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नीच राशि में बैठे ग्रह का "नीच भंग" क्या हैं इसके परिणाम

ज्योतिषीय दृष्टि से नीच राशि में होना किसी भी ग्रह की वह स्थिति होती है जहाँ ग्रह बहुत कमजोर अवस्था में और शक्तिहीन होता है इसलिए जन्मकुंडली में किसी भी ग्रह के नीच राशि में होने पर उस ग्रह से सम्बंधित कारक तत्वों की व्यक्ति के जीवन में कमी रहती है उदहारण के तौर पर जैसे किसी व्यक्ति की कुंडली में सूर्य नीच राशि में है तो ऐसे में व्यक्ति के जीवन में यश और प्रतिष्ठा की कमी रहेगी यदि शुक्र नीच राशि में है तो जीवन में आर्थिक विकास नहीं हो पायेगा और इसी प्रकार बृहस्पति कमजोर होने पर शिक्षा में बाधाएं आती हैं... तो इसका तातपर्य यह है के किसी भी ग्रह का नीच राशि में होना व्यक्ति के जीवन में उस ग्रह से मिलने वाले पदार्थों की कमी करता है। नौ ग्रहों की नीच राशि को देखें तो सूर्य की नीच राशि तुला है, चन्द्रमाँ की नीच राशि वृश्चिक, मंगल की कर्क, बुध की मीन, बृहस्पति की मकर, शुक्र की कन्या, शनि की मेष, राहु की धनु और केतु की नीच राशि मिथुन है

इस प्रकार होता है नीचस्थ ग्रह का नीच भंग -

कुंडली में किसी भी ग्रह के नीच राशि होने पर वह ग्रह बहुत कमजोर अवस्था में होता है पर कुछ ऐसी ग्रहस्थितियां भी होती हैं जिनसे कुंडली में नीच राशि में बैठे ग्रह का नीच भंग हो जाता है और उस ग्रह के नीच राशि में होने से मिलने वाले दुष्परिणाम में भी कमी आ जाती है तो आईये देखते ग्रह के नीच भंग की विशेष ग्रहस्थितियाँ -

1. अगर कुंडली में कोई ग्रह अपनी नीच राशि में हो और ऐसे में यदि उस ग्रह की नीच राशि का उच्च नाथ या उस राशि का स्वामी इन दोनों में से कोई भी लग्न से केंद्र (पहला चौथा सातवां दसवा भाव) में स्थित हो तो नीच राशि में बैठे ग्रह का नीच भंग हो जाता है।

(*कोई भी ग्रह जिस राशि में उच्च का होता है वह ग्रह उस राशि का उच्चनाथ कहलाता है जैसे सूर्य मेष में उच्च का होता है तो सूर्य मेष राशि का उच्च नाथ है)

जैसे - शनि अपनी नीच राशि मेष में हो और सूर्य और मंगल में से कोई भी केंद्र में हो तो शनि का नीच भंग हो जायेगा

2. कुंडली में कोई ग्रह अपनी नीच राशि में हो और उस ग्रह की नीच राशि के स्वामी की दृष्टि नीचस्थ ग्रह पर पड़ती हो तो भी नीच भंग हो जाता है।
जैसे - मंगल अपनी नीच राशि कर्क में हो और कर्क के स्वामी चन्द्रमाँ की दृष्टि मंगल पर हो तो मंगल का नीच भंग होगा।

3. कुंडली में कोई ग्रह अपनी नीच राशि में हो और ऐसे में ग्रह की नीच राशि का स्वामी ग्रह उसके साथ बैठा हो तो भी नीचस्थ ग्रह का नीच भंग हो जाता है।
जैसे - शुक्र अपनी नीच राशि कन्या में हो और बुध भी शुक्र के साथ कन्या में बैठ जाये तो शुक्र का नीच भंग हो जायेगा।

4. नीच राशि में बैठे हुए ग्रह के साथ अगर उस ग्रह की नीच राशि का उच्चनाथ भी स्थित हो तो भी नीचस्थ ग्रह का नीच भंग हो जाता है।
जैसे बुध अपनी नीच राशि मीन में हो और मीन का उच्चनाथ शुक्र भी बुध के साथ बैठा हो तो बुध का नीच भंग हो जायेगा।

5. अगर कोई ग्रह नीच राशि में हो और उस नीचस्थ ग्रह की नीच राशि का स्वामी नीच में बैठे हुए ग्रह की राशि में हों अर्थात दोनों में राशि परिवर्तन हो रहा हो तो भी नीचस्थ ग्रह का नीच भंग हो जाता है।
जैसे- कुंडली में बृहस्पति अपनी नीच राशि मकर में हो और मकर का स्वामी शनि बृहस्पति की राशि धनु में बैठ जाये तो यहां बृहस्पति और शनि के बीच राशि परिवर्तन होने से भी बृहस्पति का नीच भंग हो जायेगा।

विशेष - तो यहाँ हमने देखा के कुंडली में किसी ग्रह के नीच राशि में होने पर भी अगर ये कुछ विशेष स्थितियां कुंडली में बनी हुई हों तो उस ग्रह का नीच भंग हो जाता है अब यहाँ असल प्रश्न ये उठता है के क्या नीच भंग होने पर नीच राशि में बैठे ग्रह बलि हो जाता है या फिर नीच राशि में बैठने के जो दुष्परिणाम थे वे वो समाप्त हो जाते हैं तो इसका उत्तर है नहीं, असल में जब भी नीच राशि में बैठे किसी ग्रह का नीच भंग होता है तो ये निश्चित रूप से शुभ तो होता है और नीच भंग होने पर नीच ग्रह से जो दुष्परिणाम मिलने चाहिए वो दुष्परिणाम भी कम हो जाते हैं कहने का तात्पर्य है के नीच भंग होने से नीचस्थ ग्रह की कमजोर स्थिति नियंत्रित हो जाती है नीच ग्रह के कारण जीवन में जितनी समस्याएं आनी चाहियें उतनी नहीं आएँगी और स्थिति नियंत्रित रहेगी पर हाँ नीचस्थ ग्रह से सम्बंधित समस्याओं का सामना तो नीच भंग के बाद भी होता ही है। किसी भी ग्रह के नीच भग्न होने को नीच भंग राज योग भी कहा गया है पर इसका तात्पर्य यह नहीं है के कुंडली में बैठे किसी ग्रह का नीच भंग होने से व्यक्ति के जीवन में राजयोग की स्थिति बनेगी व्यवहारिक ज्योतिष के अनुसार जब तक कुंडली के अन्य शुभ कारक ग्रह और राज कारक शुक्र अच्छी स्थिति में न हों तब तक नीच भंग राजयोग कोई विशेष परिणाम नहीं दिखाता।

तो व्यावहारिक ज्योतिष के अनुसार निष्कर्ष यह है के नीच राशि में बैठे ग्रह का नीच भंग होना बिलकुल एक शुभ योग है जिससे नीचस्थ ग्रह की स्थिति में सुधार होता है और नीच ग्रह के दुष्परिणामों में कमी आती है अधिक समस्याएं नहीं होती पर नीच राशि में बैठे ग्रह से जुडी कुछ समस्याओं का सामना तो व्यक्ति को होता ही है नीच भंग केवल स्थिति को नियंत्रित करता है नीच ग्रह को मजबूत नहीं करता।

।। श्री हनुमते नमः।।

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