Article of the Month - Astroindusoot

Astro Articles

कुण्डली में गृह सम्पत्ति के ग्रहयोग

रहने योग्य घर मनुष्य जीवन की एक मूल आवश्यकता है जिसके बिना जीवन संचालन बड़ा कठिन होता है अपने एक अच्छे घर की इच्छा तो हर किसी व्यक्ति के मन में होती ही है परंतु सब व्यक्तियों को अपने घर या मकान का सुख समान रूप से नहीं मिल पाता कुछ लोग जहाँ अपनी पैतृक संपत्ति के रूप में घर की प्राप्ति होती है तो कुछ लोगों को अपने घर की प्राप्ति के लिए बहुत संघर्ष और विलम्ब का सामना करना पड़ता है वहीँ बहुत से लोगो को जीवन भर संघर्ष और प्रयास करने पर भी अपने घर का सुख नहीं मिल पाता, वास्तव में अपने मकान या घर का सुख हमारी जन्मकुंडली की ग्रहस्थिति पर ही निर्भर करता तो आईये देखते हैं कौनसे ग्रह योग व्यक्ति को अपने घर का सुख प्रदान करते हैं और किन गृहस्थितियों में व्यक्ति को अपने घर का सुख मिलने में बाधाओं का सामना करना पड़ता है।

"हमारी कुंडली में चतुर्थ भाव को भूमि, जायदात, सम्पत्ति, मकान और घर के सुख का कारक माना गया है इसके अलावा शुक्र को सम्पत्ति, मकान, घर का सुख और भौतिक संसाधनों का कारक माना गया है अतः मुख्य रूप से कुंडली के चतुर्थ भाव, चतुर्थेश और शुक्र की स्थिति व्यक्ति के जीवन में अपने घर या गृह संपत्ति के सुख के स्तर को दर्शाती है, चतुर्थ भाव, चतुर्थेश और शुक्र के अच्छी स्थिति में होने पर व्यक्ति को अपनी गृह संपत्ति का अच्छा सुख मिलता है और चतुर्थ भाव व शुक्र के पीड़ित या कमजोर होने पर व्यक्ति को अपनी गृह संपत्ति की प्राप्ति के बहुत परिश्रम और संघर्ष करना पड़ता है"

अच्छी गृह संपत्ति के योग -

1. यदि कुंडली में चतुर्थेश चतुर्थ भाव में ही स्थित हो या चतुर्थेश (चौथे भाव का स्वामी) की चतुर्थ भाव पर दृष्टि पड़ रही हो तो व्यक्ति को अपने घर और अच्छे सुख की प्राप्ति होती है।

2. यदि कुंडली में चतुर्थेश स्व या उच्च राशि में शुभ भाव में हो तो व्यक्ति को अच्छी गृह संपत्ति की प्राप्ति होती है।

3. चतुर्थेश मित्र राशि में होकर भी यदि केंद्र (1,4,7,10 भाव) या त्रिकोण (1,5,9 भाव) में हो तो भी व्यक्ति को अपने घर का सुख मिलता है।

4. शुक्र यदि कुंडली में स्व या उच्च राशि (वृष, तुला, मीन) में शुभ भाव में स्थित हो तो व्यक्ति को उच्च स्तर की गृह संपत्ति की प्राप्ति होती है।

5. शुक्र का केंद्र और त्रिकोण में बलि होकर बैठना भी अपने घर का सुख देता है।

6. शुक्र यदि कुंडली बारहवे भाव में हो और पाप ग्रहों से मुक्त हो तो भी व्यक्ति अच्छी गृह संपत्ति प्राप्त करता है।

7. चतुर्थेश का यदि लग्नेश, पंचमेश, नवमेश, दशमेश, या लाभेश के साथ राशि परिवर्तन हो रहा हो तो भी अच्छी गृह संपत्ति का योग बनता है।

गृह संपत्ति सुख में बाधा के योग -

1. यदि कुण्डली में चतुर्थेश पाप भाव (6,8,12 भाव) में हो तो ऐसे में व्यक्ति को अपनी गृह संपत्ति या घर की प्राप्ति में बहुत बाधाएं और उतार चढाव का सामना करना पड़ता है।

