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नीच राशि में हो बृहस्पति तो होती हैं ये समस्याएं

बृहस्पति जन्मकुंडली में बली और मजबूत होने पर जहाँ व्यक्ति बहुत परिपक्व स्वाभाव, ज्ञानवान विवेक शील और प्रतिभावान होता है तो वही यदि बृहस्पति अपनी नीच राशि में हो तो ऐसे में नीचस्थ बृहस्पति के कारण जीवन में बहुत सी समस्याएं भी उत्पन्न होती हैं, नीच राशि किसी भी ग्रह की वह स्थिति होती है जहाँ वह ग्रह बहुत कमजोर स्थिति में होता है बृहस्पति के लिए "मकर राशि" को नीच राशि माना गया है इसलिए यदि व्यक्ति की कुंडली में मकर राशि अर्थात अपनी नीच राशि में स्थित हो ऐसे कुछ विशेष समस्याएं उत्पन्न होती हैं . . .

यदि कुंडली में बृहस्पति नीच राशि में हो तो ऐसे में व्यक्ति के शिक्षा पक्ष में बहुत बाधाएं आती हैं या उतार चढ़ाव के साथ शिक्षा पूरी होती है, ऐसे व्यक्ति के स्वभाव में अच्छी परिपक्वता नहीं आ पाती और विवेक शक्ति क्षीण होती है, बृहस्पति को प्रबंधन का ग्रह भी माना गया है इसलिए कुंडली में बृहस्पति नीच राशि में होने पर व्यक्ति में मैनेजमेंट पावर बहुत कमजोर होती है, बृहस्पति नीच राशि में होने पर एक समस्या ये भी होती है के व्यक्ति यदि कोई शुभ कार्य या धार्मिक कार्य करना चाहे तो उसमे बहुत बाधाएं आती हैं, कुंडली में नीचस्थ बृहस्पति के कारण व्यक्ति को अच्छे और ज्ञानवान लोगो की संगती नहीं मिल पाती और ऐसे में जीवन में अच्छे गुरु का भी अभाव रहता है, बृहस्पति को संतान-सुख का ग्रह माना गया है इसलिए कुंडली में बृहस्पति नीच राशि में होने पर संतान प्राप्ति में बाधाओं की संभावना भी बनती है और संतान प्राप्ति के बाद संतान सुख में अभाव या संतान के साथ वैचारिक तालमेल न बैठ पाने की समस्या भी होती है, इन सबके अलावा स्वास्थ की दृष्टि से देखें तो भी कुंडली में बृहस्पति यदि नीच राशि में हो तो ऐसे में व्यक्ति को लीवर से सम्बंधित समस्याएं अक्सर लगी रहती हैं इसके अलावा पीलिया, फैट से जुडी समस्या और श्रवण क्षमता की समस्या भी ऐसे में होती है, बृहस्पति यदि अपनी नीच राशि मकर में हो तो ऐसे में कुंडली में बृहस्पति की दशा आने पर भी जीवन में संघर्ष बढ़ता है।

तो यदि कुंडली में बृहस्पति के नीच राशि में होने के कारण जीवन ये समस्याएं उत्पन्न हो रही हों तो ये उपाय आपके लिए लाभदायक होंगे -

1. ॐ बृम बृहस्पते नमः का एक माला रोज जाप करें।

2. प्रत्येक बृहस्पतिवार को भीगी हुई चना दाल और गुड़ गाय को खिलाएं।

3. बृहस्पतिवार को किसी कर्मकाण्डी ब्राह्मण को भोजन कराएं।

4. ज्योतिषीय सलाह के बाद सुनैहला या पुखराज भी पहन सकते हैं।

।। श्री हनुमते नमः।।

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