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कुंडली में गुरु शनि योग के शुभ परिणाम

ज्योतिष में बृहस्पति को ज्ञान, विद्या, विवेक, सात्विकता, सच्चरित्रता, समर्पण, प्रबंधन आदि का कारक माना गया है और इन सब के अलावा बृहस्पति जीव अर्थात प्रत्येक व्यक्ति के लिए स्वयं का कारक भी होता है तो वहीँ शनि को कर्म, आजीविका, परिश्रम, दूरदर्शिता, गहन अध्यन, नौकरी, सेवा आदि का कारक मन गया है इसलिए कुंडली में जब बृहस्पति और शनि का योग होता है तो ऐसे में कुछ विशेष गुण व्यक्ति में होते हैं और इसके कुछ विशेष शुभ परिणाम भी प्राप्त होते हैं...

यदि कुंडली में बृहस्पति और शनि का योग हो अर्थात दोनों एक साथ हों तो ऐसे में व्यक्ति गहन अध्यनशील अर्थात प्रत्येक बात को बहुत गहराई से सोचने वाला और दूर की सोच रखने वाला होता है आध्यात्मिक और समाजसेवा के कार्यों में भी ऐसे व्यक्ति की विशेष रुचि होती है, ऐसा व्यक्ति गूढ़ ज्ञान की और बहुत आकर्षित होता है उसे रहस्मयी चीजों में रूचि और हर बात की जड़ तक जाने की आदत होती है तो ये सब गुण तो ऐसे व्यक्ति में होते ही हैं, पर इसके अलावा बृहसपति और शनि के योग की जो खास बात है वो यह है के बृहस्पति जीव कारक है और शनि कर्म और आजीविका का कारक ग्रह है तो यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में बृहस्पति और शनि का योग हो तो ये एक प्रकार से जीव (स्वयं) और कर्म का योग होता है अतः कुंडली में इस योग के बनने पर व्यक्ति को अपने कर्म और आजीविका से बहुत लगाव होता है ऐसा व्यक्ति अपने कार्यों को तो पूरे समर्पण भाव से करने वाला होता ही है पर व्यक्ति की आजीविका या करियर के लिए बृहस्पति शनि का योग बहुत शुभ माना गया है, इस योग के बनने पर करियर में अच्छी स्थिति में मिलती ही है पर इसके अलावा व्यक्ति अपने कर्म क्षेत्र या आजीविका में कुछ विशेष कार्य भी करता है जिससे अपने कार्य के प्रति समर्पण उस व्यक्ति को विशेष सम्मान और प्रतिष्ठा भी दिलाता है, बृहस्पति और शनि का योग होने पर व्यक्ति में अपने कार्यों को लेकर बहुत डेडिकेशन होती है जिससे अपने करियर में भी व्यक्ति अपने कार्य को पूरे समर्पण से करता है और अपने इसी गुण के कारण व्यक्ति अपने करियर में अच्छी सफलता और अन्यों से कुछ विशेष स्थान को प्राप्त करता है, कुंडली में शनि और बृहस्पति के योग की एक खास बात ये और है के ऐसे में व्यक्ति के करियर की उन्नति और सफलता में उसके गुरु की विशेष भूमिका होती है क्योंकि शनि आजीविका है और बृहस्पति गुरु है इसलिए ऐसे में बहुत बार व्यक्ति अपने गुरु के द्वारा आजीविका प्राप्त करता है।

यहाँ एक ध्यान देने वाली बात यह है के यदि बृहस्पति शनि का योग कुंडली में दुःख भावों (6,8,12) में बन रहा हो या दोनों ग्रहों की नीच राशि मेष या मकर में बन रहा हो तो इस योग का पूरा शुभ परिणाम नहीं मिल पाता परन्तु यदि बृहस्पाती शनि का योग केंद्र (1,4,7,10 भाव) त्रिकोण (1,5,9 भाव) या अन्य शुभ भावों में बन रहा हो या तुला व कर्क राशि में हो तो ये योग बहुत शुभ परिणाम देता है और व्यक्ति अपनी आजीविका या करियर में अच्छी उन्नति करता है।

।। श्री हनुमते नमः।।

।। श्री हनुमते नमः।।

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