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कुंडली में बुध के साथ अन्य ग्रहों का योग और फल

आपकी कुंडली में किस ग्रह के साथ है बुध और जानिए इसके परिणाम -

बुध + सूर्य - कुंडली में बुध और सूर्य का योग अर्थात एक साथ होना बहुत शुभ होता है इसे बुधादित्य योग भी कहते हैं बुध और सूर्य का योग शुभ स्थिति में होने पर व्यक्ति बहुत बुद्धिमान, तर्ककुशल और दूर की सोच रखने वाला होता है, ऐसा व्यक्ति बुद्धिपरक और गणनात्मक विषयो में हमेशा आगे रहता है, ऐसे व्यक्ति की वाक-शक्ति भी बहुत अच्छी होती है और अन्य लोग ऐसे व्यक्ति से जल्दी ही प्रभावित हो जाते हैं।

बुध +चन्द्रमाँ - बुध और चन्द्रमाँ का योग अच्छा नहीं माना गया है क्योंकि बुध बुद्धि है और चन्द्रमाँ को मूवमेंट अर्थात चलायमानता का कारक माना गया है अतः कुंडली में बुध और चन्द्रमाँ का योग बनने पर व्यक्ति की बुद्धि अस्थिर रहती है, ऐसे व्यक्ति हमेशा कंफ्यूज रहता है और ऐसे व्यक्ति को निर्णय लेने में बहुत समस्याएं आती हैं।

बुध + मंगल - कुंडली में बुध और मंगल का योग होने पर व्यक्ति क्रोधी, कुटिल प्रकृति और जिद्दी स्वाभाव का होता है और अपनी बात को ही प्राथमिकता देता है इसलिए बुध मंगल का योग अच्छा नहीं माना गया है ऐसे में व्यक्ति आवेश में आकर अधिकतर गलत निर्णय कर बैठता है तथा अपने स्वाभाव के कारण विवादों में भी उलझ जाता है।

बुध + बृहस्पति - बुध और बृहस्पति का योग बहुत शुभ और अच्छे परिणाम देता है बुध बुद्धि है और बृहस्पति ज्ञान है अतः इस योग में व्यक्ति बहुत बुद्धिमान, विवेकशील, और गूढ़ ज्ञान रखने वाला परिपक्व स्वभाव का होता है, शिक्षा और बौद्धिक कार्यों में अग्रणी रहता है, कैचिंग पवार बहुत अच्छी होती है तथा अपने ज्ञान से यश प्राप्त करता है।

बुध + शुक्र - बुध और शुक्र मित्र है अतः यह अच्छा योग शुभ होता है कुंडली में बुध और शुक्र का योग होने पर व्यक्ति कलात्मक और रचनात्मक कार्यों में रुचि रखने वाला होता है उसमे क्रिएटिविटी की अच्छी प्रतिभा होती है और रचनात्मक कार्यों में सफलता पाता है।

बुध + शनि - कुंडली में बुध और शनि का योग व्यक्ति को गहन अध्ययन की प्रवृति देता है व्यक्ति गूढ़ और गहरी सोच रखने वाला होता है, प्राचीन चीजो और गूढ़ ज्ञान में व्यक्ति की रुचि होती है तथा व्यक्ति बुद्धि-परक और गणनाओं से जुड़े कार्यों को अपनी आजीविका बनाता है।

बुध + राहु - बुध और राहु आपस में मित्र हैं अतः यह योग चातुर्य और कूटनीति तो देता है परंतु राहु तामसिक ग्रह है अतः ऐसे में वाणी का कठोर या कुटिल होना संभव है।

बुध + केतु - बुध और केतु का योग अच्छा नहीं माना गया है इस योग में बुध केतु से पीड़ित होता है अतः इस योग के होने पर व्यक्ति को बौद्धिक क्षमता से जुडी समस्याएं रहती है, निर्णय शक्ति कमजोर होती है, ऐसे में व्यक्ति को कई बार उच्चारण या बोलने से जुडी समस्याओं का सामना भी करना पड़ता है, व्यक्ति को हेजिटेशन और न्यूरो प्रॉब्लम्स की सम्भावना भी होती है, शिक्षा में भी ये योग बाधक होता है, व्यक्ति अपने बातों को अच्छे से एक्सप्रेस नहीं कर पाता।

।।श्री हनुमते नमः।।

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