोग बन रहा है जिसमे शनि जयंती वट सावित्री व्रत और सोमवती अमावस्या तीनो एक साथ पड़ रहे हैं इसलिए इस बार ज्येष्ठ अमावस्या का दिन बहुत अधिक शुभ होगा इसलिए इस दिन पूजा पाठ मंत्र जप व्रत और दान आदि करने पर अनंत गुना शुभ फल मिलेंगे। शनि जयंती का पर्व धार्मिक और आधयात्मिक दृष्टि से तो विशेष है ही परन्तु ज्योतिषीय दृष्टिकोण से भी इस दिन का बहुत बड़ा महत्व है।

इस बार ज्येष्ठ अमावस्या 3 जून सोमवार को है और इसी दिन श्री शनि जयंती वट सावित्री व्रत और सोमवती अमावस्या का शुभ संयोग बन रहा है

ज्योतिषीय दृष्टि में शनि को सर्वाधिक महत्वपूर्ण ग्रह माना गया है तथा व्यक्ति के कर्म और आजीविका का कारक शनि को माना गया है तथा शनि को दंडाधिकारी का पद दिया गया है…

जो लोग शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या महादशा में संघर्ष का सामना कर रहे हैं उनके लिए इस बार शनि जयंती पर की गयी शनि देव की उपासना के साथ साथ किये गए ज्योतिषीय उपाय भी अमृत तुल्य कार्य करेंगे तथा साढ़ेसाती और शनि की दशा के दुष्प्रभाव से बचने के लिए इस बार शनि जयंती पर श्री शनि देव की पूजा जाप दान और तेलाभिषेक सभी कष्टों और समस्याओं को हरकर सुख शांति प्रदान करेंगे –

शनि जयंती पर इस प्रकार करें शनि देव की पूजा तथा साढ़ेसाती और शनि की दशा के लिए कुछ विशेष उपाय -

1. प्रातःकाल शनि मंदिर जाकर शनि देव का सरसों के तेल से अभिषेक करें।

2. मंदिर में लगे पीपल के वृक्ष में जल अर्पित करें।

3. ॐ शम शनैश्चराय नमः का यथा-शक्ति जाप करें।

4. शनि देव के इन दस नामों का पाठ करें - ॐ कोणस्थाय नमः, पिंगलाय नमः, बभ्रुवे नमः, कृष्णाय नमः, रौद्रन्तकाय नमः, यमाय नमः, सौर्याय नमः, शनैश्चराय नमः, मन्दाय नमः, पिप्पलाश्रयाय नमः।

5. गरीब व्यक्तियों को भोजन कराएं।

6. वृद्धाश्रम व कुष्ठाश्रम में भोजन कराएं।

7. काले गुलाबजामुन शनिदेव को अर्पित करें।

8. उड़द की दाल की खिचड़ी का प्रसाद वितरित करें।

9. तकनीकी कार्य, मशीनों और गाड़ियों के कार्य तथा लोहे स्टील से जुड़े कार्य करने वाले लोगो को शनि जयंती पर शनि देव को काले वस्त्र अर्पित करना विशेष शुभ फल देने वाला होगा।

।। श्री हनुमते नमः।।

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