2. चतुर्थेश यदि अपनी नीच राशि में हो तो भी व्यक्ति को अपने घर की प्राप्ति या सुख में संघर्ष का सामना करना पड़ता है।

3. यदि चतुर्थ भाव में कोई पाप योग (ग्रहण योग, गुरुचांडाल योग, अंगारक योग आदि) बन रहा हो तो ऐसे में व्यक्ति को अपने घर का सुख नहीं मिल पाता या बहुत संघर्ष के बाद ही व्यक्ति अपनी गृह संपत्ति अर्जित कर पाता है।

4. चतुर्थ भाव में पाप ग्रहों का नीच राशि में बैठना भी व्यक्ति को अपने घर या मकान का सुख नहीं मिलने देता।

5. यदि कुंडली में शुक्र नीच राशि (कन्या) में हो, अष्टम भाव में हो या पाप ग्रहो से अति पीड़ित हो तो भी व्यक्ति को अपने घर के सुख में बहुत बाधाये आती हैं।

विशेष - शुक्र को ऐश्वर्य और वैभव का कारक है अतः यदि कुंडली में शुक्र बहुत बलि हो तो व्यक्ति को उच्चस्तरीय गृह संपत्ति का सुख मिलता है और ऐसा व्यक्ति अच्छी संपत्ति और वैभव को प्राप्त करता है। यदि कुंडली में चतुर्थ भाव तो अच्छा हो पर शुक्र कमजोर या पीड़ित हो तो ऐसे में व्यक्ति को घर की प्राप्ति तो हो जाती है परंतु जीवन में वैभव नहीं आ पाता, गृह संपत्ति या अपने घर के सुख को लेकर अति संघर्ष या सुख न मिल पाने की स्थिति तभी आती है जब कुंडली में चतुर्थ भाव, चतुर्थेश और शुक्र सभी घटक कमजोर हों दोनों में से एक घटक अच्छी स्थिति में हो और दूसरा कमजोर हो तो भी व्यक्ति अपने प्रयासों से अपने घर के सुख को प्राप्त कर लेता है।

जिस समय कुंडली की दशाएं और वर्तमान गोचरव ग्रह दोनों ही शुभ होते हैं उस समय में अपने घर बनाने या लेने के योग बनते हैं इसमें विशेष रूप से चतुर्थेश ग्रह चौथे भाव में बैठे ग्रह और कुंडली के शुभ फलकारक ग्रहों की दशाएं अपने घर का सुख देने में बहुत सहायक होती हैं।

उपाय - यदि अपने घर की प्राप्ति में बहुत समस्यें हो या प्रयास करने पर भी गृह संपत्ति या घर का सुख न हो तो निम्न उपाय श्रद्धा पूर्वक करें -

1. अपनी कुंडली के चतुर्थेश ग्रह के मन्त्र का नियमित जाप करें।

2. ॐ शुम शुक्राय नमः का जाप करें (एक माला रोज )

3. श्री सूक्त का रोज पाठ करें।

4. शुक्रवार को खीर दान करें।

5. किसी योग्य ज्योतिषी की सलाह के बाद अगर आपके लिए ओपल सूटेबल हो तो ओपल भी पहन सकते हैं

।।श्री हनुमते नमः।।

अगर आप अपने जीवन से जुडी किसी भी समस्या किसी भी प्रश्न जैसे – हैल्थ, एज्युकेशन, करियर, जॉब मैरिज, बिजनेस आदि का सटीक ज्योतिषीय विश्लेषण और समाधान लेना चाहते हैं तो हमारी वैबसाईट पर Online Consultation के ऑप्शन से ऑनलाइन कंसल्टेशन लेकर अपनी समस्या और प्रश्नो का घर बैठे समाधान पा सकते हैं अभी प्लेस करें अपना आर्डर कंसल्ट करें ऑनलाइन Customer Care & WhatsApp - 9068311666

ASTRO ARTICLES