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कुंडली में शनि मंगल का योग करियर के लिए होता है बाधक करने चाहिए ये उपाय

शनि और मंगल के द्वारा हमारे जीवन के बहुत विशेष घटक नियंत्रित होते हैं इसलिए इन दोनों का अलग अलग तो बड़ा विशेष महत्व है पर फलित ज्योतिष की दृष्टि से शनि और मंगल का योग जीवन में संघर्ष बढ़ाने वाला योग माना गया है जो कुछ विशेष समस्याएं उत्पन्न करता है पर यहाँ हम शनि मंगल के योग से व्यक्ति के करियर पर पड़ने वाले प्रभाव पर विशेष चर्चा कर रहे हैं...

ज्योतिषीय दृष्टि से वैसे तो शनि और मंगल दोनों को ही उग्र ग्रह के रूप में माना गया है पर इसमें भी मंगल अग्नि तत्व और अहम का कारक होने से अधीक उग्र प्रकृति है इसलिए शनि और मंगल के योग में शनि मंगल से पीड़ित होता है जिससे व्यक्ति के जीवन में शनि द्वारा नियंत्रित कारक तत्वों में कमी या बाधाएं उत्पन्न होती हैं गूढ़ नाड़ी ज्योतिष में शनि को आजीविका का नैसर्गिक कारक माना गया है जिस कारण हमारे करियर की स्थिति को नियंत्रित करने में हमारी कुंडली में स्थित शनि का बहुत विशेष महत्व होत है और शनि की बली या कमजोर स्थिति का करियर की सफलता पर पूरा प्रभाव पड़ता है…………….यदि कुण्डली में शनि मंगल का योग हो अर्थात शनि और मंगल एक साथ स्थित हों तो ऐसे में व्यक्ति की आजीविका बाधित रहती है कुंडली में शनि मंगल का योग होने पर अधिकांशतः देखा गया है के जातक जिस दिशा में करियर बनाना चाहता है बाधाओं के कारण उसे वह दिशा छोड़कर कोई दूसरा फील्ड चुनना पड़ता है अर्थात शनि मंगल के योग से करियर की दिशा में व्यक्ति के प्रथम प्रयास सफल नहीं हो पाते करियर ब्रेक होता है और विवस्तावश उसे कोई नयी दिशा में दुबारा से प्रयास शुरू करने पड़ते हैं…………..कुण्डली में शनि मंगल का योग होने पर व्यक्ति को अधिक महनत करने पर भी करियर में अपेक्षित परिणाम और उन्नति नहीं मिल पाती तथा करियर की स्थिति अस्थिर सी बनी रहती है अर्थात ऐसे मंत करियर एक सीधी रेखा में नहीं चलता करियर का ग्राफ हमेशा ऊपर नीचे होता रहता है, शनि मंगल का योग होने पर बार बार जॉब छूटने की स्थिति भी उत्पन्न होती है तो कुल मिलाकर कुंडली में शनि मंगल एक साथ होने पर व्यक्ति का करियर संघर्षपूर्ण तो बनता ही है और अधिक पुरुषार्थ के बाद ही सफलता मिलती है यहाँ एक बहुत गूढ़ बात ये भी है के शनि आजीविका है और मंगल पुरुषार्थ और मेहनत है तो शनि मंगल का योग एक प्रकार से आजीविका और पुरुषार्थ का योग भी है तो इसका यह अर्थ निकलता है के कुंडली में शनि मंगल का योग होने पर बहुत अधिक पुरुषार्थ और परिश्रम करने पर ही व्यक्ति का करियर स्थिर हो पायेगा

फलित ज्योतिष की दृष्टि से शनि मंगल का योग हमारी आजीविका या करियर के लिए बाधक तो माना ही गया है परंतु अब यहाँ एक बड़ी विशेष बात यह भी है के सभी व्यक्तियों को शनि मंगल का योग एक समान फल दे ऐसा आवश्यक नहीं है शनि मंगल के योग में मंगल की डिग्री यदि शनि से ज्यादा हैं तो यह अधिक समस्याकारक होता है शनि मंगल का योग दुःख भाव (छठा, आठवाँ, बारहवां) में होना शुभ भावों में होने की अपेक्षा अधिक समस्या देता है इसके अलावा यदि कुंडली में बने शनि मंगल के योग पर बृहस्पति की शुभ दृष्टि हो तो अधिक समस्याएं नहीं होती या करियर में प्रारम्भिक संघर्ष के बाद सफलता मिल जाती है अर्थात शनि मंगल के योग पर बृहस्पति की दृष्टि के कारण जातक को अपने कैरियर की समस्याओं का समाधान मिल जाता है बृहस्पति की दृष्टि किसी भी समस्या को क्योरेबल अर्थात समाधान करने योग्य बनाती है

तो यहाँ हमने जाना के कुंडली में बना शनि मंगल का योग व्यक्ति के कैरियर में बाधक तो बनता ही है और संघर्ष को बढ़ाता है तो यदि किसी भी व्यक्ति की कुंडली में यह योग होने से करियर में अधिक संघर्ष उत्पन्न हो रहा हो तो निम्नलिखित ज्योतिषीय उपाय उसमे अवश्य सहायक होंगे और करियर का संघर्ष कम होगा -

1. ॐ शम शनैश्चराय नमः का जाप करें (एक माला रोज)
2. प्रत्येक शनिवार को पीपल पर सासों के तेल का दिया जलाएं।
3. प्रत्येक मंगलवार को लाल मसूर गरीब व्यक्ति को दान दें।
4. शनिवार संध्याकाल सरसों के तेल का पराठाँ कुत्ते को खिलाएं।
5. हनुमान चालीसा का प्रतिदिन पाठ करें।

।। श्री हनुमते नमः।।

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