Article of the Month - Astroindusoot

Astro Articles

कुंडली में भाग्य स्थान का विशेष महत्त्व

जीवन में सफलता, असफलता और संघर्ष की स्थिति समान्य रूप से तो हम सभी के साथ होती है पर कुछ लोगों को अपने जीवन में जल्दी सफलता और स्थिरता मिल जाती हैं तो बहुतसे लोग ऐसे भी होते हैं जिनका भाग्योदय सही तरह से हो ही नहीं पाता या भाग्य में हमेशा ही संघर्ष या अड़चने बनी रहती हैं और जीवन की उन्नति नहीं हो पाती.... ज्योतिषीय नजरिये से वैसे तो व्यक्ति के जीवन में संघर्ष के बहुत से कारण हो सकते हैं परन्तु कुंडली का भाग्य स्थान (नौवा भाव) व्यक्ति के पूरे भाग्य को नियंत्रित करता है इसलिए जीवन की सफलता या संघर्ष को निश्चित करने में कुंडली के भाग्यस्थान का सबसे ज्यादा महत्त्व होता है अगर कुंडली में भाग्य स्थान और भाग्येश अच्छी स्थिति में हों तो जीवन में अच्छी सफलता मिलती है और भाग्य स्थान और भाग्येश कमजोर होने पर जीवन में संघर्ष की स्थिति बनी रहती है... आईये जानते हैं कुछ ख़ास योग -

1. यदि भाग्येश भाग्य स्थान में ही स्थित हो या भाग्येश की भाग्य स्थान पर दृष्टि हो तो जीवन में अच्छी सफलता देता है और जल्दी ही व्यक्ति का भाग्योदय हो जाता है।

2. कुंडली में भाग्येश यदि स्व उच्च राशि में होकर शुभ स्थान में हो तो अच्छी सफलता देता है तथा समय पर व्यक्ति का भाग्योदय हो जाता है।

3. भाग्येश का केंद्र त्रिकोण (1,4,7,10,5,9 भाव) में होना व्यक्ति को अच्छा भाग्य देता है तथा जीवन में किये गए प्रयास सफल रहते हैं और अच्छी सफलता मिलती है l

4. भाग्य स्थान में शुभ ग्रह बैठे हों तो ये भी व्यक्ति के भाग्य को मजबूत करता है।

5. अगर भाग्येश ग्रह का लग्नेश पंचमेश या किसी भी केंद्र के स्वामी से राशिपरिवर्तन हो रहा हो तो ऐसे में भी व्यक्ति का अच्छा भाग्योदय होता है और जीवन में सफलता मिलती है।

6. अगर कुंडली के भाग्य स्थान (नौवा भाव) में कोई पाप योग (जैसे गुरुचण्डाल योग, अंगारक योग, विष योग आदि) बना हुआ हो तो ऐसे में व्यक्ति का भाग्योदय होनेमे बहुत अड़चने आती हैं और संघर्ष के बाद ही व्यक्ति को सफलता मिलती है।

7. भाग्य स्थान में कोई ग्रह नीच राशि में बैठा हो तो ऐसे में भी भाग्योदय में बहुत अड़चने और संघर्ष का सामना होता है।

8. अगर भाग्य स्थान पापकर्तरी योग में हो तो भी जीवन में संघर्ष बना रहता है।

9. अगर कुंडली का भाग्येश ग्रह (भाग्य स्थान का स्वामी) अपनी नीच राशि में हो, दुःख भावों में बैठा हो या किसी भी तरह से कमजोर हो तब भी व्यक्ति के भाग्य में हमेशा संघर्ष बना रहता है।

तो यहाँ ये बात तो स्पष्ट हो ही गयी है के अगर कुंडली का बहगय स्थान मजबूत है तो जीवन में जल्दी सफलता और स्थिरता मिल जाती है और भाग्य स्थान कमजोर होने पर भाग्योदय में भी देर होती है और हर काम में अड़चने भी आती हैं जिससे जीवन में संघर्ष बढ़ता है पर अगर किसी भी व्यक्ति का भाग्य स्थान या भाग्येश ग्रह कमजोर है तो ऐसा नहीं है के इसे संतुलित नहीं किया जा सकता अगर आप कुछ ज्योतिषीय उपाय करें तो अपने कमजोर भाग्य स्थान को संतुलित करते एक अच्छे स्तर तक ला सकते हैंऔर इसके लिए मुख्य रूप से दो उपाय हैं - एक तो अपने भाग्येश ग्रह के मंत्र का नियमित रूप से जाप करें इसके अलावा भाग्येश ग्रह रत्न धारण करें इससे भी आपके भाग्य की अड़चने दूर होती हैं और भाग्य मजबूत बनता है और भाग्य के स्वामी ग्रह का रत्न सभी व्यक्ति धारण कर सकते हैं ये सभी के लिए सूटेबल होता है। ( अपना भाग्य रत्न पैंडेंट आप हमारी वैबसाइट से भी ऑनलाइन मंगवा सकते हैं For more information call - 9068311666)

बारह लग्न और भाग्येश ग्रह (भाग्य स्वामी) -

मेष लग्न - बृहस्पति -
वृष लग्न - शनि
मिथुन लग्न - शनि
कर्क लग्न - बृहस्पति
सिंह लग्न - मंगल
कन्या लग्न - शुक्र
तुला लग्न बुध
वृश्चिक लग्न - चन्द्रमाँ
धनु लग्न - सूर्य
मकर लग्न - बुध
कुम्भ लग्न - शुक्र
मीन लग्न - मंगल

।। श्री हनुमते नमः।।

अगर आप अपने जीवन से जुडी किसी भी समस्या किसी भी प्रश्न जैसे – हैल्थ, एज्युकेशन, करियर, जॉब मैरिज, बिजनेस आदि का सटीक ज्योतिषीय विश्लेषण और समाधान लेना चाहते हैं तो हमारी वैबसाईट पर Online Consultation के ऑप्शन से ऑनलाइन कंसल्टेशन लेकर अपनी समस्या और प्रश्नो का घर बैठे समाधान पा सकते हैं अभी प्लेस करें अपना आर्डर कंसल्ट करें ऑनलाइन Customer Care & WhatsApp - 9068311666

ASTRO ARTICLES